मास्टरस्ट्रोक: पीएम मोदी ने कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय एक ही मंत्री को क्यों दिया?

2014-15 से 2018-19 तक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 1.55 करोड़ घर बने हैं. वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2.18 लाख किमी रोड बनी है.

News18Hindi
Updated: June 1, 2019, 3:47 PM IST
मास्टरस्ट्रोक: पीएम मोदी ने कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय एक ही मंत्री को क्यों दिया?
पीएम मोदी की नई कैबिनेट में नरेन्द्र तोमर को कृषि और ग्रामीण विकास दोनों ही मंत्रालयों का मंत्री बनाया गया है (फोटो क्रेडिट- पीटीआई)
News18Hindi
Updated: June 1, 2019, 3:47 PM IST
कृषि और ग्रामीण विकास दोनों के ही मंत्री के तौर पर नरेन्द्र सिंह तोमर को नियुक्त किया गया है. यह इन दोनों मंत्रालयों को साथ लाने का एक प्रयास है. ये दोनों मंत्रालय अभी तक अकेले काम करते थे. ग्राम विकास के मामले में पिछली नरेन्द्र मोदी सरकार का पिछले पांच सालों का रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है. 2014-15 से 2018-19 तक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 1.55 करोड़ घर बने हैं. वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2.18 लाख किमी रोड बनी है.

इसके अलावा 2 अक्टूबर, 2014 से अभी तक स्वच्छ भारत मिशन- ग्रामीण के तहत 9.58 करोड़ शौचालय बने हैं. अप्रैल, 2015 से अभी तक 11.28 करोड़ नए एक्टिव एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं. हालांकि इसमें बड़ा हाथ उज्जवला योजना का रहा है. इसके अलावा 11 अक्टूबर, 2017 तक प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के तहत जिन घरों में बिजली नहीं थी उनकी संख्या 2.63 करोड़ से घटकर 18,734 तक आ गई थी.



अब खेती में भी देखने को मिल सकती है उज्जवला जैसी ही तेजी
हालांकि ग्रामीण भारत की यह सफलता खेती में देखने को नहीं मिली. जबकि अन्य योजनाएं ज्यादा फोकस थीं और उन्हें पर्याप्त फंडिंग भी मिली, खेती के साथ मामला थोड़ा अगल रहा. अन्य योजनाओं की सफलता का बड़ा कारण था कि ये अपने लाभान्वित के लिए पूरी तरह टारगेटेड थीं. जबकि खेती की योजनाएं इतनी प्रभावी नहीं थीं.

उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लिया जा सकता है. इस पर आरोप लगे कि इससे किसानों की बजाए बीमा कंपनियों को फायदा हो रहा है. इसमें किसानों से जो प्रीमियम बीमा कंपनियों ने लिए उसके हिसाब से औसत प्रीमियम, किसानों को चुकाए गए क्लेम से ज्यादा थे. यह भी पाया गया कि इसकी कार्यप्रणाली में कमी थी और साथ ही पूरी तरह से सही अनुमान फसलों के नुकसान का नहीं लगाया जा सका. लेकिन इस तरह की योजनाओं में दोनों ही मंत्रालयों के एक मंत्री के अंतर्गत आने से समन्वय में आसानी होगी और प्लानिंग में मदद मिलेगी. इससे खेती की योजनाओं में भी उज्जवला जैसी तेजी देखने को मिल सकती है.

मनरेगा और खेती को मिलाने पर होगा काम
इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से बात करते हुए केंद्रीय कृषि सचिव सिराज हुसैन ने कहा, 'खेती और ग्रामीण विकास मंत्रालय एक ही मंत्री के पास आना एक अच्छी बात है क्योंकि यह दोनों मंत्रालयों में सहयोग लाने में मदद करेगा. उदाहरण के तौर पर मनरेगा को पूरी तरह से एक ग्रामीण स्कीम के तौर पर देखा जाता है. हम इसे खेती के साथ मिलाकर किसानों की आय दोगुनी करना चाहते थे. ऐसे में समुदाय आधारित काम के बजाए व्यक्तिगत खेतों की पूंजी बढ़ाने पर फोकस होना चाहिए.' इस तरह की नई रणनीतियों को लागू किया जा सकेगा.
Loading...

नरेन्द्र तोमर, शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली कमेटी की नीति आयोग को भेजी सिफारिशें लागू करा सकते हैं (फोटो क्रेडिट- पीटीआई)


2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का होगा लक्ष्य
जून 2018 में मुख्यमंत्रियों का एक छोटा समूह मनरेगा के अंतर्गत काम करवाने के लिए बनाया गया था. इसका पूरा उद्देश्य किसानों की ऊंची आय के लक्ष्य को पाने में मदद करना था. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसके प्रमुख बनाए गए थे. और उन्हें फसलों को बोने से पहले और उनके काटे जाने के बाद की स्थितियों पर फोकस करने को कहा गया था.

इस पैनल की रिपोर्ट नीति आयोग में जमा की गई थी और तोमर अब इन रिपोर्ट के सुझावों को आराम से लागू कर सकते हैं. यह पीएम मोदी के 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा.

यह भी पढ़ें: मोदी सरकार के आगे हैं तीन कानूनी अड़चनें, सबसे पहले करना होगा इनका निपटारा!

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...