मोदी के घर में बीजेपी की राजनीतिक जमीन मजबूत करेंगे कांग्रेस के ये नेता

फरवरी में कांग्रेस विधायक जवाहर चावड़ा (मानवधर), पुरुषोत्तम सबरिया (ध्रांगध्रा), वल्लभ धारविया (जामनगर ग्रामीण) और आशा बेन पटेल (ऊंझा) ने बीजेपी का रुख किया.

News18Hindi
Updated: March 12, 2019, 11:51 PM IST
मोदी के घर में बीजेपी की राजनीतिक जमीन मजबूत करेंगे कांग्रेस के ये नेता
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: March 12, 2019, 11:51 PM IST
(विजय सिंह परमार)
गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में स्पष्ट रूप से राजनीतिक 'फाल्ट लाइन' देखने को मिला. राज्य भर में बीजेपी शहरों में मजबूत दिखी, जबकि ग्रामीण स्तर पर कांग्रेस को ज्यादा पसंद किया गया. इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत की सरकार तो बना ली, लेकिन पिछले चुनाव की अपेक्षा कांग्रेस की सीटों में इजाफा हुआ. आगामी आम चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए यह शुभ संकेत था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गढ़ वडनगर की उंझा विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मूल निवास स्थान मनसा विधानसभा सीट भी बीजेपी हार गई थी.

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बीच बीजेपी ने गुजरात की सभी 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि अब राज्य के हालात बदल गए हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बीजेपी ने शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत बना ली है. इसी के साथ अब पार्टी ने राज्य के ग्रामीण हिस्सों पर भी अपनी पकड़ बनाना शुरू कर दिया है. हालिया राजनीतिक घटनाक्रम से भी यह स्पष्ट होता है कि पिछले एक महीने में कांग्रेस के चार विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं. उनमें से ज्यादातर सौराष्ट्र क्षेत्र से हैं.

फरवरी में कांग्रेस विधायक जवाहर चावड़ा (मानवधर), पुरुषोत्तम सबरिया (ध्रांगध्रा), वल्लभ धारविया (जामनगर ग्रामीण) और आशा बेन पटेल (ऊंझा) ने बीजेपी का रुख किया. बीजेपी ने 'मिशन 26' लॉन्च किया और राज्य की सभी 26 लोकसभा सीटों पर जीत बरकरार रखने की योजना बनाई.

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मानवधर के कांग्रेस विधायक जवाहर चावड़ा जब बीजेपी में शामिल हुए, उसके कुछ ही घंटों बाद उन्हें विजय रूपाणी सरकार में शामिल कर लिया गया. चावड़ा को मंत्री बनाया गया. चावड़ा मानवधर विधानसभा सीट से चार बार से विधायक हैं. प्रशासनिक रूप से मानवधर निर्वाचन क्षेत्र जूनागढ़ जिले में पड़ता है. जबकि आम चुनाव में यह पोरबंदर लोकसभा सीट में आता है.
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बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनावों में जूनागढ़ लोकसभा सीट की सभी सात विधानसभा सीटों पर बीजेपी हार गई थी. पोरबंदर लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा सीटे हैं. उनमें से बीजेपी ने चार सीटें जीती थींं, जबकि कांग्रेस ने दो और एनसीपी ने एक सीट जीती थी. वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और जूनागढ़ एवं पोरबंदर लोकसभा सीटों के ग्रामीण क्षेत्रों को देखते हुए, कांग्रेस विधायक और ओबीसी नेता जौहर चावड़ा का बीजेपी में शामिल होना महत्वपूर्ण है.

अमरेली लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा सीट हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां की केवल दो सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि कांग्रेस ने पांच विधानसभा सीटें जीती थींं. इसके अलावा, महुवा से तीन बार भाजपा से विधायक रहे अहीर नेता डॉ कनुभाई कलसरिया कुछ महीने पहले कांग्रेस में शामिल हुए हैं. महुवा अमरेली लोकसभा सीट में आता है.

वहीं राजकोट जिले के जसदान से कांग्रेस विधायक कुंवरजी बावलिया ने पिछले साल बीजेपी का दामन थाम लिया था. उन्होंने बीजेपी के टिकट पर जसदान उपचुनाव जीता था और अब रूपाणी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. यह सीट राजकोट लोकसभा क्षेत्र में आती है. यहां की सात विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने तीन सीटें (सभी ग्रामीण) जीती थीं. जबकि भाजपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी.

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कुंवरजी बावलिया कोली समुदाय (मछुआरे) के बड़े नेता माने जाते हैं. दक्षिण गुजरात और सौराष्‍ट्र की सभी सीटों को जोड़ दिया जाए तो करीब 35 विधानसभा क्षेत्रों में कोली मतदाताओं का सीधा असर है. कुंवरजी बावलिया लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और वह पिछले कुछ समय से बीजेपी में हैं. जिसके कारण बीजेपी सौराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत हुई है. इस वक्त सौराष्ट्र क्षेत्र की सात लोकसभा सीटों में से तीन लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व कोली नेताओं द्वारा किया जा रहा है.

वहीं सोमवार को धांग्रधा-हलवद सीट (सुरेंद्रनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत) से कांग्रेस विधायक पुरुषोत्तम साबरिया ने इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए हैं. सबरिया भी प्रशावशाली कोली समुदाय से हैं. उनका बीजेपी में शामिल होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुरेंद्रनगर लोकसभा सीट में आने वाली सात विधानसभा सीटों में से छह पर कांग्रेस का कब्जा था. जबकि बीजेपी ने केवल एक सीट जीती थी, जोकि शहरी थी.

इसी साल फरवरी महीने के पहले हफ्ते में मेहसाणा जिले के ऊंझा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक ने इस्तीफा देकर बीजेपी का हाथ थाम लिया था. गुजरात का वडनगर जिला पीएम मोदी का गढ़ भी माना जाता है और ऊंझा विधानसभा सीट उसी के अंतर्गत आती है. 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार आशा पटेल ने इस सीट से जीत दर्ज की थी. जबकि मनसा विधानसभा सीट भी बीजेपी ने गंवा दी थी.

अगर वर्ष 2012 से देखा जाए तो कांग्रेस के 34 नेता, (जिनमें विधायक और सांसद हैं) बीजेपी की तरफ रुख कर चुके हैं और उनमें से ज्यादात्तर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों से हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा ने गठबंधन किया है और अभी हाल ही में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव जीते हैं. ऐसे में बीजेपी अपने गढ़ गुजरात में किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती है. वह गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने का प्लान बना रही है.

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First published: March 12, 2019, 11:18 PM IST
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