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IAS Deputation: क्यों बदले जा रहे नियम; मोदी-ममता का टकराव, मजबूरी या फिर जररूत?

IAS Deputation: क्यों बदले जा रहे नियम; मोदी-ममता का टकराव, मजबूरी या फिर जररूत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (फाइल फोटो)

Deputation Rules are being changed for of IAS officers : केंद्र सरकार (Central Govt) ने हाल ही में दो पत्र जारी किए हैं. इनमें आईएएस कैडर (IAS Cadre) के नियमों में बदलाव किए जाने और कुछ नए जोड़ने का प्रस्ताव है. इस पर कोई अंतिम फैसला होता, इससे पहले गैर-भाजपाई राज्य सरकारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. स्वाभाविक तौर पर इनमें पश्चिम बंगाल (West Bengal) सबसे आगे है. जहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) हमेशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और उनकी सरकार के खिलाफ मुखर रहीं हैं.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने हाल ही में आईएएस अफसरों की प्रतिनियुक्ति (Deputation of IAS officers) से जुड़े नियमों को बदलने की पहल की है. इस पर कोई अंतिम फैसला होता, इससे पहले गैर-भाजपाई राज्य सरकारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. स्वाभाविक तौर पर इनमें पश्चिम बंगाल (West Bengal) सबसे आगे है. जहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) हमेशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और उनकी सरकार के खिलाफ मुखर रहीं हैं. जाहिर तौर पर इसे लेकर एक बड़े वर्ग की जिज्ञासा हो सकती है कि आखिर ये मसला है क्या? इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? विवाद क्यों है? वस्तुस्थिति क्या है? और आगे क्या हो सकता है? इन पांचों सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं, इस 5प्वाइंट्स एक्सप्लेनर में..

केंद्र का प्रस्ताव क्या है?

केंद्र सरकार (Central Govt) ने हाल ही में दो पत्र जारी किए हैं. इनमें आईएएस कैडर (IAS Cadre) के नियमों में बदलाव किए जाने और कुछ नए जोड़ने का प्रस्ताव है. पहला पत्र 5 जनवरी को जारी हुआ. उसके मुताबिक, ‘केंद्र में विभिन्न स्तरों पर प्रतिनियुक्ति के लिए, जब भी कहा जाएगा, राज्य सरकारें उचित संख्या में आईएएस अफसर (IAS Officer) उपलब्ध कराएंगीं. इन अफसरों के बारे में अगर किसी तरह की असहमति सामने आती है, तो संबंधित राज्य सरकार की राय के मुकाबले केंद्र का विचार और निर्णय मान्य होगा. केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की गई समयावधि के भीतर ही राज्य सरकारें संबंधित आईएएस अफसर को प्रतिनियुक्ति (IAS Officer for Deputation) के लिए मुक्त करेंगीं.’ इसके बाद 12 जनवरी को दूसरा पत्र जारी किया गया. इसमें कहा गया, ‘अगर केंद्र सरकार (Central Govt) द्वारा तय समयावधि के भीतर राज्य किसी अफसर को प्रतिनियुक्ति के लिए मुक्त नहीं करती तो, समयसीमा पूरी होते ही संबंधित अधिकारी अपने आप ही मुक्त मान लिया जाएगा.’ इतना ही नहीं, इस दूसरे पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि केंद्र सरकार कभी भी, किसी भी पद के लिए राज्य से कोई भी अफसर प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है.    

आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

बीते सालों में कुछ आईएएस अफसरों की प्रतिनियुक्ति के मामले में केंद्र और राज्यों के बीच कई बार विवाद की स्थिति बनी है. इनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) और केंद्र सरकार के बीच 2021 का विवाद चर्चित है. मई 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कोलकाता में यास तूफान से हुए नुकसान की समीक्षा के लिए बैठक ली थी. इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) और राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव अलापन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay) पहले तो देर से आए. फिर बैठक में शामिल हुए बिना अपनी रिपोर्ट देकर चले गए. केंद्र सरकार ने इस आचरण को गंभीरता से लिया. बंदोपाध्याय को केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का आदेश दिया. लेकिन ममता सरकार ने उन्हें मुक्त ही नहीं किया. बल्कि बंदोपाध्याय ने सेवानिवृत्ति ले ली क्योंकि पहले से ही सेवा-विस्तार पर काम कर रहे थे. ममता सरकार (Mamata Govt) और केंद्र के बीच ठीक इसी तरह का विवाद बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तीन आईपीएस अफसरों की प्रतिनियुक्ति के मामले में भी हुआ था.

लेकिन आईएएस अफसर भी तो केंद्र में आने से हिचक रहे हैं 

केंद्र में कैबिनेट सचिव (Caninet Secretary) रहे केएम चंद्रशेखर और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रमुख सचिव (Principal Secretary) रहे टीकेए नायर का एक लेख ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में छपा है. इसके मुताबिक केंद्र में उपसचिव से ऊपर के अधिकांश आईएएस अफसर समय-समय पर प्रतिनियुक्ति के माध्यम से विभिन्न राज्यों से लिए जाते हैं. यही स्थिति अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के मामले में भी रहती है. हालांकि 2014 की मुकाबले 2021 आते-आते राज्यों से केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले आईएएस अफसरों की संख्या लगातार गिरी है. साल 2014 में जहां इस तरह के 69% अफसर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में थे, वहीं 2021 में 30% रह गए हैं. मतलब केंद्र को अफसर चाहिए, इसलिए वह नियमों में बदलाव करने के लिए मजबूर हुई.   

क्या चीजें रोक रही हैं आईएएस अफसरों को केंद्र में आने से 

चंद्रशेखर और नायर की मानें तो केंद्र सरकार को नियम सख्त करने के साथ ही आत्मावलोकन भी करना चाहिए. यह देखना चाहिए कि आखिर क्यों आईएएस अफसर केंद्र में आने से हिचक रहे हैं? केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए उनका आकर्षण क्यों कम हुआ है? दोनों लेखक इसके दो-तीन कारण बताते हैं. एक- केंद्र ने आईएएस अफसरों (IAS Officers) के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की शर्तें सख्त की हैं. दूसरा- उच्च स्तर पर प्रतिनियुक्ति के लिए बनाई जाने वाली इम्पैनलमेंट प्रणाली में भी बदलाव किया है. तीसरा- आईएएस अफसरों (IAS Officers) के लिए केंद्र में प्रतिनियुक्ति की समयावधि यानि कार्यकाल में अनिश्चितता की स्थिति है.

आगे क्या संभावनाएं बनती हैं 

इस मामले में प्रमुख रूप से तीन संभावनाएं हैं. पहली- चूंकि अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों के मामले में अंतिम फैसला तो केंद्र सरकार का ही होता है. वही कैडर आवंटन कर विभिन्न राज्यों में इन अफसरों को भेजती है. लिहाजा, नियम बनाने और बदलने का अधिकार भी उसके पास सुरक्षित है. हालांकि राज्य सरकारों के नियम भी आईएएस अफसरों पर लागू होते हैं. तो दूसरी संभावना ये है कि वे अपनी स्वायत्तता छिनने की दलील देते हुए केंद्र की ओर से प्रस्तावित बदलावों का विरोध करेंगी. इस बीच, तीसरी संभावना बातचीत से मसले का हल निकालने की बनती है. इसके लिए केंद्र सरकार ने अपनी ओर से राज्यों के साथ बातचीत की पहल शुरू भी कर दी है.

Tags: Central govt, CM Mamata Banerjee, Hindi news, IAS Officer, Prime Minister Narendra Modi, West bengal

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