OPINION: राजीव गांधी के प्यार और देश के लिए सोनिया ने दोबारा चुना कांग्रेस का नेतृत्व

कुछ लोगों को पता होगा कि साल 2016 तक सोनिया गांधी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर और सार्वजनिक जीवन में एक मिसाल कायम करने के लिए तैयार थीं.

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Updated: August 11, 2019, 3:47 PM IST
OPINION: राजीव गांधी के प्यार और देश के लिए सोनिया ने दोबारा चुना कांग्रेस का नेतृत्व
कुछ लोगों को पता होगा कि साल 2016 तक सोनिया गांधी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर और सार्वजनिक जीवन में एक मिसाल कायम करने के लिए तैयार थीं. REUTERS/Anushree Fadnavis
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Updated: August 11, 2019, 3:47 PM IST
राशिद किदवई

सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन को उनकी स्वतंत्र इच्छा की तुलना में परिस्थितियों ने ज्यादा तैयार किया है. यह बताता है कि क्यों उन्होंने एक बार फिर सार्वजनिक राय, उनके स्वास्थ्य और सेमी रिटायरमेंट की प्राथमिकता के खिलाफ पार्टी का नेतृत्व करने का फैसला किया है.

साल 1980 में संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव गांधी के राजनीति में शामिल होने के विचार का विरोध किया गया और 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव ने प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला लेकिन दोनों ही अवसरों पर, परिस्थितियों ने उन्हें भाग्य स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया.

राजीव गांधी हत्याकांड के बाद, उन्होंने राजनीति को न कहने के लिए दृढ़ता दिखाई थी जब प्रणब मुखर्जी के नेतृत्व में पूरी कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 22 मई, 1991 को उन्हें राजीव का उत्तराधिकारी बनाने का अनुरोध किया था.

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तब क्या थे हालात!

साल 1997 तक, असलम शेर खान, मणिशंकर अय्यर, पीआर कुमारमंगलम, सुरेश कलमाड़ी, बूटा सिंह जैसे कई कांग्रेस नेताओं ने पार्टी को छोड़ दिया. निराशा में, दिग्विजय सिंह, अहमद पटेल, अशोक गहलोत, वायलार रवि और कमलनाथ जैसे कई नेताओं ने तत्कालीन 'गैर-राजनीतिक' सोनिया गांधी को दलील दी कि 'आप कैसे कांग्रेस को अपने आंखों के सामने खत्म होता देख सकती हैं?'
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राजीव गांधी हत्याकांड की जांच में प्रगति, कांग्रेस की खराब होती स्थिति और नेहरू-गांधी की विरासत पर हमला, सक्रिय राजनीति में शामिल होने के सोनिया के फैसले पर भारी पड़ा.

सोनिया ने कांग्रेस को राजीव और देश  के लिए अपने प्यार के विस्तार के रूप में देखा जहां उन्होंने बाकी जिन्दगी बिताने के लिए चुना था. एक साक्षात्कार में, उन्होंने पत्रकार शेखर गुप्ता से कहा था कि 10 जनपथ के लिविंग रूम में राजीव गांधी के चित्र से वह जब भी गुजरतीं, उन्हें लगता कि  वह कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त काम नहीं कर पा रहीं थीं, तो उन्होंने अपराध बोध होता था.

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मिसाल कायम करना चाहती थीं सोनिया

कुछ लोगों को पता होगा कि साल 2016 तक, वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर और सार्वजनिक जीवन में एक मिसाल कायम करने के लिए तैयार थीं. हालांकि उन्हें पता होना चाहिए था कि राजनीति में न होना गांधियों के लिए कभी वास्तविक्ता नहीं रहीं.

साल 1950 के दशक में, इंदिरा गांधी ने कथित रूप से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आवास को छोड़ दिया था और पति फिरोज गांधी की मृत्यु के बाद विदेश में बस गई थीं लेकिन घरेलू राजनीतिक मजबूरियों ने उन्हें 1959 में सक्रिय राजनीति में ला दिया. (तब उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सेवा की).

राजीव गांधी ने राजनीति को त्याग दिया लेकिन भाई संजय गांधी की एक विमान दुर्घटना में मौत ने उन्हें इसमें वापसी के लिए मजबूर कर दिया. साल 1984 में, सोनिया ने कथित तौर पर राजीव का प्रधानमंत्री बनने का विरोध करने के लिए लड़ाई लड़ी.

अगर राजीव होते तो वह 10 दिन बाद वह 75 साल के होते. उससे पहले 10 अगस्त, 2019 से सोनिया ने पार्टी की कमान फिर से हाथ में लेने का फैसला किया जब कांग्रेस की हालत साल 1997 वाली हो गई गै. वह कांग्रेस को पुनर्जीवित नहीं कर सकती या अच्छे पुराने दिनों को वापस नहीं ला सकती, लेकिन सोनिया के करीबी सूत्रों का कहना है कि वह एक कोशिश करना चाहती हैं. वह बतौर पलायनवादी काम नहीं करना चाहतीं.

(यह लेखक की निजी राय है.)
First published: August 11, 2019, 3:47 PM IST
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