क्या कश्मीर के अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी से उठ गया था ISI का भरोसा?

सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था.
सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था.

पाकिस्तान समर्थित हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (Hurriyat Confrence) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी (Syed Ali Shah Gillani) ने संगठन में जवाबदेही के अभाव और विद्रोह का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया.

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प्रवीण स्वामी
श्रीनगर. 
जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में साल 1984 के बाद लंबे समय तक लोगों में अलगाववाद का जहर भरने वाले सैयद अली शाह गिलानी (Syed Ali Shah Geelani) ने सोमवार को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा दे दिया. कश्मीर में बीते 3 दशकों में चली खूनी जंग में अहम भूमिका अदा करने वाले गिलानी ने राज्य की दो पीढ़ियों में अलगाववाद की आग लगाई. गिलानी ने लोगों के मन में यह भरा था कि इन्सान की जिन्दगी के बलिदान से ही आजादी हासिल की जा सकती है.

गिलानी ने सोमवार को अपनी राजनीतिक जीवन के अंत की कहानी खुद लिखी. News18 ने इसकी पुष्टि गिलानी के पोते जहूर गिलानी और उनके राजनीतिक सहयोगी पीर अब्दुल राशिद के जरिए की. गिलानी ने आरोप लगाया कि हुर्रियत के लोग इस मूवमेंट में उनका साथ नहीं दे रहे थे और अपने पदों से इस्तीफा दे रहे थे.

अपने साथियों पर गिलानी का यह हमला इस बात का संकेत है कि वह जिस उद्देश्य पर काम कर रहे थे, वह जल्द ही ढहने वाला था. इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान में मौजूद हुर्रियत के नेताओं ने गिलानी के चुने हुए शख्स अब्दुल्लाह गिलानी को खारिज कर दिया और एक नया शूरा यानी कन्सेल्टिव काउंसिल गठित किया. राज्य स्थित बारामूला में गिलानी और उनके बेटे नयीम गिलानी के करीबी मौलवी के बेटे मौलाना अब्दुल वली को हटाकर मोहम्मद हुसैन खतीब को उनकी जगह बिठा दिया. यहां तक कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर वित्तीय गड़बड़ी और अयोग्यता का आरोप लगाया.
गिलानी ने खो दिया ISI का भरोसा?



पाकिस्तानी हुर्रियत के मौजूदा कदम को इस संकेत के तौर पर जा देखा रहा है कि पड़ोसी मुल्क की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस ने गिलानी की हुर्रियत और हिज्ब-उल- मुजाहिद्दीन पर भरोसा खो दिया था. गिलानी की नई पीढ़ी के इस्लामिस्ट्स प्राटिश़ेस मसर्रत आलम बट और आसिया अंद्राबी को भी यह पता चल चुका था कि 91 वर्षीय गिलानी भारत के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन नहीं करना चाहते थे और इसके बजाय एक रास्ता खोज रहे थे ताकि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे.

अपने इस्तीफे में गिलानी ने लिखा है कि - 'पिछले साल, भारत ने राज्य को दो भागों में बांट दिया, और हमारे पूरे राष्ट्र को बंधक बना लिया, ताकि फिलिस्तीन जैसा नरसंहार यहां दोहराया जा सके. वकीलों, छोटे और बड़े राजनीतिक नेताओं और छात्रों को राज्य के बाहर जेलों में डाल दिया गया.'

गिलानी ने आरोप लगाया, 'मैंने विभिन्न माध्यमों से आप तक संदेश पहुंचाया ताकि आगे के कदमों पर फैसला हो सके लेकिन मेरे सभी प्रयास (संपर्क करने के) व्यर्थ हो गए. अब जब वित्तीय एवं अन्य गड़बड़ियों को लेकर जिम्मेदारी की तलवार आपके सिर पर लटक रही है तो आपको परामर्श समिति की बैठक बुलाने का ख्याल आ रहा है.' यह खबर अंग्रेजी से अनुवाद की गई है. इस मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
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