संसद में उठा लापता बच्चों का मुद्दा, हर 8 मिनट में गायब हो रहा एक मासूम

संसद के शून्यकाल में कांग्रेस नेता डॉ. टी सुब्बीरामी रेड्डी ने कहा कि बीते दस साल में सात लाख से अधिक बच्चे लापता हुए हैं.

भाषा
Updated: July 25, 2019, 5:51 PM IST
संसद में उठा लापता बच्चों का मुद्दा, हर 8 मिनट में गायब हो रहा एक मासूम
प्रतिकात्मक तस्वीर
भाषा
Updated: July 25, 2019, 5:51 PM IST
राज्यसभा में गुरुवार को बड़ी संख्या में बच्चों के लापता होने का मुद्दा उठा. मांग की गई कि ऐसे बच्चों का पता लगाने के लिए गृह मंत्रालय को एक विशेष प्रकोष्ठ का गठन करना चाहिए. संसद के शून्यकाल में कांग्रेस नेता डॉ. टी सुब्बीरामी रेड्डी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘बीते दस साल में सात लाख से अधिक बच्चे लापता हुए हैं. दिल्ली तथा अन्य प्रदेशों में बच्चों के लापता होने का सिलसिला जारी है. इनमें से 60 फीसदी बच्चों का पता नहीं चल पाता है.’

रेड्डी ने कहा कि कुछ बच्चों का पता चल जाता है और कुछ का नहीं. जिन बच्चों का पता नहीं चल पाता, वे या तो भिक्षावृत्ति या देह व्यापार के धंधे में धकेल दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि कई बच्चे उन प्रवासियों के होते हैं जो रोजगार की तलाश में एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में जाते हैं.

हर 8 मिनट में होता है एक बच्चा लापता
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो रहा है. उच्चतम न्यायालय ने लापता बच्चों का पता लगाने के लिए ‘सहायता डेस्क’ बनाने को कहा है. सरकार ने ऐसे बच्चों को खोजने के लिए ‘ऑपरेशन स्माइल’ चलाया है. लेकिन बच्चों के लापता होने का सिलसिला जारी है. रेड्डी ने कहा कि ऐसे बच्चों का पता लगाने के लिए गृह मंत्रालय को एक विशेष प्रकोष्ठ का गठन करना चाहिए. विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया.

‘आम्रपाली’ मुद्दे पर सरकार से मांगा जवाब
भाजपा के विजय गोयल ने भवन निर्माताओं के हाथों ठगे गए उन लोगों का मुद्दा उठाया जिन्होंने जीवन भर की अपनी खून पसीने की कमाई से मकान खरीदा लेकिन उन्हें मकान नहीं मिल पाया. गोयल ने ‘आम्रपाली’ बिल्डर के मामले में हाल ही में दिए गए उच्चतम न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए सरकार से जानना चाहा, ‘क्या सरकार एनबीसीसी के माध्यम से उन अन्य परियोजनाओं को भी अपने हाथों में लेगी जिनके बिल्डरों ने घर खरीदारों को झांसा दिया है?’

भाजपा सदस्य ने कहा, ‘कई बिल्डर तो रेरा (रियल एस्टेट नियमन एवं विकास अधिनियम) के तहत पंजीकृत भी नहीं हैं. आम्रपाली के मामले में 48,000 खरीदारों को न्यायालय ने राहत दी है लेकिन ठगने वाले बिल्डर और भी हैं.’ उन्होंने मांग की कि इस तरह घर खरीदारों को ठगने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
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साहित्य के अनुवाद के लिए एक परिषद बने
इसी पार्टी के विनय पी सहस्रबुद्धे ने सुझाव दिया कि वैश्विक भाषाओं में भारतीय साहित्य के स्तरीय अनुवाद के लिए एक परिषद गठित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के बाद आज तक किसी भी भारतीय को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार नहीं मिला.

माकपा ने गांजे की लत का उठाया मुद्दा
माकपा सदस्य के सोमप्रसाद ने युवाओं में बढ़ती गांजे की लत का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ निरोधक एनडीपीएस कानून में संशोधन कर इसे कठोर बनाया जाना चाहिए ताकि गांजे का धंधा करने वाले लोग गिरफ्तारी से बच न सकें.

वन अधिकार अधिनियम मामला गूंजा
वाईएसआर कांग्रेस के वी विजय साई रेड्डी ने वन अधिकार अधिनियम से जुड़ा मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि यह अधिनियम वनवासियों के कल्याण के लिए बनाया गया था. इसके कार्यान्वयन के 13 साल हो गए. लेकिन वनवासियों के 45 लाख दावों में से 28 लाख दावे ऐसे कारणों के चलते खारिज कर दिए गए जो महत्वपूर्ण नहीं थे. रेड्डी ने सरकार से वनवासियों के हितों की रक्षा करने का अनुरोध किया.

बीजद सदस्य अमर पटनायक ने मांग की कि रेलवे स्टेशनों को विश्व स्तरीय बनाने की रेल मंत्रालय की परियोजना में ओडिशा के पूर्वी हिस्से और पश्चिमी हिस्से से कम से कम एक एक रेलवे स्टेशन को शामिल किया जाना चाहिए.

कलिंग रेजीमेंट की मांग
इसी पार्टी के सस्मित पात्रा ने कलिंग रेजीमेंट के गठन की मांग करते हुए कहा कि रक्षा के क्षेत्र में ओडिशा ने उल्लेखनीय योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि बीजद संस्थापक बीजू पटनायक के समय से कलिंग रेजीमेंट के गठन की मांग की जा रही है और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

सदन में कांवड़ झील का उठा मुद्दा
मनोनीत सदस्य राकेश सिन्हा ने बिहार की कांवड़ झील का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 700 साल पुरानी इस झील में हर साल प्रवासी पक्षी आते हैं. यह झील अब सूख रही है. उन्होंने सरकार से इस झील को पुनर्जीवित करने की मांग की.

इनके अलावा अन्नाद्रमुक के ए नवनीत कृष्णन, तृणमूल कांग्रेस के मानस रंजन भुनिया, जेएंडके पीडीपी के नजीर अहमद लावे तथा कांग्रेस के पी एल पुनिया ने भी अपने-अपने मुद्दे उठाए.

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First published: July 25, 2019, 5:21 PM IST
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