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क्या महाराष्ट्र व तेलंगाना के फॉर्मूले पर राहुल-प्रियंका ने करवाई सिद्धू की ताजपोशी?

पटोले राजनीतिक करियर तो कांग्रेस के साथ ही शुरू हुआ लेकिन 2009 से 2018 में वह भाजपा की नाव में सवार रहे और करीब तीन साल के भीतर उन्हें अध्यक्ष पद से नवाजा गया.

पटोले राजनीतिक करियर तो कांग्रेस के साथ ही शुरू हुआ लेकिन 2009 से 2018 में वह भाजपा की नाव में सवार रहे और करीब तीन साल के भीतर उन्हें अध्यक्ष पद से नवाजा गया.

कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह स्पष्ट दिखता है कि इस प्रकार की पदोन्नतियों के पीछे गांधी परिवार के भाई-बहन की जोड़ी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा (Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi Vadra) हैं और उनके लिए निर्णयों पर कोई भी सवाल नहीं कर सकता है.

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    चंडीगढ़. दूसरे राजनीतिक दल से कांग्रेस में आए नवजोत सिद्धू (Navjot Sidhu) अध्यक्ष पद काबिज होने से रोकने में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर (Chief Minister Captain Amarinder) सहित कई नेताओं ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए. जानकारों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान (Congress High Command) ने फरवरी से लेकर अब तक तीन ऐसे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्षों की नियुक्ति की है जो दूसरे राजनीतिक दलों से कांग्रेस में आए थे. दि प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर दूसरे राजनीतिक दलों से आए नेताओं को शीर्ष पदों पर बिठाए जाने से पार्टी के कई नेता हैरत में हैं.

    कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह स्पष्ट दिखता है कि इस प्रकार की पदोन्नतियों के पीछे गांधी परिवार के भाई-बहन की जोड़ी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा (Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi Vadra) हैं और उनके लिए निर्णयों पर कोई भी सवाल नहीं कर सकता है.

    महाराष्ट्र और तेलंगाना में भाजपा छोड़ आए नेताओं को बनाया अध्यक्ष
    इनमें सबसे पहले फरवरी माह में हाईकमान ने महाराष्ट्र में नान पटोले को महाराष्ट्र का कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनाया. पटोले राजनीतिक करियर तो कांग्रेस के साथ ही शुरू हुआ लेकिन 2009 से 2018 में वह भाजपा की नाव में सवार रहे और करीब तीन साल के भीतर उन्हें अध्यक्ष पद से नवाजा गया. इसके बाद बीते माह तेलंगाना में एक और प्रदेशाध्यक्ष के रूप में रेवंत रेड्‌डी को प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया. रेड्डी को कांग्रेस में आए 4 साल ही हुए हैं. उनके जीवनी आरएसएस के साथ जुड़ी है. छात्र राजनीतिक में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में रहे.

    दो अन्य दलों तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS)और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) में काम करने के बाद 2017 में उनकी एंट्री कांग्रेस में हुई है. इसी तरह नवजोत सिंह सिद्धू की कोंग्रेस में एंट्री 2017 में ही हुई है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान में महासचिव के पद पर राहुल और प्रियंका की जोड़ी की रणनीति के तहत ही यह नियुक्तियां हुई हैं.

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    1984 में कैप्टन ने भी छोड़ दी थी कांग्रेस
    कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि इस रणनीति के तहत पहली बार काम नहीं किया गया है. कैप्टन अमरिंदर का ही उदाहरण देते हुए उनके ही सहयोगी कहते हैं कि ऐसे तो अमरिंदर सिंह ने भी 1984 में कांग्रेस छोड़ दी थी और 1998 में कांग्रेस में वापस लौटने से पहले वे शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में शामिल हो गए थे. उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह भी एक दशक से अधिक समय तक शिअद के साथ थे, लेकिन कांग्रेस ने उनका फिर से स्वागत किया. इसलिए राजनीति में ये चीजें आम बात हैं. जबकि हकीकत यह है कि जो कांग्रेस से कभी बाहर गए ही नहीं थे उन्हें दरकिनार कर सांसद प्रताप सिंह बाजवा को 2017 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब कांग्रेस प्रमुख के पद से हटा दिया गया था.

    अमरिंदर सिंह को यह जिम्मेदारी दी गयी थी जो बाद में पार्टी के सीएम पद के चेहरे बन गए और चुनाव जीतने के बाद सीएम भी बने. अमरिंदर सिंह के खेमे की भी यही परेशानी थी कि कहीं सिद्धू को अध्यक्ष बना दिया तो कैप्टन सवत: ही सीएम कैंडीडेट नहीं रहेंगे. यही वजह है कि सिद्धम का कैप्टन खुद भी विराध कर रहे थे.

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