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OPINION: इंदिरा गांधी की विदेश यात्रा पर रोक, पर टैक्स चोर धर्म तेजा को 1977 में मिल गई थी छूट

OPINION: इंदिरा गांधी की विदेश यात्रा पर रोक, पर टैक्स चोर धर्म तेजा को 1977 में मिल गई थी छूट

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

सरकारी पैसों के घोटाले के आरोप में भारतीय अदालत ने धर्म तेजा को 19 अक्टूबर 1972 को 3 साल की सजा सुनाई थी. उसपर 14 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. जुर्माना नहीं भरने पर उसे 3 साल की और सजा काटनी थी.

    सुरेंद्र किशोर
    जनता पार्टी की सरकार के शासनकाल में कुछ मुकदमों को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर तो विदेश यात्रा पर रोक थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री आॅफिस ने टैक्स चोर धर्म तेजा को इसकी अनुमति दे दी थी. यह अनुमति नियम को ताक पर रखकर दी गई थी.

    चर्चित जयंती शिपिंग कंपनी के मालिक धर्म तेजा ग्रीक व्यापारी ओनासिस बनना चाहता था, लेकिन वे लगातार विवादों में ही रहा. आंध्र प्रदेश के एक स्वतंत्रता सेनानी के बेटे सुशिक्षित धर्म तेजा ने सरकारी धन से व्यापार का जुआ खेलकर ओनासिस बनना चाहा था.

    धर्म तेजा की दूसरी पत्नी दिल्ली के राजनीतिक-सामाजिक सर्किल में चर्चित थी

    याद रहे कि जहाजों के धनाढ्य व्यापारी ओनासिस अमेरिका के राष्ट्रपति कैनेडी के निधन के बाद उनकी विधवा जैकलिन से शादी करके चर्चा में आया था. धर्म तेजा की भी दूसरी पत्नी 60 के दशक में दिल्ली के राजनीतिक-सामाजिक सर्किल में चर्चित थी. उसने तो एक पार्टी में एक शीर्ष सत्ताधारी नेता को खुलेआम किस किया था.

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    सरकारी पैसों के घोटाले के आरोप में भारतीय अदालत ने धर्म तेजा को 19 अक्टूबर 1972 को 3 साल की सजा सुनाई थी. उस पर 14 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. जुर्माना नहीं भरने पर उसे 3 साल की और सजा काटनी थी. लेकिन, उसने न तो 14 लाख रुपये अदा किए और ना ही 3 साल की अतिरिक्त सजा काटी. वे 'येन केन प्रकारेण' 1975 में जेल से बाहर आ गया.

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    सत्ता के गलियारे में उसकी ताकत का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता था कि नियम को नजरअंदाज करके उसे पासपोर्ट भी दे दिया गया. जबकि नियम है कि 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर सजायाफ्ता को अगले 5 साल तक पासपोर्ट नहीं मिलेगा. लेकिन 1975 में सजा पूरी करने के बाद 1977 में ही वे विदेश चला गया. उसके मामले पर मोरारजी सरकार में मतभेद था.



    मोरारजी देसाई
    तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने कहा था कि उसने सरकार से जितना लिया है, उससे अधिक दिया है. इसलिए वे कहीं भी आने-जाने को स्वतंत्र है. राज्यसभा में कांग्रेस के एनकेपी साल्वे ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव वी.शंकर से धर्म तेजा की साठगांठ है. धर्म तेजा की कहानी जानकर ऐसा लगता है कि आज के 'विजय माल्या जैसे लोगों' का वही 'आदि पुरुष' था.

    सरकार ने बताया- धर्म तेजा पर इनकम टैक्स का करोड़ों रुपये बकाया है
    वर्ष 1981 में लोकसभा में सरकार ने बताया था कि धर्म तेजा पर आयकर का 7 करोड़ 17 लाख रुपये और संपत्ति कर का 1 करोड़ 76 लाख रुपये बकाया है. उससे पहले जब चरण सिंह प्रधानमंत्री बने तो उनकी सरकार ने उस अमेरिकी विमान सेवा पर केस किया था जिससे उड़कर धर्म तेजा 1977 में देश से बाहर चला गया था. इसपर अमेरिकी विमान सेवा ने कहा कि ऐसा उसने एयर इंडिया के कहने पर किया था.

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    वर्ष 1961 में केंद्र सरकार से 20 करोड़ 22 लाख रुपये कर्ज लेकर धर्म तेजा ने अपनी जयंती शिपिंग कंपनी के लिए जापान से पानी का जहाज खरीदना शुरू किया. उसने सेवानिवृत (रिटायर्ड) लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल को जापान में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया. जहाज की कीमत की पहली किश्त देकर वे जहाज खरीद लेता था और उसी जहाज को गिरवी रखकर फिर दूसरा जहाज खरीदता था. इस तरह उसने कई जहाज खरीदे.

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    जहाज की खरीद में जो दलाली मिलती थी, उसे जयंती शिपिंग कंपनी के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) के सदस्य आपस में बांट लेते थे जबकि तब की सरकार चाहती थी कि वे पैसा सरकार के खाते में जमा हो जाए. इस तरह उसने 22 पानी जहाज खरीदे. उधर धर्म तेजा अपनी ही कंपनी को खोखला करते हुए कई देशों में अपनी संपत्ति खरीदने लगा.

    संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया ने लोकसभा में धर्म तेजा का मामला जोरदार ढंग से उठाया. इधर भारत सरकार ने कहा कि उसपर 4 करोड़ रुपये से अधिक का आयकर टैक्स बाकी है. तेजा पर 1966 में वारंट निकला. वे अमेरिका में गिरफ्तार हुआ, बेल पर छूटा लेकिन बेल की शर्तें तोड़कर वे कोस्टारिका चला गया.



    भारत सरकार धर्म तेजा को कोस्टारिका से स्वदेश लाने में सफल हो गई
    कोस्टारिका ने उसे अपने नागरिक के रूप में स्वीकार किया. नागरिकता के लिए कोस्टारिका को कुछ पैसे देने होते हैं. धर्म तेजा के पास कोस्टारिका की ओर से जारी डिप्लोमेटिक पासपोर्ट था. भारतीय कानून तोड़ने के आरोप में 1972 में लंदन में धर्म तेजा गिरफ्तार हुआ. वहां कोस्टारिका की सरकार ने अदालत में भारत सरकार के खिलाफ दलील दी. लेकिन भारत सरकार उसे स्वदेश लाने में सफल हो गई.

    जयंती शिपिंग कंपनी का इंदिरा गांधी सरकार ने सरकारीकरण कर लिया. उधर अदालत ने तेजा को सजा दी. लगता है कि इस देश के कुछ भगोड़े कर्जदार और कानून तोड़ने वालों ने भी समय-समय पर कुछ सत्ताधारी नेताओं की मदद से शायद धर्म तेजा से ही यह सब करने के लिए सीखा है.

    Tags: Business class, Central government, Congress, Court, Indira Gandhi, Ship products

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