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शहरों में मकानों की कमी की स्थिति सुधरी, आंकड़ा घटकर एक करोड़ पर आया: सरकार

भाषा
Updated: November 15, 2017, 8:09 PM IST
शहरों में मकानों की कमी की स्थिति सुधरी, आंकड़ा घटकर एक करोड़ पर आया: सरकार
शहरों में मकानों की कमी की स्थिति सुधरी, आंकड़ा घटकर एक करोड़ पर आया: सरकार (PTI)
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Updated: November 15, 2017, 8:09 PM IST
देश के शहरी इलाकों में आवास की कमी की स्थिति में पहले से सुधार आया है. इन क्षेत्रों में मकानों की कमी का आंकड़ा कम होकर अब करीब एक करोड़ रह गया है. वर्ष 2011 में मकानों की कमी का ये आंकड़ा 1.87 करोड़ पर था. केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने इसके साथ ही उन्होंने 2022 तक सभी को विभिन्न योजनाओं के ज़रिए आवास उपलब्ध कराने का वादा भी किया.

उन्होंने कहा कि आवास की कमी को पूरा करने तथा किफायती घर मुहैया कराने के लिए सरकार अपनी अतिरिक्त ज़मीन का इस्तेमाल करेगी. उन्होंने रियल इस्टेट कंपनियों को किफायती आवास परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा.

पुरी ने आरआईसीएस रियल इस्टेट सम्मेलन मे कहा कि सरकार के 2011 में कराए गए एक तक़नीकी अध्ययन के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में आवासों की कमी का आंकड़ा 1.87 करोड़ इकाई रहा था. इसमें 96 फीसदी आवास आर्थिक रूप से कमज़ोर योजना और निम्न आय वर्ग के शामिल थे. इसके बाद 2011 के बाद हुए अध्ययनों में ये आंकड़ा संशोधित होकर करीब एक करोड़ इकाई के आसपास आ गया. हालांकि ये भी काफी बड़ा आंकड़ा है. मंत्री ने कहा कि सरकार ने आवास की कमी की समस्या का निदान करने के लिए महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की है. इस योजना का लक्ष्य सरकारी ज़मीन का इस्तेमाल करते हुए आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस), निम्न आय वर्ग (एलआईजी) तथा मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के लिए आवास उपलब्ध कराना है. पुरी ने कहा कि आवास की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विभिन्न सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल भी अपनाए जा रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा, 'घर का पंजीकरण महिला सदस्य के नाम पर अकेले या किसी पुरुष सदस्य के साथ संयुक्त तौर पर होगा. इससे लैंगिक सशक्तिकरण के हमारे वृहद लक्ष्य को पाने में मदद मिलेगी. सबसे छोटे घरों में भी शौचालय और रसोई उपलब्ध होंगी.' मंत्री ने कहा कि इस योजना को इस तरह तैयार किया गया है कि वर्ष 2022 तक हर भारतीय के पास अपना घर हो. रीयल्टी क्षेत्र के लिए उन्होंने कहा कि सरकार ने रीयल एस्टेट नियमन कानून (रेरा) बनाया है जिसका आने वाले समय में दूरगामी असर होगा.

आरआईसीएस के वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ सीन टॉम्पकिन्स ने कहा, 'भारतीय रियल एस्टेट बाज़ार के लिए नीतिगत सुधार महत्वपूर्ण है. संयुक्त राष्ट्र का आकलन है कि भारत की आबादी 2030 तक चीन को पीछे छोड़ 1.5 अरब पर पहुंच जाएगी. शहरीकरण भारत की प्रमुख चुनौती है. शहरीकरण की शर्तों को पूरा करने के लिए शहरी विकास के नवाचारी मॉडल अपनाने होंगे. सरकार अकेले इस चुनौती से नहीं निपट सकती है. भारत को इसके लिए अरबों डॉलर खर्च करने होंगे. सभी बाज़ारों में निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा हो रही है. भारत को ये निवेश आकर्षित करने के लिए अधिक पेशेवर एवं पारदर्शी बाज़ार का वादा करना होगा. आरआईसीएस इसमें मदद कर सकता है.'
First published: November 15, 2017
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