दिल्ली का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह चरमराया, सभी को दें इलाज: हाईकोर्ट

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने की टिप्‍पणी. (File pic)

Delhi Covid-19 Situation: दिल्ली सरकार ने जब दावा किया कि आधारभूत ढांचा चरमराया नहीं है तो उच्च न्यायालय ने उससे कहा- आप शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रहे हैं जो अपना सिर रेत में छुपा लेता है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर का प्रकोप झेल रही राष्ट्रीय राजधानी के लोगों को लिए दिल्ली हाईकोर्ट (High Court) ने आप सरकार को निर्देश जारी किए हैं. उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को कोविड-19 (Covid-19) से पीड़ित दिल्ली के सभी निवासियों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि दिल्ली में मौजूद चिकित्सकीय आधारभूत ढांच पूरी तरह से चरमरा गया है. दिल्ली सरकार ने जब दावा किया कि आधारभूत ढांचा चरमराया नहीं है तो उच्च न्यायालय ने उससे कहा- आप शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रहे हैं जो अपना सिर रेत में छुपा लेता है.

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया है कि जो लोग कोविड-19 से संक्रमित है उन्हें इलाज के लिए मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराए. दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि संविधान का आर्टिकल 21 लोगों को जीने के अधिकार देता है जिससे हर व्यक्ति आजादी से जी सके. हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए उन्हें शपथ दिलाई गई है. इसलिए हम यहां ये आदेश दे रहे हैं ताकि इस शख्स की जान बच पाए.

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और खराब हो सकती है बीमार लोगों की हालत
अदालत ने कहा कि लेकिन उसी समय हम इस तथ्य को नहीं छोड़ सकते हैं कि शहर में हजारों लोग इसी बीमारी से पीड़ित हैं और यदि याचिकाकर्ता की तुलना में बदतर ना हो तो उनकी हालत भी उतनी ही खराब हो सकती है. कोर्ट ने कहा कि उनका भी वेंटिलेटर सुविधा के साथ आईसीयू बेड के लिए बराबर का दावा बनता है.

उच्च न्यायालय ने केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता ने इस अदालत का दरवाजा खटखटाया है, अदालत इस तरह का आदेश जारी तक उसे प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सा सुविधा दिलाने के लिए आदेश जारी नहीं भी कर सकती है. दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट में एक 52 साल के व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. ये शख्स कोविड से संक्रमित है और हालात गंभीर है.

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इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिवालिया प्रक्रिया की वजह से बंद 150 बिस्तरों वाले मल्टी स्पैश्यिलिटी अस्पताल का इस्तेमाल नहीं करने के दिल्ली सरकार के तर्क पर बृहस्पतिवार को सवाल उठाया जबकि इस अस्पताल की स्थापना करने वाले डॉक्टर ने इसके लिये अपनी मेडिकल टीम भेजने की पेशकश भी की है.



उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर दिल्ली सरकार से ‘‘लीक से हटकर सोचने’’ के लिए कहा. अदालत ने कहा कि ‘‘हम सामान्य परिस्थिति में नहीं है’’ और राष्ट्रीय राजधानी में मरीजों के लिए अस्पतालों में बिस्तरों की कमी है.