दिल्ली: एक ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे तीन जिंदगियां, सभी को अस्पताल में दाखिले का इंतजार

Oxygen Crisis in Delhi: तीनों परिवारों के सदस्य अपने मरीजों के आसपास खड़े होकर बारी-बारी से ऑक्सीजन (Oxygen) सिलेंडर एडजस्ट कर रहे हैं. वे बाहर रहकर अस्पताल में दाखिले का इंतजार कर रहे हैं. इस दौरान डॉक्टर और अस्पातल के दूसरे कर्मचारी, जो भी कुछ कर सकते हैं वे कर रहे हैं.

Oxygen Crisis in Delhi: तीनों परिवारों के सदस्य अपने मरीजों के आसपास खड़े होकर बारी-बारी से ऑक्सीजन (Oxygen) सिलेंडर एडजस्ट कर रहे हैं. वे बाहर रहकर अस्पताल में दाखिले का इंतजार कर रहे हैं. इस दौरान डॉक्टर और अस्पातल के दूसरे कर्मचारी, जो भी कुछ कर सकते हैं वे कर रहे हैं.

Oxygen Crisis in Delhi: तीनों परिवारों के सदस्य अपने मरीजों के आसपास खड़े होकर बारी-बारी से ऑक्सीजन (Oxygen) सिलेंडर एडजस्ट कर रहे हैं. वे बाहर रहकर अस्पताल में दाखिले का इंतजार कर रहे हैं. इस दौरान डॉक्टर और अस्पातल के दूसरे कर्मचारी, जो भी कुछ कर सकते हैं वे कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:18 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) संकट के बीच पूरा भारत मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत का सामना कर रहा है. इस दौरान देश के कई हिस्सों से परेशान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा या मृत्यु के बाद उन्हें सम्मानपूर्व विदा भी नहीं किया जा सका. इसी बीच एक तस्वीर राजधानी दिल्ली से भी आई, जहां एक ऑक्सीजन सिलेंडर (Oxygen Cylinder) के भरोसे तीन जिंदगियां जमीन पर महामारी से जंग कर रही हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्वती देवी, ओम दत्त शर्मा और दिपक शुक्रवार को जीटीबी अस्पताल के बार लेटे हुए हैं. ये तीनों एक ही ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे हैं. दत्त का परिवार बताता है कि कहीं भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं थे और वे किसी और मरीज के लिए जमीन पर खाली जगह छोड़ना नहीं चाहते थे. हालात इतने दुखद हैं कि गुरुवार को ही दत्त के 40 वर्षीय बेटे ने बिस्तर का इंतजार करते हुए इसी अस्पताल के बाहर अपनी जान गंवाई है.

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पार्वती के बेटे राम कुमार बताते हैं कि उनकी मां को बीते दो दिनों से कफ और फीवर है. वे अपनी मां और भाई के साथ शुक्रवार को अस्पताल में बिस्तर की तलाश में पूर्वी दिल्ली के मंडावली से निकले थे. उन्होंने कहा 'हम शांति मुकंद और मैक्स गए, लेकिन वहां बिस्तर नहीं मिल सका. सुबह करीब 5 बजे हम डॉक्टर हेडगेवार अस्पताल पहुंचे, जहां हमारी मां की कोविड जांच हुई. उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन वे कहते हैं कि उनके पास उन्हें देने के लिए ऑक्सीजन और बिस्तर नहीं है. वे सीने में तेज दर्द की शिकायत कर रही थीं.'
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इस सिलेंडर से जुड़े तीसरे शख्स दीपक हैं. दीपक एक दुकान चलाते हैं और अपनी पत्नी के साथ शुक्रवार दोपहर अस्पताल आए थे. उन्होंने 10 और 7 साल के दो बच्चों को घर पर छोड़ा था. उनकी पत्नी रेखा बताती हैं 'उन्हें गुरुवार को बुखार था, लेकिन पैरासीटामॉल लेने के बाद ठीक हो गए थे. इस सुबह उन्होंने कहा कि उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है. हम स्वामी दयानंद अस्पताल भागे, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका इलाज नहीं किया जा सकता. हमने ऑटो लिया और कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचे, लेकिन दोनों जगहों पर हमें कहा गया कि बिस्तर और ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है.' परिवार का एक दोस्त उन्हें आखिर में जीटीबी अस्पताल लेकर आया.





शुक्रवार को तीनों परिवारों के सदस्य अपने मरीजों के आसपास खड़े होकर बारी-बारी से ऑक्सीजन सिलेंडर एडजस्ट कर रहे हैं. वे बाहर रहकर अस्पताल में दाखिले का इंतजार कर रहे हैं. इस दौरान डॉक्टर और अस्पातल के दूसरे कर्मचारी, जो भी कुछ कर सकते हैं वे कर रहे हैं. वे मरीजों को हर घंटे ऑक्सीमीटिर के साथ देख रहे हैं.
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