सेंट्रल स्‍कूल की परीक्षा में जाति और धर्म से जुड़े सवाल पूछे जाने का आरोप, मचा बवाल

सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल प्रश्‍नपत्र के अनुसार, इसमें जाति और धर्म से जुड़े सवाल पूछे गए हैं. इन सवालों पर तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) प्रमुख एमके स्‍टालिन (MK Stalin) ने आपत्‍ति जताई है. इसके बाद इस पर बवाल मचा हुआ है. हालांकि अब तक इसकी सत्‍यता की पुष्‍टि नहीं हुई है.

News18Hindi
Updated: September 7, 2019, 8:53 PM IST
सेंट्रल स्‍कूल की परीक्षा में जाति और धर्म से जुड़े सवाल पूछे जाने का आरोप, मचा बवाल
डीएमके प्रमुख स्‍टालिन ने ट्ववीट कर इस मामले में आपत्‍ति जताई है.
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Updated: September 7, 2019, 8:53 PM IST
पूर्णिमा मुरली, चेन्‍नई: केंद्रीय विद्यालय (Central School) की परीक्षा में जाति से जुड़े सवाल पूछने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल विवाद सोशल मीडिया (social Media) पर वायरल हो रहे एक पेपर के कारण हुआ है. वायरल प्रश्‍नपत्र के अनुसार, इसमें जाति और धर्म से जुड़े सवाल पूछे गए हैं. इन सवालों पर तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) प्रमुख एमके स्‍टालिन (MK Stalin) ने आपत्‍ति जताई है. इसके बाद इस पर बवाल मचा हुआ है. इससे जुड़े सवालों को स्‍टालिन ने ट्वीट करते हुए उल्‍लेखित किया है.

स्‍टालिन ने ट्वीट करते हुए लिखा, ये काफी चौंकाने वाला है. केंद्रीय विद्यालय की कक्षा 6 की परीक्षा में जाति से जुड़े ऐसे सवाल पूछे गए हैं जो जातिवाद के अलावा सांप्रयदायिकता को बढ़ावा देते हैं. जिसने भी ये प्रश्‍न परीक्षा में शामिल किया है, उसके खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई हो. स्‍टालिन ने इस ट्वीट में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को टैग किया.


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हालांकि अब तक इस पेपर की सत्‍यता की पुष्‍टि नहीं हो पाई है. खुद चेन्‍नई के केंद्रीय विद्यालय ने ऐसे किसी भी पेपर के होने से इनकार किया है. सेंट्रल स्‍कूल की ओर से साफ कहा गया है कि ऐसा कोई पेपर हमारी ओर से नहीं कराया गया है.

इस प्रश्‍नपत्र में दलित जाति के बारे में, डॉ. भीमराव अंबेडकर की जाति के अलावा मुस्‍लिमों से संबंधित सवाल पूछे गए हैं. एक सवाल में पूछा गया है कि आप दलित शब्‍द से क्या समझते हैं. इसमें अलग अलग विकल्‍प दिए गए हैं. दूसरा सवाल मुस्‍लिम समाज से जुड़ी प्रथाओं के बारे में है. इसमें पहला विकल्‍प है, वह अपनी लड़कियों को स्‍कूल नहीं भेजते, मुस्‍लिम शाकाहारी होते हैं. वह रोजा के दौरान सोते नहीं हैं. या इनमें से सभी.

कहा जा रहा है कि ये सवाल ''विविधता और भेदभाव'' वाले चैप्‍टर 2 से लिए गए हैं. इस प्रश्‍नपत्र पर एएमएमके लीडर टीटीवी दिनाकरन और राज्‍यसभा उम्‍मीदवार वायको ने भी सवाल उठाए हैं.

दिनाकरन ने इस पर आपत्‍ति जताते हुए कहा, मैं इसकी कड़ी आलोचना करता हूं. सीबीएसई ने बिना गंभीरता के इस टॉपिक को किताब में रखा, उन्‍होंने ये भी ध्‍यान नहीं दिया कि इससे बच्‍चों के मन पर क्‍या असर पड़ेगा. क्‍या इस विषय पर स्‍कूली बच्‍चों से इस तरह से सवाल पूछे जाएंगे. जिन्‍होंने भी ऐसे सवाल रखे हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.

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First published: September 7, 2019, 6:08 PM IST
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