ग्रामीण क्षेत्र माण्‍डया में 80% से ज्यादा तो संपन्न साउथ बंगलौर में 27% से कम क्यों पड़े वोट?

ग्रामीण भारत की तुलना में भारत की शहरी जनसंख्‍या काफी अधिक शिक्षित है. ऐसा होते हुए भी शहरों में मतदान कम होता है.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 3:00 PM IST
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Updated: May 17, 2019, 3:00 PM IST
12 मई को आयोजित आम चुनाव, 2019 के छठे चरण का समापन हो गया है. इन सभी छ: चरणों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण मतदान के प्रतिशत में बढ़ोतरी देखने में आई है. न्‍यूज 18 इंडिया के डिप्‍टी मैनेजिंग एडीटर किशोर अजवानी द्वारा मीडिया के प्रतिष्ठित पावर पैक्‍ड पैनल के साथ मिलकर इन रूझानों का आत्‍मविश्‍लेषण और विश्‍लेषण किया गया है.

सीएनएन न्‍यूज18 के एडिटर भूपेन्‍द्र चौबे तथा इसकी वरिष्‍ठ एडीटर पल्‍लवी घोष द्वारा न्‍यूज18 के राजनैतिक एडिटर अमिताभ सिन्‍हा तथा फर्स्‍ट पोस्‍ट के एडिटर बी.वी.राव के साथ मिलकर इस विषय पर विचार मंथन किया गया है और इसके लिए कुछ व्‍यवहार्य समाधान सुझाए गए हैं.



मानसिकता
शहरी एवं ग्रामीण जनसंख्‍या में व्‍याप्‍त भिन्‍न प्रकार की मानसिकता इसका प्रमुख कारण है. उदाहरण के तौर पर मुम्‍बई, बंगलौर तथा हैदराबाद जैसे नगरों में रहने वाले लोग समृद्ध माने जाते हैं. उन्‍हें बुनियादी सुविधाएं तथा अवसंरचना आसानी से उपलब्‍ध होती है. बेहतर शासन को ओर बेहतर बनाने की आवश्‍यकता के प्रति वे कोई विशेष ध्‍यान नहीं देते हैं.

ग्रामीण कस्‍बो, गांवों तथा जिलों के लोग सरकार द्वारा उपलब्‍ध करवाई जाने वाली सेवाओं पर अधिक आश्रित हैं. इस प्रकार अपने रहन सहन को ओर बेहतर बनाने की आवश्‍यकता वे समझते हैं तथा अपने पसंदीदा उम्‍मीदवार के हक में वे मतदान करते हैं.

शासन व्‍यवस्‍था पर निजी कम्‍पनियों की पकड़ होना
मुम्‍बई तथा बंगलौर जैसे प्रमुख महानगरों में बिजली इत्‍यादि जैसी बुनियादी सुविधाओं की देखरेख तथा व्‍यवस्‍था रिलायंस एवं टाटा जैसी निजी कम्‍पनियों द्वारा की जाती है. इससे नगरवासियों के सम्‍मुख सरकार की भूमिका क्षीण स्‍वरूप में प्रस्‍तुत होती है. चुनाव काल के दौरान यही उदासीनता अपना काम कर जाती है जिससे शहरों में रहने वाले लोग मतदान नहीं करते हैं.शिक्षा उलझाव
ग्रामीण भारत की तुलना में भारत की शहरी जनसंख्‍या काफी अधिक शिक्षित है. ऐसा होते हुए भी शहरों में मतदान कम होता है. मीडिया तथा अन्‍य चैनलों के माध्‍यम से मिलने वाली ढेरों खबरें शिक्षित शहरी मतदाताओं में मस्तिष्‍क में उलझाव उत्‍पन्‍न करती हैं. इससे उम्‍मीदवारों तथा राजनैतिक पार्टियों के प्रति वे अपना विश्‍वास खो बैठते हैं और अच्‍छी पसंद के उम्‍मीदवार न होने के कारण वे मतदान नहीं करते हैं.

दूसरी तरफ ग्रामीण भारत में मतदान करने जीवनशैली में बेहतर बदलाव स्‍थापित होने का भरोसा एवं विश्‍वास स्‍थापित है.

(इस व्‍यापक भिन्‍नता का एक छोटा सा उदाहरण इस प्रकार है – कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्र माण्‍डया में 80% से भी अधिक मतदान रिकार्ड किया गया है जबकि समृद्ध दक्षिण बंगलौर में अपेक्षाकृत 27 प्रतिशत से कम मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया है)

मतदान में बढ़ोतरी के लिए पैनल द्वारा दिए गए सुझाव
• मीडिया की सक्रिय भागीदारी के साथ मताधिकार के उपयोग के प्रति मतदाताओं में जागृति उत्‍पन्‍न करना. उन्‍हें नई संकल्‍पनाओं, नई आशाओं जैसे उद्देश्‍यों की जानकारी देना जो मतदान की प्रक्रिया से प्राप्‍त किए जा सकते हैं.

• लोगों के सम्‍मुख अपने मताधिकार के उपयोग की बाधाओं को संज्ञान में लेना. ऐसी समस्‍याएं प्रवास अथवा पते में बदलाव, मतदान सूची में नाम दर्ज न होने, मतदाता पहचान पत्र न होने इत्‍यादि जैसे स्‍वरूप में हो सकती हैं.
• इन समस्‍याओं का समाधान निकालना. अमेरिका जैसे देशों में निवास कर रहे ऐसे लोगों से सम्‍पर्क करना जिन्‍होंने मतदान नहीं किया है तथा उनके द्वारा दिए गए कारणों को विचार में लेना.

• नियमों तथा कानून को सरल बनाकर, मतदान केन्‍द्र तक पहुंचने की सुविधाएं उपलब्‍ध करवाकर प्रवासी कामगारों, महिलाओं, वरिष्‍ठ नागरिकों, पहली बार मतदान करने वालों की सहायता करना. मतदान की पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाना.

• अनिवार्य मतदान के लिए कानून बनाना तथा प्रत्‍येक पात्र मतदाता की इसके प्रति जवाबदेही तय करना.
• एप्‍प एवं स्‍मार्टफोन के माध्‍यम से डिजिटल मतदान की शुरूआत करना.

ऐसे अनुमान लगाए गए हैं कि वर्ष 2030 तक भारत की 50% जनसंख्‍या शहरी क्षेत्रों में आकर बसने लगेगी. शहरी मतदाताओं के वर्तमान स्‍तर को ध्‍यान में रखते हुए यह कोई अच्‍छी स्थिति नहीं होगी तथा इसके लिए आम चुनावों शहरी मतदाताओं की भागीदारी एवं उन्‍हें इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना आवश्‍यक होगा.

बटन दबाओ देश बनाओ नेटवर्क18 की एक पहल है, जो आरपी-संजीव गोयनका समूह द्वारा प्रस्तुत की गई है, जो हर भारतीय से चल रहे आम चुनावों में मतदान करने का आग्रह करती है. सोशल मीडिया पर हैशटैग #ButtonDabaoDeshBanao का उपयोग करके चर्चा में शामिल हों.

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