सुप्रीम कोर्ट में अपील- मौजूदा दागी सांसदों-विधायकों पर फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में पहले चलें केस

न्‍यायमित्र ने सुप्रीम कोर्ट में की मांग.
न्‍यायमित्र ने सुप्रीम कोर्ट में की मांग.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में यह भी कहा गया है कि बहुत सारे विधायक और सांसद ऐसे हैं जिनपर चल रहे केस अभी पेंडिंग हैं. लेकिन इसके बावजूद वे जनता के लिए कानून बना रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 11:36 AM IST
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नई दिल्‍ली. देश के पूर्व व मौजूदा दागी विधायकों और सांसदों के खिलाफ फास्‍ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में केस चलाए जाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में न्‍यायमित्र की ओर से कहा गया है कि इस मामले में मौजूदा सांसदों और विधायकों को प्राथमिकता दी जाई जानी चाहिए. इससे अगर वे दोषी साबित होते हैं तो वे जनता के लिए कानून बनाने के हकदार भी न रहें. न्‍यायमित्र या अमीकस क्‍यूरी ने कोर्ट में यह भी कहा है कि मौजूदा सांसदों और विधायकों के बाद पूर्व सांसद और विधायकों पर जल्‍द केस चलाए जा सकते हैं.

पीठ के सामने वरिष्‍ठ वकील विजय हंसारिया ने यह भी कहा है कि बहुत सारे विधायक और सांसद ऐसे हैं जिनपर चल रहे केस अभी पेंडिंग हैं. लेकिन इसके बावजूद वे जनता के लिए कानून बना रहे हैं. यह बात जनहित में है क्‍योंकि बहुत सारे ऐसे दागी लोग मंत्री हैं.

सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में यह भी मांग की गई है कि ऐसा नियम हो कि विधायक और सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामलों के लिए नियुक्‍त किए गए न्‍यायिक अफसर कम से कम दो साल तक उस पद पर रहें. ताकि मामले का निपटारा जल्‍दी हो सके. यह भी मांग की गई है कि राज्‍य सरकारों के भी नोडल प्रॉसिक्‍यूशन अफसर नियुक्‍त हों. ताकि कोर्ट को मदद मिल सके.

सुनवाई के दौरान इन केस के लिए सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट की संख्‍या में भी कमी बताई गई है. बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा और पूर्व सांसदों के खिलाफ लंबित मुकदमों में पुलिस की ओर से गिरफ्तारी में ढील के मामले को गंभीर करार दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान टिप्‍पणी की थी कि पुलिस अफसर जांच के दौरान उनके दबाव में आ जाते हैं.
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