जेल से निकलने के बाद भी वादा नहीं भूले डीके शिवकुमार, दो कैदियों को दिया नया जीवन

कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार 48 दिनों के लिए तिहाड़ जेल में रहे थे (ANI Twitter/23 June 2021)

डीके शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभालने से पहले करीब 48 दिन के लिए तिहाड़ जेल में बंद रहे. यहां उनके साथ रहे दो कैदियों की उन्होंने जेल से निकलने के बाद मदद की.

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    (काव्या वी)

    बेंगलुरु. कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Karnataka Pradesh Congress Committee) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) को दो साल पहले मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया गया था. इस दौरान वह 48 दिनों के लिए तिहाड़ जेल में रहे थे. इसके बार जमानत पर रिहा होने के बाद डीके शिवकुमार कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय हो गए. ये मानी हुई बात है कि जेल से रिहा होने के बाद वह केपीसीसी के अध्यक्ष बन गए. लेकिन उनके बारे में कुछ ऐसा है जो कि हम नहीं जानते हैं.

    सितंबर 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा ट्रायल पर चल रहे डीके शिवकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया. 48 दिन जेल में बिताने वाले डीके शिवकुमार ने अपने साथियों को याद किया और उनकी मदद की. डीके शिवकुमार ने एक ही जेल के दो कैदियों की सहायता की. जो आज भी अपने साथियों को याद करते हैं, उन्होंने अपने मेहनती समर्थकों को जेल से बाहर निकलने और एक नया जीवन बनाने दिया है. और उनमें से एक को अपने घर में रख लिया. दूसरे को बेंगलुरु में एक कंपनी में नौकरी देकर एक नया जीवन दिया.

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    मोहसिन रजा और एक अन्य कैदी ने जेल में डीके शिवकुमार की मदद की. डीके शिवकुमार उस सेल में रहते थे जहां मोहसिन एक ट्रायल कैदी था. रिहा होने पर, उन्होंने दो कैदियों को रिहा कराने का वादा किया. जेल से निकलने के बाद भी वह अपना वादा नहीं भूले. उन्होंने साढ़े चार लाख दिए और मोहसिन को जेल से रिहा कराया. सिर्फ पैसे ही नहीं डीके शिवकुमार ने मोहसिन को अपने घर में रहने दिया.

    मोइसिन से सीखा हिंदी बोलना
    जब शिवकुमार जेल में थे तब मोहसिन उन्हें दोपहर का भोजन, नाश्ता, कॉफी, चाय देते थे और कपड़े साफ करते थे. शिवकुमार मोहसिन की इस मदद को कुछ भी नहीं भूले और उन्होंने उनकी मदद करके मानवता दिखाई. डीके शिवकुमार ने जेल में रहते हुए मोहसिन से हिंदी बोलना सीखा. अब मोहसिन शिवकुमार के भाई डीके सुरेश के घर में रसोइया के रूप में काम कर रहे हैं.

    पारिवारिक कलह में कैद मोहसिन पत्नी से अलग हो गया था. मोहसिन को उसकी पत्नी को साढ़े चार लाख मुआवजे के तौर पर देने को कहा गया. लेकिन मोहसिन के पास देने के लिए पैसे नहीं थे. इस तरह, जब तक उस मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक मोहसिन को जेल में ही रहना होता. जैसा कि डीके शिवकुमार ने मोहसिन से वादा किया था कि पैसे दिए और उन्हें जेल से रिहा होने में मदद की और उसने तलाक का मामला सुलझा लिया.

    डीके शिवकुमार ने पूर्व जेल साथी को मीडिया से मिलवाया और कहा कि वह अपने वादों को कभी नहीं भूलेंगे. मोहसिन अपराधी नहीं था, वह जेल में था क्योंकि वह मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं कर सका. शिवकुमार ने कहा कि मोहसिन बहुत दयालु हैं. अब वह बेंगलुरु में नया जीवन बना रहे हैं. अब मोहसिन हमारे परिवार के सदस्य भी हैं. शिवकुमार ने कहा कि मैं जीवन में और राजनीतिक रूप से भी अपने वादों को कभी नहीं भूलता.

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