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‘किसान संसद’ में कृषि कानूनों पर चर्चा, निरस्त करने की मांग का प्रस्ताव पारित

जंतर-मंतर में 'किसान संसद', लगी, मॉनसून सत्र समाप्त होने तक जारी रहेगी. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

जंतर-मंतर में 'किसान संसद', लगी, मॉनसून सत्र समाप्त होने तक जारी रहेगी. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

किसानों द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित ‘किसान संसद’ में बृहस्पतिवार को तीन कृषि कानूनों में से एक पर चर्चा की गयी. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान में कहा कि किसान संसद के छठे दिन किसानों ने कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून को निरस्त करने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया.

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    नयी दिल्ली. किसानों द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित ‘किसान संसद’ में बृहस्पतिवार को तीन कृषि कानूनों में से एक पर चर्चा की गयी और ‘असंवैधानिक’ बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गयी. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने एक बयान में कहा कि किसान संसद के छठे दिन किसानों ने कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून को निरस्त करने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. कृषि कानूनों के खिलाफ 40 से ज्यादा यूनियन एसकेएम के नेतृत्व में पिछले आठ महीने से आंदोलन कर रही हैं.

    प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह कानून ‘‘असंवैधानिक और कॉरपोरेट समर्थक’’ है. ‘किसान संसद’ ने कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून 2020 को असंवैधानिक, किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक बताते हुए खारिज कर दिया. ‘किसान संसद’ के दौरान किसानों ने बताया कि कैसे कानून, विभिन्न धाराओं के तहत कॉरपोरेट को कानूनों के नियामक दायरे से छूट देता है, जबकि यह अनुबंध खेती में करने वाले किसानों को कोई सुरक्षात्मक प्रावधान प्रदान नहीं करता है.

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    संसद के मॉनसून सत्र के समानांतर ‘किसान संसद’ का आयोजन किया जा रहा है. किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. ‘किसान संसद’ में हिस्सा लेने के लिए जंतर मंतर पर हर दिन 200 किसान एकत्र होते हैं.

    एसकेएम ने कहा ‘किसान संसद’ ने भी संकल्प लिया और भारत के राष्ट्रपति से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि ‘‘संसद की सर्वोच्चता बरकरार रहे.’’ बयान में कहा गया, ‘‘नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार अपने कार्यकाल के दौरान नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार संसद की कार्यवाही का संचालन करने में बुरी तरह विफल रही है.’’ एसकेएम ने कहा, ‘‘संसद के दोनों सदनों में लोगों के दुख- दर्द तथा जीवन और मृत्यु के मुद्दों समेत गंभीर मुद्दों पर चर्चा की अनुमति नहीं दी गयी.’’

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