देर रात दिल्ली की सड़कों पर उतरी महिलाएं, 'द फियरलैस रन' में लिया हिस्सा

आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में हर दिन पांच महिलाओं का रेप होता है.

News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 10:54 AM IST
देर रात दिल्ली की सड़कों पर उतरी महिलाएं, 'द फियरलैस रन' में लिया हिस्सा
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Updated: September 11, 2018, 10:54 AM IST
जिस दिल्ली में दिन के उजाले में भी महिलाएं घर से बाहर निकलने से कतराती हैं वहां आधी रात को महिलाओं ने 'द फियरलैस रन' में हिस्सा लिया. 9 सितंबर और 10 सितंबर के मध्यरात्रि दिल्ली पुलिस ने इसका आयोजन किया. दिल्ली पुलिस पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर और डीसीपी ने news18 को बताया कि उनका मकसद महिलाओं को पब्लिक प्लेस में एक सुरक्षित माहौल दिलाना और उनके आत्म विश्वास को बढ़ाना है.

डीसीपी ने कहा, 'महिलाओं को भी देर रात सड़कों पर निकलने का उतना ही हक है जितना पुरुषों को है.'

कनॉट प्लेस में 'द फियरलैस रन' में हिस्सा लेने के लिए करीब 200 महिलाएं एकत्र हुईं और इनर सर्किल पर दौड़ लगाई. यूनाइटेड सिस्टर फाउंडेशन और नई दिल्ली पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस मैराथन में महिलाओं ने देर रात बिना डरे पांच किलोमीटर तक की दौड़ लगाई. 2012 में मिलिंद सोमन द्वारा स्थापित एक वार्षिक महिला मैराथन 'द पिंकथॉन' का आयोजन भी इसी संगठन ने किया था.

मैराथन की अगुआई करने वाली महिलाओं में एसिड अटैक सर्वाइवर और वीमेन राइट एक्टिविस्ट लक्ष्मी अग्रवाल भी शामिल थीं. बता दें कि 2005 में दिल्ली के खान बाजार में लक्ष्मी पर 32 वर्षीय व्यक्ति ने एसिड अटैक किया था, क्योंकि लक्ष्मी ने उसका मैरिज प्रपोजल ठुकरा दिया था. उस वक्त लक्ष्मी 15 साल की थीं. 28 वर्षीय लक्ष्मी का कहना है कि इस हादसे के बाद उन्हें जीने के लिए साहस और आजादी हासिल करने में काफी समय लगा था.

लक्ष्मी ने कहा, 'मैंने इस मैरथन में भाग लिया क्योंकि मैं देखती हूं कि ज्यादातर महिलाएं रात में बाहर जाने से डरती हैं. मेट्रो जैसे स्थानों में भी जब कुछ पुरुष नशे के हालात में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, तब पीड़ित और आसपास के लोग चुप रह जाते हैं. इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे समय में जब महिलाएं दूसरी महिलाओं को देर रात सड़कों पर देखेंगी तो उन्हें भी ऐसा करने का साहस मिलेगा.'

राजधानी में 2015 में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'हिम्मत' एप लॉन्च की थी, जिसका अपडेट वर्जन 'हिम्मत प्लस' इस मौके पर लॉन्च किया गया.



इस साल मार्च में एक संसदीय पैनल ने बताया था कि इस एप के लॉन्च होने के बाद से अब तक करीब 30 हजार महिलाओं ने इस एप को इंस्टॉल किया है. 25 मिलियन की आबादी वाले इस शहर में इस तरह के आंकड़े का साफ मतलब है कि यह असफल रहा है.

डीसीपी वर्मा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, 'हिम्मत प्लस' उच्च दक्षता वाली एप है, इसके डेटाबेस में वृद्धि हुई है और पुलिस प्रतिक्रिया के समय और सहायता में भी सुधार किया गया है.'

इस मैराथन में डीसीपी ने महिलाओं की सुरक्षा प्रदान करने वाली अन्य सेवाओं और योजनाओं की जानकारी भी दी.

हालांकि इसपर लक्ष्मी ने कहा कि जब तक पुलिस संवेदनशील नहीं हो जाती, तब तक कोई अपडेट एप आपकी मदद नहीं कर सकते.

जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में कमी आई है, जबकि आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं.  हाल के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी 2017 में हर दिन पांच महिलाओं का रेप हुआ. अप्रैल 2017 तक, 563 महिलाओं का रेप हुआ. लेकिन अप्रैल 2018 तक यह आंकड़ा 578 हो गया. जिसका साफ मतलब है कि आंकड़ों में वृद्धि हुई है.
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