पुजारी-पुलिस के विवाद के बीच फंसे श्रद्धालु, बिना जगन्नाथ दर्शन के लौटने को मजबूर

जगन्नाथ मंदिर
जगन्नाथ मंदिर

ये विवाद ऐसे वक्त पर हुआ है, जब कुछ दिन बाद मंदिर प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुझाए गए सुधार के उपायों को 1 जनवरी से लागू करना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2018, 9:13 PM IST
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ओडिशा के पुरी में बने विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के पुजारियों और पुलिस से विवाद का खामियाजा श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है. शुक्रवार को देशभर से आए सैकड़ों श्रद्दालुओं को घंटों इंतज़ार के बाद बिना दर्शन किए वापस लौटना पड़ा. क्योंकि, पुजारियों ने मंदिर का दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया था.

ये विवाद ऐसे वक्त पर हुआ है, जब कुछ दिन बाद मंदिर प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुझाए गए सुधार के उपायों को 1 जनवरी से लागू करना है. हालांकि, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और पुरी कलेक्टर ज्योती प्रकाश ने पुजारियों से बातचीत कर मामला सुलझाने की कोशिश की. लेकिन ये कोशिश नाकाम रही और पुजारी अपनी ज़िद पर अड़े रहे.

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पुलिस अधिकारियों ने यह आरोप लगाया कि मंदिर के पुजारी भवानी शंकर मोहपात्रा गुरुवार की शाम तीन श्रद्दालुओं को अंदर ले जाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन, मेन गेट पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया, क्योंकि ऐसा संदेह हुआ कि वे हिंदू नहीं थे. बता दें कि इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं की एंट्री की ही इज़ाजत है.

वहीं, पुजारी मोहपात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि वे बंगाली थे और इसी मुद्दे पर विवाद पैदा हुआ. मोहपात्रा ने बताया कि मंदिर में पुलिस ने बेवजह बहस की और उनके साथ बदसलूकी की. इस घटना के बाद पुलिस और पुजारी दोनों ने अलग-अलग सिंहवाड़ा पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई.

बता दें कि साल 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पुजारी ने इस मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं दी थी, क्योंकि उन्होंने पारसी के साथ शादी की थी. इसके अलावा साल 2006 में स्विटजरलैंड के एलिजाबेथ जिगलर, जिन्होंने मंदिर के डोनेशन बॉक्स में 1.78 करोड़ रुपये दान में दिए थे, उन्हें ईसाई होने की वजह से प्रवेश नहीं दी गई थी. (एजेंसी इनपुट)
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