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SERO सर्वे में संकेत- जल्द कोरोना के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी डेवलप कर सकती है पूरी दिल्ली

होटल पर पैसे लेकर क्वारंटीन किए गए यात्रियों को भेजने का आरोप है (सांकेतिक तस्वीर)

होटल पर पैसे लेकर क्वारंटीन किए गए यात्रियों को भेजने का आरोप है (सांकेतिक तस्वीर)

सर्वेक्षण (sero-survey) में पाया गया है कि एक जिले में एकत्रित नमूनों में से 50-60 प्रतिशत लोगों में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी (Anti-bodies)विकसित हुई हैं. दिल्ली की आबादी दो करोड़ से अधिक है जो कि 11 जिलों में फैली हुई है.

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    नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में पांचवें दौर के सीरो-प्रीवलेंस सर्वेक्षण (sero-survey) के नतीजों से संकेत मिला है कि हो सकता है दिल्ली की आबादी कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ समूह प्रतिरोधक क्षमता (Herd Immunity) हासिल करने की ओर बढ़ रही हो. यह जानकारी सूत्रों ने सोमवार को दी. सूत्रों ने कहा कि सर्वेक्षण में पाया गया है कि एक जिले में एकत्रित नमूनों में से 50-60 प्रतिशत लोगों में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हुई हैं. अधिकारियों ने कहा कि सर्वेक्षण कुछ दिनों पहले समाप्त हुआ. इसके लिए शहर भर के विभिन्न जिलों के 25,000 से अधिक लोगों के नमूने एकत्रित किए गए. दिल्ली की आबादी दो करोड़ से अधिक है जो कि 11 जिलों में फैली हुई है.

    एक सूत्र ने जिले का नाम बताये बिना कहा, ‘एक जिले में, सीरो-प्रीवलेंस दर 50-60 प्रतिशत के बीच है, जिससे संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में लोगों में एंटीबॉडी विकसित हुई हैं, इसलिए हम कह सकते हैं कि शहर समूह प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त करने की दिशा में बढ़ रहा है.’ विशेषज्ञों का कहना है कि समूह प्रतिरोधक क्षमता एक जनसंख्या तब विकसित होना कहा जाता है जब एक सीरो-प्रीवलेंस सर्वेक्षण में 50-60 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी पाई जाती है.



    किसे कहते हैं हर्ड इम्युनिटी या समूह प्रतिरोधक क्षमता
    समूह प्रतिरोधक क्षमता उसे कहते हैं जब एक समूह के लोगों के वायरस से संक्रमित होने के बाद कई लोगों में इसकी प्रतिक्रिया में एंटीबॉडी बनने की वजह से इसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है. इसलिए, ऐसे लोग संक्रमित व्यक्ति और अप्रभावित लोगों के बीच एक सुरक्षात्मक परत बन जाते हैं, जिससे वायरस संक्रमण की श्रृंखला टूट जाती है.

    पांच सीरो सर्वेक्षण हो चुके
    यह पांचवां ऐसा सर्वेक्षण है जो यहां किया गया लेकिन दिल्ली सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. पहला सीरो-प्रीवलेंस 27 जून से 10 जुलाई के बीच दिल्ली सरकार द्वारा नेशनल सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल (एनसीडीसी) के सहयोग से किया गया था. इसमें 21,387 नमूनों का इस्तेमाल किया गया था और इससे यह बात पता चली थी कि सर्वेक्षण में शामिल लगभग 23 प्रतिशत लोग कोरोना वायरस के संपर्क में आये थे. बाद में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में किए गए इस सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी कि 29.1 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी थी.

    सितम्बर और अक्टूबर के सर्वेक्षण में, आंकड़े 25.1 प्रतिशत और अक्टूबर में 25.5 प्रतिशत थे. दिल्ली में रविवार को कोविड​​-19 के 185 नये मामले सामने आये थ. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने हाल ही में कहा था कि दिल्ली में महामारी की स्थिति अब नियंत्रण में है. दिल्ली में संक्रमितों की कुल संख्या 6.33 लाख से अधिक है और रविवार को नौ और मरीजों की मौत होने से मृतक संख्या बढ़कर 10,808 हो गई.

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