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दिल्ली हिंसा में विधवा हुईं महिलाओं का आखिर एक साल बाद कैसा है हाल?

पिछले साल दिल्‍ली में हुए थे दंगे. (File pic)
पिछले साल दिल्‍ली में हुए थे दंगे. (File pic)

उत्‍तर पूर्वी दिल्‍ली में पिछले साल हुए दंगों (Delhi Riots) में विधवा हुईं ऐसी 15 से अधिक महिलाएं बुधवार को करदमपुरी में एकत्र हुईं. सभी ने इस दौरान शिकायत की कि उन्‍हें जो मुआवजा दिया गया था, वह उनके लिए पूरा नहीं हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2021, 5:39 PM IST
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नई दिल्‍ली. उत्‍तर पूर्वी दिल्‍ली में पिछले साल हुए दंगों (Delhi Riots) के दौरान अपने पति को खो चुकी महिलाओं की जिंदगी अभी भी पटरी पर सामान्‍य रूप से नहीं लौटी है. बुधवार को करदमपुरी में ऐसी 15 से अधिक महिलाएं एकत्र हुईं. सभी ने इस दौरान शिकायत की कि उन्‍हें जो मुआवजा दिया गया था, वह उनके लिए पूरा नहीं हो रहा है. अधिकांश का कहना है कि उनके पास जॉब नहीं है. कुछ का कहना है कि उन्‍हें हिंसा के दौरान टूटे अपने घरों की मरम्‍मत करानी है.

इन महिलाओं को माकपा कार्यकर्ताओं ने एकत्र किया था. इनमें बृंदा करात भी शामिल हैं. इन्‍होंने इन महिलाओं के बच्‍चों की स्‍कॉलरशिप के लिए भी आश्‍वस्‍त किया है. अपने 6 बच्‍चों के साथ लोनी में रहने वाली 31 साल की रुकसाना बानो ने पिछले साल दिल्‍ली दंगे में अपने पति फिरोज को खो दिया था.

परिवार का दावा है कि फिरोज घर से काम के लिए निकला था, रास्‍ते में उसे दंगाइयों ने मार दिया और उसकी लाश का एक ऑटोरिक्‍शा में डाल दिया. रुखसाना ने बताया कि उन्‍हें फिरोज का शव उसकी मौत के 17 दिन बाद अस्‍पताल में मिला था. पहले फिरोज के घरवालों ले रुखसाना का साथ दिया. लेकिन अब उसे ही सारी व्‍यवस्‍थाएं करनी पड़ती हैं. दिल्‍ली सरकार ने उन्‍हें 10 लाख रुपये मुआवजा दिया था. लेकिन अब उन्‍हें बच्‍चों को स्‍कूल में भर्ती कराना है. फीस भरनी है. लॉकडाउन के कारण भी वह कुछ नहीं कमा पाईं.




इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इसी तरह 30 साल के मोहम्‍मद फुरकान को यमुना विहार में गोली मार दी गई थी. वह अपने पीछे पत्‍नी फिरदौस और दो छोटे बच्‍चे छोड़ गए हैं. फिरदौस का कहना है कि वह करदमपुरी में अकेली रहती है और डरती है कि भविष्‍य में वह अपने घर को भी खो सकती है.

फिरदौस बताती है कि उसका देवर मदद करने वाले स्‍वभाव का है. लेकिन उसके ससुर चाहते हैं कि वह भजनपुरा जाकर अपने मायके में रहे. वह चाहती है कि उसके बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा मिले. फुरकान उस दिन बच्‍चों के लिए खाने की चीज लेने गया था. उसे उसका शव 3 दिन बाद मिला. फिरदौस के ससुरालवालों के पास मुआवजा राशि है. वे उसे प्रतिमाह 10 हजार रुपये घर चलाने के लिए देते हैं.
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