मनरेगा में 100 दिनों की सीमा बढ़ाए जाने की राज्यसभा में उठी मांग

मनरेगा में 100 दिनों की सीमा बढ़ाए जाने की राज्यसभा में उठी मांग
राज्यसभा में मनोनीत शंभाजी छत्रपति और कांग्रेस के राजीव सातव ने मराठा आरक्षण का मुद्दा उठाया (सांकेतिक फोटो)

शून्यकाल (Zero Hour) में ही कांग्रेस के पी एल पुनिया (PL Punia) ने भी लॉकडाउन (Lockdown) के कारण अपने गांव लौटे श्रमिकों को मनरेगा योजना (MNREGA Scheme) के तहत काम मिलने का जिक्र किया.

  • भाषा
  • Last Updated: September 15, 2020, 5:23 PM IST
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नई दिल्ली. राज्यसभा (Rajya Sabha) में मंगलवार को कई सदस्यों ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण लोगों की आजीविका प्रभावित होने का मुद्दा उठाते हुए मनरेगा योजना (MNREGA Scheme) में कार्यदिवस की मौजूदा 100 दिनों की सीमा को बढ़ाने की मांग की. उच्च सदन (Upper House) में शून्यकाल में कांग्रेस सदस्य छाया वर्मा ने लॉकडाउन के कारण श्रमिकों के सामने आयी गंभीर समस्या का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अभी मनरेगा योजना में 100 दिनों के काम का प्रावधान है. उन्होंने मांग की कि मजदूरों (Labourers) की समस्याओं को देखते हुए इसे बढ़ाकर 200 दिन किया जाना चाहिए और इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए. कांग्रेस सदस्य (Congress Member) ने यह भी मांग की कि मजदूरों को समय से उनकी मजदूरी मिलनी चाहिए.

शून्यकाल (Zero Hour) में ही कांग्रेस के पी एल पुनिया (PL Punia) ने भी लॉकडाउन के कारण अपने गांव लौटे श्रमिकों को मनरेगा योजना (MNREGA Scheme) के तहत काम मिलने का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर उन्हें 100 दिनों का काम मिल गया है. ऐसे में उन्हें अब और काम नहीं मिल सकेगा. ‘‘फिर ये मजदूर क्या करेंगे ?’’ पुनिया ने मौजूदा महामारी (Pandemic) के मद्देनजर मनरेगा कानून में जरूरी संशोधन करने और न्यूनतम मजदूरी कम से कम 300 रूपए करने की मांग की.

"वृहद पीठ के समक्ष केंद्र को मराठा आरक्षण का समर्थन करना चाहिए"
मनोनीत शंभाजी छत्रपति और कांग्रेस के राजीव सातव ने मराठा आरक्षण का मुद्दा उठाया. सातव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के एक हालिया फैसले के कारण मराठा आरक्षण पर खतरा पैदा हो गया है. सातव ने केंद्र सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में मराठों के लिए आरक्षण का समर्थन करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि न्यायालय ने मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बड़ी पीठ को भेजा है. उन्होंने कहा कि जब तीन न्यायाधीशों की पीठ ने इस मुद्दे पर विचार किया था तब केंद्र ने अपनी बात नहीं रखी. सातव ने कहा कि लेकिन वृहद पीठ के समक्ष केंद्र को मराठा आरक्षण का समर्थन करना चाहिए.
शून्यकाल में वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी ने पोलावरम परियोजना से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए केंद्र से बकाया राशि जल्द जारी करने की मांग की ताकि यह परियोजना समय से पूरी हो सके. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर जल शक्ति मंत्री के साथ मिलकर विचार किया जाएगा. टीआरए सदस्य के आर सुरेश रेड्डी ने विभिन्न राज्यों के बीच नदियों के जल के बंटवारे का मुद्दा उठाया. द्रमुक सदस्य एम षणमुगन ने प्रधानमंत्री किसान योजना से जुड़ा मुद्दा उठाया.



"सरकार अपना वादा पूरा कर दोनों इकाइयों चालू कर कर्मचारियों को उनका बकाए वेतन दे"
कांग्रेस के रिपुन बोरा ने असम में दो पेपर मिल बंद हो जाने से बड़ी संख्या में कर्मचारियों के बेरोजगार हो जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में विगत में आश्वासन भी दिया था. बोरा ने कहा कि सरकार अपना वादा पूरा कर दोनों इकाइयों को पुन: चालू कर कर्मचारियों को उनके बकाए वेतन का भुगतान करे.

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शून्यकाल में ही भाजपा सदस्य केसी राममूर्ति ने विशेष उल्लेख के जरिए ऑनलाइन रमी खेल से जुड़ा मुद्दा उठाया वहीं शिवसेना के अनिल देसाई ने रेलवे द्वारा प्लेटफार्म टिकट की कीमत 10 रूपए से बढ़ाकर 50 रूपए किए जाने का विरोध किया. बीजद के प्रसन्न आचार्य और सस्मित पात्रा, द्रमुक के टी शिवा, तृणमूल कांग्रेस के शांतनु सेन ने भी विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्व के विभिन्न मुद्दे उठाए.
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