अधर में लटका दिल्ली के स्मॉग टावर्स का काम, SC ने दी तीखी प्रतिक्रिया

अधर में लटका दिल्ली के स्मॉग टावर्स का काम, SC ने दी तीखी प्रतिक्रिया
दिल्ली में स्मॉग टावर लगाने में और ज्यादा वक्त लग सकता है. (फाइल फोटो)

स्मॉग टावर (Smog Towers) के काम को लीड कर रहा आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) प्रोजेक्ट से पीछे हट गया है. इस वजह से प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

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नई दिल्ली. हर बार सर्दियों की शुरुआत में भीषण स्मॉग (Smog) का सामना करने वाली दिल्ली (Delhi) को स्मॉग टावर्स (Smog Towers) के लिए और इंतजार करना होगा. दरअसल स्मॉग टावर के काम को लीड कर रहा आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) प्रोजेक्ट से पीछे हट गया है. हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि आईआईटी बॉम्बे इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह नहीं हटा है, लेकिन अपने रोल को छोटा कर लिया है. मामले को लेकर बुधवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इसके लिए आईआटी बॉम्बे को दंडित कर सकता है. स्मॉग टावर्स के काम में देरी को कोर्ट ने अवमानना माना है.

आईआईटी बॉम्बे का रोल
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक आईआईटी बॉम्बे इस प्रोजेक्ट में अपने रोल को लेकर दोबारा विचार कर रहा है. दरअसल इस तरह का इकलौता टावर चीन के जियान में मौजूद है जिसे मिनेसोटा यूनिवर्सिटी ने डिजाइन किया है. लेकिन इस टावर के सकारात्मक प्रभाव को लेकर अब तक कोई डेटा नहीं उपलब्ध है. आईआईटी बॉम्बे ने ही इस टावर के लिए प्रपोजल दिया था और वही इस प्रोजेक्ट को लीड भी कर रहा था. अब आईआईटी बॉम्बे पहले ऐसे टावर के प्रभाव को परखना चाहता है. इस वजह से संभव है कि अब टावर बनने में देर लगे.

कुल 36 करोड़ की लागत
गौरतलब है कि इस टावर की कुल लागत 36 करोड़ थी जिसे दिल्ली और केंद्र सरकार मिलकर वहन कर रहे थे. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत बीते साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद हुई थी. इस प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और मिनेसोटा यूनिवर्सिटी को मिलकर दो स्मॉग टावर बनाने थे. एक टावर आनंद विहार और दूसरा कनॉट प्लेस में लगाया जाना था. इस प्रोजेक्ट को अप्रैल में ही पूरा हो जाना था लेकिन काम अधर में लटक गया है.



सुप्रीम कोर्ट ने दी तीखी प्रतिक्रिया
बीते सप्ताह भी जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर आश्चर्य प्रकट किया था. बेंच ने कहा था कि 13 जनवरी 2020 के दिए गए आदेश के मुताबिक इन टावर्स का काम अप्रैल तक पूरा हो जाना चाहिए था. कोर्ट ने कहा था कि काम पूरा करने को लेकर हमारे आदेश का बिल्कुल सम्मान नहीं किया गया.
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