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भगत सिंह को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए उनके वंशज जाएंगे कोर्ट

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 27, 2017, 12:22 PM IST
भगत सिंह को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए उनके वंशज जाएंगे कोर्ट
सरकारी रिकॉर्ड में अब तक शहीद नहीं हैं भगत सिंह

जनता भले ही भगत सिंह को शहीद-ए-आजम का दर्जा देती है, लेकिन सरकार उन्‍हें दस्‍तावेजों में शहीद नहीं मानती.

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  • Last Updated: September 27, 2017, 12:22 PM IST
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जनता भले ही महान क्रांतिकारी भगत सिंह को शहीद-ए-आजम का दर्जा देती है, लेकिन सरकार उन्‍हें दस्‍तावेजों में शहीद नहीं मानती. आजादी के सात दशक में जितनी भी सरकारें आईं, वह भगत सिंह को शहीद घोषित करने से बचती रहीं. इसलिए अब यह मामला अदालत में जाने वाला है.

भगत सिंह के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू ने न्‍यूज18 डॉटकॉम से कहा कि ‘वह सरकारों के रवैये से हैरान हैं’. उन्‍होंने सवाल किया कि ‘सरकारें भगत सिंह को शहीद घोषित करने से आखिर डरती क्‍यों हैं? इसके लिए कई  नेताओं से सिफारिश की गई लेकिन देश के हीरो के लिए कोई आगे नहीं आया.’

‘इसलिए अब शहीद भगत सिंह ब्रिगेड की ओर से इसके लिए कोर्ट में याचिका दायर करेंगे. संबंधित दस्‍तावेज जुटा लिए गए हैं. वकीलों से बातचीत हो रही है. अब उम्‍मीद सिर्फ कोर्ट पर है’.

संधू कहते हैं कि ‘भगत सिंह को शहीद घोषित कर दिया जाता तो कोई भी किताबों में उन्‍हें क्रांतिकारी आतंकी लिखने की हिम्‍मत नहीं करता’. पाकिस्‍तान में भी भगत सिंह को न्‍याय दिलाने के लिए वहां के लोगों ने कोर्ट में ही केस डाला हुआ है.



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अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 को लाहौर में भगत सिंह को फांसी दे दी थी. उस वक्‍त उनकी उम्र महज 23 साल थी. वह देश की आजादी के लिए ब्रिटिश सरकार से लड़ रहे थे. लेकिन देश की आजादी के सात दशक बाद भी सरकार उन्‍हें दस्‍तावेजों में शहीद नहीं मान रही. इसका खुलासा अप्रैल 2013 में गृह मंत्रालय और अक्‍टूबर 2016 में पीएमओ में डाली गई आरटीआई के जवाब में हुआ है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लेकर एक आरटीआई डालकर पूछा गया था कि भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को शहीद का दर्जा कब दिया गया. यदि नहीं तो उस पर क्या काम चल रहा है? इस पर मंत्रालय ने कहा था कि इस संबंध में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है. तब से शहीद-ए-आजम के वंशज (प्रपौत्र) यादवेंद्र सिंह संधू सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं.

सितंबर 2016 में इसी मांग को लेकर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के वंशज जलियावाला बाग से इंडिया गेट तक शहीद सम्‍मान जागृति यात्रा निकाल चुके हैं. संबंधित दस्‍तावेजों के साथ तीन बार गृह राज्‍य मंत्री हंसराज अहीर से मिल चुके हैं. लेकिन नतीजा नहीं निकला.

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यादवेंद्र सिंह संधू के मुताबिक वह इस मामले को लेकर भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, बीजेपी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष विनय विनय सहस्त्रबुद्धे से मिल चुके हैं. सहस्त्रबुद्धे गृह मंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं. लेकिन अब तक भगत सिंह सरकारी दस्‍तावेजों में शहीद नहीं घोषित किए गए.

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First published: September 27, 2017, 12:04 PM IST
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