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जाति जनगणना: नीतीश कुमार की अगुवाई में पीएम मोदी से मिलेंगे 11 दल, UP चुनाव ने बढ़ाई केंद्र की चिंता

सीएम नीतीश कुमार की अगुवाई में पार्टियां पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी. (फाइल फोटो)

सीएम नीतीश कुमार की अगुवाई में पार्टियां पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी. (फाइल फोटो)

Caste Census: पार्टी ने 14 साल के लंबे इंतजार के बाद 2017 में ओबीसी (OBC) समर्थन से ही देश के सबसे बड़े राज्य में सरकार बनाई थी. वहीं, पार्टी राज्य के अपने सवर्ण जनाधार के लिए भी प्रतिबद्ध है.

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नई दिल्ली. बिहार के मुख्मयंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की अगुवाई में 11 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 23 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मुलाकात करने जा रहा है. इस दौरान ये नेता केंद्र के सामने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की गणना के लिए जाति जनगणना की मांग करेंगे. इन नेताओं में सीएम कुमार के विरोधी तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश प्रतिनिधि का भी नाम शामिल है. अब उत्तर प्रदेश चुनाव से 6 महीने पहले ही इस बात पर फैसले लेना मोदी सरकार के लिए थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है.

पार्टी ने 14 साल के लंबे इंतजार के बाद 2017 में ओबीसी समर्थन से ही देश के सबसे बड़े राज्य में सरकार बनाई थी. वहीं पार्टी राज्य के अपने सवर्ण जनाधार के लिए भी प्रतिबद्ध है. खासतौर से तब जब 2021 के चुनाव में राम मंदिर के बड़े चुनावी भूमिका के आसार हैं. इसे देखते हुए समाजवादी पार्टी के अखिलेश ने भी अपना जोर लगाना तेज कर दिया है.

संसद में यादव इस मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं. वहीं सपा ने यूपी में एक अफवाह फैला रखी है कि ‘हम तो किसी गिनती में आते ही नहीं हैं.’ ऐसा कर यादव सपा की तरफ गैर-यादव वोट को आकर्षित करने में लगे हुए हैं. साथ ही उन्होंने वादा किया है कि अगर वे अगले साल सत्ता में वापस आते हैं, तो यूपी में जाति जनगणना के आदेश दिए जाएंगे. इसके चलते कई राजनीतिक दलों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार यूपी चुनाव को देखते हुए विपक्षी दल को कमजोर करने के लिए यह ‘घोषणा’ कर सकती है कि वे ‘भविष्य में’ जाति जनगणना का आयोजन करेंगे.

संसद में यादव इस मुद्दे पर खुलकर बोल रहे हैं. वहीं, सपा ने यूपी में एक अफवाह फैला रखी है कि ‘हम तो किसी गिनती में आते ही नहीं हैं.’ ऐसा कर यादव सपा की तरफ गैर-यादव वोट को आकर्षित करने में गलगे हुए हैं. साथ ही उन्होंने वादा किया है कि अगर वे अगले साल सत्ता में वापस आते हैं, तो यूपी में जाति जनगणना के आदेश दिए जाएंगे. इसके चलते कई राजनीतिक दलों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार यूपी चुनाव को देखते हुए विपक्षी दल को कमजोर करने के लिए यह ‘घोषणा’ कर सकती है कि वे ‘भविष्य में’ जाति जनगणना का आयोजन करेंगे.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इस बात को स्वीकारा कि पूरा सियासी मत जाति जनगणना कराने को लेकर एकजुट नजर आ रहा है. बीजेपी के सहयोगी नीतीष कुमार की तरफ से मोदी सरकार पर डाला जा रहा जाति जनगणना का दबाव यूपीए सहयोगी लालू प्रसाद और मुलायम सिंह यादव की याद दिलाता है. दोनों नेताओं ने जाति जनगणना कराने का ऐसा ही दबाव 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार पर डाला था. केंद्र का मानना है कि अगर वे इसका आदेश नहीं देंगे, तो कुमार अपने राज्य के लिए ओबीसी की गिनती का आदेश दे सकते हैं.

पीएम के साथ होने वाली बैठक में एक बीजेपी नेता, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी और वीआईपी दल के मुकेश साहनी समेत एनडीए के सभी सहयोगी दल होंगे. इस दौरान बिहार के सभी 10 राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व किया जाएगा. एक बीजेपी नेता ने बताया, ‘जाति जनगणना का आदेश देना एक बात है और उस डेटा को सार्वजनिक करना दूसरी बात है, क्योंकि बाद में इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से लगाई गई आरक्षण पर 50 फीसदी सीमा के उल्लंघन पर मुश्किलों का एक पिटारा खुल जाएगा. कांग्रेस ने भी 2011 में जाति जनगणना के आदेश दिए थे, लेकिन कभी भी उसे सार्वजनिक नहीं किया.’

पीएम के साथ होने वाली बैठक में एक बीजेपी नेता, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी और वीआईपी दल के मुकेश साहनी समेत एनडीए के सभी सहयोगी दल होंगे. इस दौरान बिहार के सभी 10 राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व किया जाएगा. एक बीजेपी नेता ने बताया, ‘जाति जनगणना का आदेश देना एक बात है और उस डेटा को सार्वजनिक करना दूसरी बात है, क्योंकि बाद में इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से लगाई गई आरक्षण पर 50 फीसदी सीमा के उल्लंघन पर मुश्किलों का एक पिटारा खुल जाएगा. कांग्रेस ने भी 2011 में जाति जनगणना के आदेश दिए थे, लेकिन कभी भी उसे सार्वजनिक नहीं किया.’

सामान्य जनगणना के लिए सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस 2011 (SECC) किया गया था, लेकिन उसकी सोशियो इकोनॉमिक तारीख 2015 में जारी की गई थी. हालांकि, इस दौरान भी जाति जनगणना को सार्वजनिक नहीं किया गया था. यूपी और एनडीए दोनों ने अलग-अलग जन कल्याण योजनाओं के तहत लाभार्थियों की पहचान के लिए SECC डेटा का इस्तेमाल किया था, लेकिन जातियों से जुड़ा डेटा सार्वजनिक करने से बचते रहे.

तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने डेटा की मांग की थी, लेकिन अभी तक यह व्यर्थ ही रहा है. ओडिशा ने ओबीसी की गिनती के लिए खुद जाति जनगणना के आदेश दिए थे. बीजू जनता दल के सांसदों ने जाति जनगणना की मांग को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी.

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