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आपदा और आंतरिक सुरक्षा की संचार व्यवस्था इस तकनीक से होगी ज्‍यादा मजबूत

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 6:48 PM IST
आपदा और आंतरिक सुरक्षा की संचार व्यवस्था इस तकनीक से होगी ज्‍यादा मजबूत
विभिन्‍न एजेंसियों की मदद से सुरक्षा बलों, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए पोलनेट 2.0 तैयार किया गया है.

पिछले कुछ साल में पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) सीमा के पास भारतीय सुरक्षाबलों के कम्युनिकेशन सिस्टम (Communication System) की फ्रीक्वेंसी से जानकारियां चुराने के मामले सामने आए हैं. इसे देखते हुए अलग-अलग एजेंसियों की मदद से संचार के उन्नत सिस्टम पोलनेट-2.0 (Polnet-2.0) को तैयार किया गया है.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 6:48 PM IST
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अमित पांडेय

नई दिल्‍ली. भारतीय सीमा (Indian Borders) को सुरक्षित रखने, पुलिस संचार (Police Communication) को उन्नत बनाने और आपदा (Disaster) के वक्त संचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब पोलनेट-2 सिस्टम इस्तेमाल किया जाएगा. पोलनेट-2.0 कम्युनिकेशन सिस्टम (Polnet-2.0) के जरिये वॉयस के अलावा वीडियो (Video) और अन्य डेटा भी बेहद सुरक्षित तरीके से भेजे जा सकेंगे. पिछले कुछ साल में पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) सीमा के पास भारतीय सुरक्षाबलों के कम्युनिकेशन सिस्टम की फ्रीक्वेंसी से जानकारियां चुराने के मामले सामने आए हैं. इसे देखते हुए अलग-अलग एजेंसियों की मदद से इस उन्नत सिस्टम (Advanced System) को तैयार किया गया है.

पोलनेट-2.0 से बेहतर होगी एजेंसियों की संचार व्‍यवस्‍था
सुरक्षाबल (Security Forces) मौजूदा समय में पोलनेट-1 कम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल सीमाओं पर, पुलिस देश में और विभिन्‍न एजेंसियां आपदा के दौरान अपनी जरूरत के हिसाब से करती हैं. एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे देश में पुलिस संगठनों की संचार व्यवस्था उन्नत होगी. साथ ही पोलनेट-2.0 से आपदा के समय भी हर कोने तक संचार व्‍यवस्‍था दुरुस्‍त रहेगी. पोलनेट 2.0 एक ऐसी संचार सुविधा है, जो भारत में पहली बार पुलिस और आपदा प्रबंधन संस्थानों के लिए शुरू की जा रही है. इससे एक समय में देश के किसी भी हिस्‍से से दूसरे छोर पर बैठे लोगों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर सकते हैं. साथ ही इसकी मदद से कहीं भी डेटा भेज सकते हैं. इसके अलावा इस सिस्टम में कई अन्य खूबियां भी होंगी.

राज्‍यों के डीजीपी कार्यालयों में लगाया गया पोलनेट-2.0
पोलनेट-2.0 की मदद से एक समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में 40 लोगों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग (Video Conferencing) की सुविधा उपलब्ध होगी. पोलनेट 2.0 में ज्यादा प्रभावी और उन्नत सी-बैंड में सेटेलाइट के जरिये संचार होता है. यह तकनीक किसी भी मौसम में काम करती रहेगी. इसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के उपग्रह का इस्‍तेमाल होता है. इसके लिए एक 36 MHz का ट्रांसपॉन्‍डर इस्‍तेमाल किया जाएगा. पोलनेट-2.0 को सभी राज्यों की राजधानियों में अंतर राज्यीय पुलिस बेतार स्टेशनों और सभी राज्यों के डीजीपी कार्यालयों (DGP Offices) में स्थापित किया जा चुका है.

दो साल में देश के 3,000 केंद्रों में होगा पोलनेट-2.0 सरकार को उम्मीद है कि अगले दो साल में देश के 3,000 केंद्रों पर पोलनेट-2.0 संचार तंत्र स्थापित हो जाएगा. इससे आतंरिक सुरक्षा (Internal Security) और आपदा प्रबंधन कार्यों में बहुत मदद मिलेगी. अगर देश के किसी सुदूर इलाके में आपदा आई हो और सभी संचार माध्यम बंद हों, तो भी पोलनेट 2.0 काम करता रहेगा. इसके फ्लाईवे टर्मिनल द्वारा किसी भी परिस्थिति में किसी भी स्थान पर आधे घंटे में वीडियो कांफ्रेंसिंग इक्‍यूपमेंट समेत नेटवर्क को स्थापित कर सूचनाएं भेजी जा सकती हैं. इससे आपदा प्रभावित लोगों तक तुरंत मदद पहुंचाने में संचार माध्‍यमों की भूमिका को बेहतर किया जा सकेगा.

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First published: January 16, 2020, 6:48 PM IST
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