जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के विकास के लिए मोदी सरकार ने बनाया प्‍लान, इन बातों पर रहेगा खास फोकस

अमित पांडेय | News18.com
Updated: September 5, 2019, 4:36 PM IST
जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के विकास के लिए मोदी सरकार ने बनाया प्‍लान, इन बातों पर रहेगा खास फोकस
केंद्र सरकार ने बनाया जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के विकास का प्‍लान.(फोटो-पीटीआई)

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तीनों इलाकों में 7 से 8 टूरिस्ट जोन बनाए जाएंगे. इसके लिए सरकार ने इन तीनों जगहों पर ऑपरेट कर रहे सभी टूरिस्ट ऑपरेटर से संपर्क साधा है और उनकी सूची जुटाई जा रही है.

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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा संसद में धारा 370 (Article 370) हटाने की घोषणा के एक महीने बाद जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और लद्दाख (Ladakh) के हालात का प्रशासन और अलग-अलग एजेंसियों ने आकलन किया है. जबकि अगले एक महीने में राज्य में कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. सरकार की जम्मू-कश्मीर में मूलभूत सुविधाओं का विकास (Development) और रोजगार (Employment) पहली प्राथमिकता है.

क्या है सरकार का डेवलपमेंट एजेंडा?
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सरकार ने सरकार ने टूरिज्म, खेती और सोलर एनर्जी को चिन्हित किया है और अगले 1 महीने में इन्हीं पैमानों पर विकास करने का लक्ष्य रखा है.

टूरिज्म का विकास कैसे होगा?

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तीनों इलाकों में 7 से 8 टूरिस्ट जोन बनाए जाएंगे. इसके लिए सरकार ने इन तीनों जगहों पर ऑपरेट कर रहे सभी टूरिस्ट ऑपरेटर से संपर्क साधा है और उनकी सूची जुटाई जा रही है. कश्मीर में पहलगाम के अलावा गांदेरबल, कुपवाड़ा और अनंतनाग टूरिज्म जोन में शामिल होंगे. जबकि लद्दाख में जो आठ टूरिस्ट जोन हैं उसमें से कुछ जोन कारगिल और लेह के भी पास के होंगे. इसी तरीके से जम्मू में अखनूर राजौरी के इलाकों को टूरिस्ट जोन में शामिल करने पर जोर दिया जाएगा. कश्मीर की पहचान बन चुके हाउसबोट जो अभी मृतप्राय अवस्था में हैं वह नए अंदाज में टूरिस्ट के लिए पेश होंगे. हाउसबोट के मटेरियल को लकड़ी से बदलकर पॉलिस्टर पर कैसे किया जाए इस पर भी पर्यटन मंत्रालय ने एक डिटेल प्रपोजल केंद्र सरकार को सौंप दिया है.

डल झील को साफ करने और उसे सुंदर बनाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने एक खाका तैयार कर केंद्र सरकार को दिया है. इस दौरान उसने जगह-जगह फव्वारे लगाने की सलाह दी है.

डल झील को साफ करने और उसे सुंदर बनाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने एक खाका तैयार कर केंद्र सरकार को दिया है.

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क्या है खेती पर सरकार की योजना?
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में किसान अपनी फसल वाजिब जगह पर बेच पाए और उन्हें उचित कीमत मिले इसके लिए पूरी योजना तैयार की गई है. इसके लिए श्रीनगर, पुलवामा, शोफिया, जम्मू और लेह की मंडियों को पूरी तरीके से डिजिटलाइज किया जाएगा. इन मंडियों में किसानों की सूची बनाई जाएगी जो फसल उगाते हैं और अपना सामान लाते हैं. खुद इन मंडियों से किसानों तक संपर्क करने का प्लान कृषि मंत्रालय ने केंद्र सरकार को दे दिया है.

कश्मीर में खेती पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, खासकर एप्पल ऑर्चर्ड यानी सेब के बागानों को. एक ओर तो शोफियां और त्राल से सेब बागानों के मालिकों ने गृह मंत्रालय में गृह मंत्री से मिलकर उन्हें अपनी समस्या से अवगत कराया है, तो दूसरी ओर नेफेड हरकत में आया है. इस योजना पर काम शुरू हो चुका है कि सीधे नेफेड सेब को बगीचों से इकट्ठा कर उनकी सोर्सिंग कर उन्हें देश के अन्य हिस्सों में वाजिब कीमत पर बेचेगा.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख.


केसर को लेकर ये है प्‍लान
खेती में दूसरी सबसे जरूरी फसल है केसर.यह ज्यादातर दक्षिण कश्मीर में ही उगाई जाती है. सितंबर के अंत से भारत सरकार का केसर संस्थान जो कि पुलवामा में है वह काम करना शुरू कर देगा. अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस संस्थान में ऐसी व्यवस्था होगी कि सीधे ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिए भारत में कोई भी शख्स कश्मीर का केसर खरीद सकता है. इसके अलावा ट्यूलिप व अन्य फूल जिनकी बाजार की मांग बहुत ज्यादा है उन्हें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तीनों जगह उगाने की योजना पर काम किया जा रहा है. आयुष मंत्रालय ने लद्दाख रीजन के उन इलाकों की पहचान करनी शुरू कर दी है जहां पारंपरिक औषधियां उगाई जाती हैं और कैसे उसकी मार्केटिंग की जाए इसका पूरा प्रपोजल सौंपा जा चुका है.

सोलर एनर्जी पर ये है सरकार की योजना
इसकी कमान दी गई है लद्दाख को. अगले कुछ सालों में अकेले लद्दाख में ही बीस हजार मेगावाट की सोलर परियोजना को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत सबसे पहले दो हजार मेगावाट की क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट को जल्द शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इस बाबत पूरा खाका तैयार कर रहा है.

रोजगार रहेगा सरकार की प्राथमिकता
सरकार का मानना है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले,ताकि वो मुख्यधारा में शामिल हों. इसीलिए 50000 नौकरियों की बात राज्यपाल ने कही है. उनहोंने न्‍यूज़ 18 को बताया कि कैसे सरकार का एंप्लायमेंट प्लान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में काम करेगा. सबसे पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में रिक्त पड़े 50,000 सरकारी पदों को भरा जाएगा. इसमें से तीन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है जिनमें पहले फेज में स्थानीय लोगों को नौकरियां दी जाएंगी. ये क्षेत्र हैं स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस.

>>स्वास्थ्य: ये सरकार के सबसे महत्वपूर्ण फोकस एरिया में हैं. इसमें डॉक्‍टर्स, नर्सों और लैब टेस्ट टोकनीशियन भर्ती की जाएगी. जबकि यही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में तैनात होते हैं, जोकि फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत है.

>>शिक्षा: ये सरकार का दूसरा प्रमुख फोकस एरिया है. सरकारी स्कूलों में वहीं रह रहे लोगों की नियुक्ति की जाएगी. टीचरों की ये नियुक्तियां प्राइमरी और सेकेंडरी लेवल पर होंगी.

>>पुलिस: यह सरकार का तीसरा फोकस एरिया है. सबसे पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस के 4000 स्पेशल प्रोटेक्शन ऑफिसर के पद पर जो रिक्तियां हैं उनको भरा जाएगा. इसके अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की स्थानीय बटालियन बनाने की सरकार की योजना है.

बहरहाल, भारत सरकार के अधीन जितने भी मंत्रालय आते हैं उन्होंने जम्मू- कश्मीर और लद्दाख से जुड़ी स्पेसिफिक परियोजनाओं का खाका गृह मंत्रालय को सौंप दिया है. जबकि मंत्रालय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पोटेंशियल एरिया की पहचान कर उसका विकास करेगा.

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First published: September 5, 2019, 4:32 PM IST
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