आखिर पूर्व मंत्रियों को ED से क्यों लगता है डर?

shankar Anand | News18Hindi
Updated: September 5, 2019, 1:57 PM IST
आखिर पूर्व मंत्रियों को ED से क्यों लगता है डर?
कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार और पी. चिदंबरम

जब किसी केस में ईडी (ED) किसी पूर्व मंत्री को हिरासत में लेती है या जब गिरफ्तार करती है, तो उनसे घंटों पूछताछ होती है. ये प्रकिया अगर एक दिन में ही पूरी हो जाए, तो उसी दिन सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच करवाया जाता है. फिर संबंधित पूर्व मंत्री को स्थानीय थाना के अंतर्गत लॉकअप में भेज दिया जाता है. यानी आरोपी को थाने के लॉकअप (LockUp) में रात गुजारनी पड़ती है.

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  • Last Updated: September 5, 2019, 1:57 PM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) के दो दिग्गज मंत्री इन दिनों अलग-अलग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर रहे हैं. कर्नाटक कांग्रेस के संकटमोचक माने जाने वाले डीके शिवकुमार (DK Shivkumar) को ईडी ने मंगलवार को गिरफ्तार किया. आज उन्हें कोर्ट में पेश किया जाना है. वहीं, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) आईएनएक्स मीडिया (INX Media) केस में सीबीआई और ईडी के शिकंजे में हैं. ऐसे में सवाल है कि कोई भी बड़ा नेता ईडी की रिमांड से क्यों बचना चाहता है? क्योंकि पिछले कुछ दिनों से यही डर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम को भी सता रहा है. सीबीआई कस्टडी के दौरान भी वो ईडी के बारे में अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में दलील दे चुके हैं.

इस मामले में कोर्ट में एक विशेष याचिका दायर की गई थी, जिसमें चिदंबरम सीबीआई रिमांड के दौरान ही ईडी के सामने सरेंडर करना चाह रहे थे. ये कानून के मुताबिक उचित नहीं था. ऐसी ही गुजारिश मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के मामले में की गई थी, लेकिन तब अदालत ने इसे खारिज कर दिया था.

ईडी से क्यों डरते हैं पूर्व मंत्री?
जब किसी केस में ईडी किसी पूर्व मंत्री को हिरासत में लेती है या जब गिरफ्तार करती है, तो उनसे घंटों पूछताछ होती है. ये प्रकिया अगर एक दिन में ही पूरी हो जाए, तो उसी दिन सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच करवाया जाता है. फिर संबंधित पूर्व मंत्री को स्थानीय थाने के अंतर्गत लॉकअप में भेज दिया जाता है. यानी आरोपी को थाने के लॉकअप में रात गुजारनी पड़ती है.

अब बात करते हैं ईडी मुख्यालय की. ईडी का मुख्य दफ्तर दिल्ली के खान मार्केट इलाके में स्थित लोक नायक भवन में है. यहां कोई लॉकअप नहीं है. इसके चलते किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसका राम मनोहर लाल अस्पताल (आरएमएल) या एम्स में मेडिकल जांच करवाने के बाद तुगलक रोड थाना के लॉकअप नें सुरक्षा व्यवस्था के साथ भेज दिया जाता है. वैसे रामलीला ग्राउंड के पास एमटीएनएल बिल्डिंग में ईडी का एक और दफ्तर भी है. ईडी के सूत्रों के मुताबिक, अगर उस दफ्तर में पूछताछ और गिरफ्तारी होती है, तो आरोपी का मेडिकल जांच करवाने के बाद उन्हें कमला मार्केट थाना के लॉकअप में भेज दिया जाता है.

थाना के लॉकअप की क्या हालात होती है, ये तो लगभग सभी लोग सामान्य रूप से जानते हैं. उस लॉकअप में रात गुजारना बेहद मुश्किल होता है. बडे-बडे राजनेताओं और अन्य हस्तियों को ये सबसे नागवार गुजरता है. इसलिए वो ईडी की कस्टडी में जाने से बचते हैं, क्योंकि जब तक आप हिरासत में हैं, तब तक रात आपको उसी लॉकअप में गुजारना होगी.


सीबीआई और एनआईए का लॉकअप
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केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई और एनआईए जांच एजेंसी का अपना लॉकअप रूम है, जो काफी आधुनिक तरीके से बना हुआ है. इसमें एयर कंडीशनर (AC) भी लगी है. ईडी के पास अपनी बिल्डिंग नहीं है. लोक नायक भवन में ईडी के पास दो फ्लोर हैं. बाकी के बचे अन्य फ्लोर में कई अन्य विभागों के दफ्तर हैं. इसलिए यहां आधुनिक लॉकअप नहीं बन पाया है. हालांकि, कई बार ईडी को नए भवन देने की बात हुई, लेकिन फिलहाल मामला अधर में लटका है.

हाल में इन लोगों के खिलाफ हुई कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी पिछले चार सालों के अंदर काफी सुर्खियों में है. इस दौरान ईडी ने कई बड़े मामलों की तफ्तीश के दौरान कई बडे राजनीतिक हस्तियों, हवाला कारोबारियों, नक्सली और गैंगस्टर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग में फंसे कई बड़े नेताओं की चल और अचल संपत्तियों को अटैच भी किया है. इसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस सांसद कार्ति चितंबरम, सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, झारखंड के पुर्व मुख्यमंत्री मधु कोडा, शराब कारोबारी विजय माल्या, हीरा कारोबारी नीरव मोदी, हवाला कारोबारी जहूर वटाली जैसे जाने-माने लोग शामिल हैं.

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First published: September 4, 2019, 3:28 PM IST
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