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पश्चिम बंगालः कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने पर भड़के दिलीप घोष, बोले-कोई फर्क नहीं पड़ेगा

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कृषि कानून के खिलाफ प्रस्ताव करने की बीजेपी की आलोचना की है.

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कृषि कानून के खिलाफ प्रस्ताव करने की बीजेपी की आलोचना की है.

West Bengal latest News: दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘अनुचित’ भाषा का इस्तेमाल कर उन्हें निशाना बना रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 4:11 PM IST
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कोलकाता. केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों (Agricultural laws) के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा (West Bengal Legislative Assembly) ने इन कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है. ममता सरकार (Mamata Banerjee) द्वारा जारी किए गए इन प्रस्तावों पर राजनीति शुरू हो गई है.

पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रमुख दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने कहा, ममता बनर्जी ने विमुद्रीकरण और सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे. क्या इससे कोई फर्क पड़ा? उनके पास करने के लिए कुछ भी नहीं है, वे विधानसभा तक ही सीमित हैं. उनके पास ढंग और ज्ञान नहीं है, वो वहां पर बैठकर पीएम का इस्तीफा चाहते हैं. उन्होंने कहा-पश्चिम बंगाल की विधानसभा में जो दो दिन का अधिवेशन हुआ है उसमें कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने वाला है. यह बहुत निंदनीय है. राज्यपाल को आमंत्रण नहीं दिया गया. TMC लोकतंत्र को नहीं मानती है. ऐसी पार्टी हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.


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अनुचित भाषा का इस्तेमाल कर रही हैं ममता
दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘अनुचित’ भाषा का इस्तेमाल कर उन्हें निशाना बना रही हैं. घोष ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ‘शिष्टाचार की संस्कृति में विश्वास नहीं रखती हैं.’ पार्टी के सहयोगी शुभेंदु अधिकारी के साथ जनसभा को संबोधित करते हुए घोष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री, महज राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी होने के कारण देश के दो शीर्ष नेताओं के खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने से परहेज नहीं करती हैं.
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