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दिलीप छाबड़िया: कारोबारी का कारों से कारावास तक का सफर

डीसी डिजाइन में आने के बाद कारों का मेकओवर होता था, तो उन पर डीसी डिजाइन का बैच लगाना अनिवार्य होता था. इन शर्तों के कारण डीसी डिजाइन बहुत जल्‍द बड़ा ब्रांड बन गई. फाइल फोटो
डीसी डिजाइन में आने के बाद कारों का मेकओवर होता था, तो उन पर डीसी डिजाइन का बैच लगाना अनिवार्य होता था. इन शर्तों के कारण डीसी डिजाइन बहुत जल्‍द बड़ा ब्रांड बन गई. फाइल फोटो

दिलीप छाबड़िया (Dilip Chhabria) की डीसी अवंती (DC Avanti) को भारत की पहली स्‍पोर्ट्स कार कहा गया. इसके बनने और सड़क तक पहुंचने में दस साल का समय लगा और 2015 में डीसी डिजाइन एक कार कंपनी बन चुकी थी.

  • Last Updated: January 13, 2021, 10:43 PM IST
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नई दिल्ली. देश के जाने माने कारोबारी और सुपरकार के इकलौते डिजाइनर और निर्माता दिलीप छाबड़िया (Dilip Chhabria) फिर सुर्खियों में हैं. अखबारों और सोशल मीडिया में उनकी तस्‍वीरें वायरल हो रही हैं. उन्‍हें नए मामले में गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक पुराने मामले में वो पहले से ही पुलिस कस्‍टडी में थे. नया मामला प्रसिद्ध कॉमेडियन कपिल शर्मा (Kapil Sharma) ने दर्ज कराया है. इसमें छाबड़िया पर कई आरोप लगाए गए हैं. इन तस्‍वीरों के सामने आते ही कुछ अन्‍य लोगों ने भी पुलिस में उनके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करा दी है. अभी मामला विचाराधीन है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि दिलीप का कारावास का सफर तय हो गया है.

दिलीप छाबड़िया पर लगे आरोपों में कहा गया है कि उन्‍होंने रकम लेने के बाद भी वैनिटी वैन नहीं दी, बल्कि वैनिटी वैन पार्किंग का डेढ़ करोड़ का बिल दे दिया. इससे पहले छाबड़िया पर कर्ज न चुकाने और एक ही गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कई जगहों पर करने का आरोप लगा था. उनकी कंपनी डीसी अवंती को लेकर भी संगीन मामले सामने आए हैं. दरअसल यह सबकुछ अचानक नहीं हुआ और इसका आभास छाबड़िया को पहले से ही था. उन्‍होंने मीडिया से चर्चा करते हुए इस बाबत आशंका भी जाहिर की थी. उन्‍होंने कहा था, 'सुपरकार बनाने, उसे लांच करने और बेचने के सफर का बहुत बड़ा जोखिम उनकी कंपनी और परिवार ने उठाया है.' यही जोखिम उन्‍हें ले डूबा. अब निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं.

कौन हैं दिलीप छाबड़िया
भारत के पहले और इकलौते कार डिजाइनर और निर्माता दिलीप छाबड़िया 1990 के दशक से सुर्खियां पाते रहे हैं. उनकी कंपनी डीसी डिजाइन, कारों को डिजाइन करने, ऑटोमोटिव कंपनियों को प्रोटोटाइप बनाने में मदद करती थी. अमेरिका के आर्ट सेंटर ऑफ डिजाइन से बाकायदा ऑटोमोटिव डिजाइन की डिग्री लेकर मुंबई लौटे छाबड़िया ने 1993 में कारोबार शुरू किया था. वे ऑटो और कार की डिजाइन बनाते थे. उन्‍होंने मारुति सुजुकी की जिप्‍सी में भी बदलाव कर लोकप्रियता पाई थी. कार निर्माता कंपनियों को नए सुझाव और सुविधा वाले प्रोटोटाइप बनाकर दिखाने वाले दिलीप को उन कार प्रेमियों से भी काम मिलने लगा जो अपनी कार में कुछ बदलाव चाहते थे. उस वक्‍त मॉडिफिकेशन का काम छोटे गैराज के मैकेनिक ही करते थे. असंगठित क्षेत्र के इस काम को लेकर दिलीप ने अपनी अमेरिकी डिग्री की बदौलत बड़ी छलांग लगाई. उनकी डिजाइन और मॉडिफाइड की गई चमचमाती कारों ने उनको बहुत जल्‍द प्रसिद्धी दिलाई.




टॉप सेलिब्रिटीज की पहली पसंद बने
चमकती कारों के साथ दिलीप, देश की टॉप सेलिब्रिटीज और खासतौर पर बॉलीवुड स्‍टार्स के लिए पहली पसंद बन गए. फिल्‍मी सितारे चाहते थे कि उनके वाहन आकर्षक और आरामदायक हों. वाहनों में उन्‍हें घर जैसी सुविधा मिल सके. इसको ध्‍यान में रखकर दिलीप ने टाटा इनोवा के साथ प्रयोग किया. कंपनी के इंटीरियर को हटाकर उन्‍होंने लैदर, लकड़ी और इलेक्‍ट्रॉनिक सामानों से टाटा इनोवा को स्‍टार होम के लिविंग रूम में बदल दिया. उनका यह प्रयोग बेहद लोकप्रिय हुआ और इससे उनकी कंपनी को बहुत सम्‍मान और काम मिला. इसके बाद उन्‍होंने कारों के मॉडिफिकेशन के साथ शर्तें भी रख दी. वे पुरानी या सेकंड हैंड कारों का मॉडिफिकेशन नहीं करते थे. डीसी डिजाइन में आने के बाद कारों का मेकओवर होता था, तो उन पर डीसी डिजाइन का बैच लगाना अनिवार्य होता था. इन शर्तों के कारण डीसी डिजाइन बहुत जल्‍द बड़ा ब्रांड बन गई.

सुपरस्‍टार्स की वैनिटी वैन भी बनाई
दिलीप छाबड़िया की कंपनी ने कारों के साथ-साथ बड़ी बसों को डिजाइन करना शुरू कर दिया. चलते-फिरते महल जैसे और सर्व सुविधाओं वाली इन बसों को बॉलीवुड सितारों ने वैनिटी वैन कहा. उन्‍हें सितारों के घरों का एक हिस्‍सा जैसे ही बनाया गया था. बॉलीवुड सितारों की नजदीकी से कंपनी को रूपहले परदे पर तो आना ही था. 2004 में कार पर आधारित फिल्‍म टार्जन: द वंडर कार को दिलीप छाबड़िया की कंपनी ने ही डिजाइन किया था. इस फिल्‍म को बॉक्‍स आफिस पर कामयाबी मिली तो डीसी डिजाइन पूरे भारत में प्रसिद्धी पा गई. देश भर की सेलिब्रिटी और दक्षिण भारत के स्‍टार्स के लिए भी वैनिटी वैन इसी कंपनी ने बनाई. ख्‍याति फैलते-फैलते कई अंतरराष्‍ट्रीय ऑटोमोटिव कंपनियों तक जा पहुंची. यहां भी डीसी डिजाइन को वर्ल्‍ड क्‍लास प्रोटोटाइप बनाने का बड़ा काम मिला. डिजाइन प्रोटोटाइप्स को सामान्य भाषा में डिजाइन स्टडी और कांसेप्ट कहा जाता है. ये मोटर शो में प्रदर्शित किए जाते हैं ताकि ग्राहकों की प्रतिक्रियाओं को समझा जा सके और आने वाले भावी उत्पादों में सुझावों को शामिल करते हुए ग्राहकों की रुचि अनुसार उत्‍पाद में बदलाव लाया जा सके.

दुनिया भी हैरान रह गई
जनवरी 2003 में जब डीसी डिजाइन ने डेट्रॉइट मोटर शो में एस्टन मार्टिन वी8 वांटेज के प्रोटोटाइप को प्रदर्शित किया तो दुनिया भी हैरान रह गई. इसे कंपनियों, कार प्रेमियों, डिजाइन विशेषज्ञों से बहुत सराहना मिली. यह प्रोटोटाइप ब्रिटिश सुपर कार कंपनी के स्‍पेसिफिकेशन पर आधारित था. इसकी खूबियों और आकर्षक होने से मीडिया में भी यह छाया रहा. दुनिया भर में ख्‍याति और प्रचार के बावजूद दिलीप छाबड़िया का दिल और दिमाग हमेशा आटोमोटिव और ट्रांसपोर्टेशन डिजाइन पर ही लगा रहा. यही उनका पैशन भी है. उनकी दृष्टि, कला, स्‍टाइल भरे कांसेप्‍ट और स्‍केचेस उन्‍हें बहुत बड़ा आटोमोटिव डिजाइनर बनाते हैं. उनकी डिजाइन की गई कारें बरबस आंखों को नजर जमाने पर मजबूर कर देती हैं. ये बाहर से खूबसूरत दिखने वाले चमचमाती कारें अंदर से बहुत आरामदायक और सुविधाओं वाली होती थीं. ये खूबियां दिलीप को असाधारण कलाकार बनाती हैं. जब उनके पास काम, धन और दुनिया भर ख्‍याति हो गई तो उन्‍होंने बड़ा करने का विचार किया.

क्‍यों न कार कंपनी ही बनाई जाए
दिलीप छाबड़िया ने कारों की डिजाइन और मॉडिफिकेशन से बहुत आगे बढ़कर कार कंपनी बनाने का विचार किया. इसके लिए पहली कार डीसी अवंती को तैयार किया गया. यह एक खूबसूरत स्‍पोर्ट्स कार थी, जिसमें दो लोग बैठ सकते थे. इसमें अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर की खूबियां थीं, इसका ग्राउंड क्‍लीयरेंस पर्याप्‍त था. इसमें 250बीएचपी टर्बो चार्जड रेनो स्‍पोर्ट्स इंजन लगाया गया था. और सबसे खास बात इसकी कीमत मात्र चालीस लाख रखी गई थी. इस प्रोजेक्‍ट को लेकर दिलीप छाबड़िया बहुत उत्‍साहित थे और उन्‍होंने मुंबई से खुद को पुणे के भूगांव में स्थित इकाई में शिफ्ट कर लिया था. यह कार 2012 में आयोजित नई दिल्‍ली के ऑटो एक्‍सपो में प्रदर्शित की गई. इसे सुपरस्‍टार अमिताभ बच्‍चन ने लोकार्पित किया. यहां दिलीप ने कहा था कि हमारी शुरुआत बहुत छोटी थी, जो अब कार निर्माण तक जा पहुंची है. डीसी अवंती को भारत की पहली स्‍पोर्ट्स कार कहा गया. इसके बनने और सड़क तक पहुंचने में दस साल का समय लगा और 2015 में डीसी डिजाइन एक कार कंपनी बन चुकी थी.

चारों तरफ से आती है मुसीबत
कहते हैं कि मुसीबत आती है तो चारों तरफ से आती है. डीसी डिजाइन के साथ भी शायद ऐसा ही होने वाला था. इसकी इंजीनियरिंग, मैन्‍युफैक्‍चरिंग और आर्थिक मामलों में कष्‍ट आना शुरू हो गए. जोरदार प्रचार-प्रसार और मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर इसकी मौजूदगी पर भी होने के बावजूद इसके ग्राहक कार की परफॉर्मेंस से खुश नहीं थे. इस कार की बिक्री गिर गई और बहुत जल्‍द सेकंड हैंड मार्केट में अवंती दिखाई देने लगी, जिन पर कम प्राइज टैग लगे थे. दिलीप इस बात को जानते थे, उन्‍होंने एक कोशिश और की. 2018 में दिल्‍ली ऑटो एक्‍सपो में उन्‍होंने दमदारी के साथ टीसीए (टाइटेनियम कार्बन एल्‍यूमिनियम) कान्‍सेप्‍ट पर अवंती का रिप्‍लेसमेंट उतारा. अप्रैल 2020 की प्रेस रिपोर्ट के अनुसार यह एक इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार थी. इस कार की वाहवाही होने के बावजूद यह पर्याप्त संख्या में खरीदार नहीं ला पाई. कंपनी दिनोंदिन घाटे में जाती गई और उसे आर्थिक समस्‍याओं के कारण दिवालिया होना पड़ा. भूगांव की इकाई को भी नीलाम करने की नौबत आ गई.

डीसी डिजाइन पर अवैध तरीके से धन लेने, अपनी ही कार के री-रजिस्‍ट्रेशन की गड़बड़ी करने का भी आरोप लगा. इन्‍हीं मामलों के कारण दिलीप को मुंबई पुलिस ने हिरासत में ले लिया था.
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