बुखार नहीं है कोविड-19 का जरूरी लक्षण, AIIMS की स्टडी भी यही कहती है

बुखार नहीं है कोविड-19 का जरूरी लक्षण, AIIMS की स्टडी भी यही कहती है
हैदराबाद में 23 जुलाई, 2020 को गवर्नमेंट फीवर हॉस्पिटल में कोविड-19 टेस्ट के लिए स्वैब के नमूने देती पुलिसकर्मी (फोटो- AP)

शोध पत्र (Research Paper) को 28 अन्य लोगों के साथ दिल्ली एम्स (AIIMS) के निदेशक (Director) डॉ. रणदीप गुलेरिया ने मिलकर लिखा है.

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स्नेहा मोरदानी

नई दिल्ली.  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की ओर से किए गए एक अध्ययन से अब पता चला है कि बुखार (Fever) कोरोना वायरस के कारण होने वाली बीमारी का प्रमुख लक्षण कभी नहीं था. इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR)  में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि मार्च-अप्रैल यानी महामारी (Pandemic) के शुरुआती दिनों में केवल 17% रोगियों को बुखार था.

दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) में 23 मार्च से 15 अप्रैल तक अस्पताल (Hospital) में भर्ती 144 मरीजों का अध्ययन किया गया. "उत्तर भारत में तृतीयक देखभाल केंद्र में भर्ती किए गए कोविड-19 रोगियों के-क्लिनिको-जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल और अस्पताल परिणाम" शीर्षक के शोध पत्र (Research Paper) को 28 अन्य लोगों के साथ निदेशक (Director) डॉ. रणदीप गुलेरिया ने मिलकर लिखा है.



करीब 56% कोविड-19 रोगियों में पुष्टि के समय बुखार नहीं था
News18 को इस शोध पत्र से पता चला, "बुखार के केवल 17% रोगियों में बुखार मौजूद था, जो कि दुनिया भर में अन्य रिपोर्टों की तुलना में बहुत कम था, जिसमें चीनी कोहॉर्ट शामिल था, जिसमें सामने आने के समय 44% को बुखार था और अस्पताल में रहने के दौरान 88% को बुखार विकसित हुआ था."

यह बताता है कि रोगी के तौर पर सामने आने के समय 56% रोगियों में लक्षण नहीं थे. बड़ी संख्या में ऐसे रोगी जिनमें लक्षण नहीं थे, उन्हें अच्छी खबर और बुरी खबर दोनों के तौर पर देखा गया. जहां एक ओर यह दर्शाता है कि कई रोगी संक्रमण के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं, यह इसे भी दर्शाता है कि मार्च-अप्रैल की शुरुआत में कई सारे साइलेंट स्प्रेडर भी थे.

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शुरुआती दौर में थर्मल स्क्रीनिंग को ही मुख्य जांच के तौर पर अपनाया गया था
दोनों सार्वजनिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, जिनमें हवाई अड्डे, अस्पताल और शॉपिंग सेंटर शामिल हैं, महामारी के शुरुआती दिनों में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए थर्मल बॉडी स्कैन और हाथ वाले थर्मामीटर पर बहुत अधिक निर्भर थे. ऐसे में इस सवाल के सामने आने बाद इस कदम की प्रभावकारिता सवालों के घेरे में आ गई है, क्योंकि एक प्रभावी लक्षण नहीं था.
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