आलोचना की चिंता न करें, 31 अगस्त तक पूरा करना होगा NRC का काम: SC

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन की पीठ ने असम नागरिक पंजी के समन्वयक प्रतीक हजेला की रिपोर्ट का जिक्र किया.

भाषा
Updated: August 8, 2019, 8:02 PM IST
आलोचना की चिंता न करें, 31 अगस्त तक पूरा करना होगा NRC का काम: SC
असम एनआरसी (फाइल फोटो)
भाषा
Updated: August 8, 2019, 8:02 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी की कवायद को लेकर असम विधानसभा के भीतर और बाहर की गई आलोचना और बयानों को दरकिनार करते हुए गुरुवार को कहा कि वह चाहता है कि इस काम को पूरा करने के लिये निर्धारित 31 अगस्त की समय सीमा का पालन हो.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन की पीठ ने असम नागरिक पंजी के समन्वयक प्रतीक हजेला की रिपोर्ट का जिक्र किया. जिसमें उन्होंने असम विधानसभा में इस बारे में जानकारी लीक होने और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के कानूनी सलाहकार सांतानु भराली के बयानों का उल्लेख किया है.

पीठ ने कहा कि उसका ऐसे बयानों से कोई सरोकार नहीं है.वह सिर्फ यह देख रही है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) बनाने की सारी कवायद 31 अगस्त की समय सीमा के भीतर पूरी हो. पीठ ने कहा कि आपने (हजेला) विधानसभा में जानकारी का खुलासा करने के संबंध में प्रतिपक्ष के नेता के बयानों और आंकड़ों की गोपनीयता के बारे में सांतानु भराली के प्रेस बयान की ओर हमारा ध्यान आकर्षित किया है. जहां तक प्रतिपक्ष के नेता के बयान का संबंध है, हमें इसकी गहराई में जाने की जरूरत नहीं है. जब न्यायाधीश या न्यायालय कोई आदेश पारित करता है तो कुछ लोग उसकी आलोचना करते ही हैं.

आलोचना की चिंता छोड़ काम पूरा करें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमारे आदेश और हमारी कार्रवाई हर क्षण बहस और आलोचना का विषय होती हैं. हम इससे विचलत नहीं होते. यदि हम इस पर गौर करेंगे तो हम कभी भी अपना काम पूरा नहीं कर सकेंगे.’ कोर्ट ने कहा कि उसे इसकी परवाह नहीं कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी की कवायद के बारे में क्या कहा जा रहा है.

पीठ ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी 31 अगस्त की निर्धारित समय सीमा के भीतर ही तैयार हो. कौन इसे पसंद कर रहा है, कौन नहीं कर रहा है, हमें इसकी परवाह नहीं है.’  इससे पहले, इस मामले की सुनवाई शुरू होने पर पीठ ने नागरिक पंजी के समन्वयक प्रतीक हजेला से बातचीत की और उनसे कहा कि शायद वह इस कवायद के दौरान एकत्र किये गये आंकड़ों की गोपनीयता बनाये रखने के लिये सुझाव चाहते हैं.

2003 के प्रावधानों पर भी चर्चा
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सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि कामरूप जिले के एक इलाके से करीब 33,000 लोगों का सत्यापन करना होगा क्योंकि यह पता चला है कि वहां नोटिस जारी करने के मामले में शिकायतें मिली हैं. पीठ ने नागरिकता (संशोधन) कानून, 2003 के प्रावधानों पर भी चर्चा की. ये प्रावधान राष्ट्रीय नागरिक पंजी के तहत लोगों पर विचार करने के मामले में अमल में लाये गये हैं.

NRC की सीमा बढ़ाकर की थी 31 अगस्त
पीठ ने कहा कि प्रतीक हजेला से नोट मिलने के बाद वह इस बारे में आदेश पारित करेगी कि क्या इस कानून की धारा 3 (1)(ए), 3(1)(बी) और धारा 3 (1)(सी) के आधार पर नाम शामिल किये जायेंगे. शीर्ष अदालत ने 23 जुलाई को असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी के अंतिम प्रकाशन की समय सीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी थी.

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First published: August 8, 2019, 7:47 PM IST
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