अगर आप जंक फूड, चाउमीन, नूडल्स और मोमोज खाते हैं तो हो जाइए सावधान

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: June 24, 2019, 7:47 PM IST
अगर आप जंक फूड, चाउमीन, नूडल्स और मोमोज खाते हैं तो हो जाइए सावधान
गर्मी के मौसम में डॉक्टरों की सलाह है कि जंक फूड से दूरी रखें तो अच्छा

डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के दिनों में बच्चे ही नहीं बड़े भी चाउमीन और मोमोज खाने से परहेज करें. अगर खाएं भी तो कम केमिकल्स के साथ खाएं.

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देश के शहरी बच्चों में आज-कल चाउमीन, मोमोज और नूडल्स खाने का विशेष शौक पनप रहा है. खासकर बच्चों में तो चाउमीन, मोमोज और नूडल्स खाना रोज का दिनचर्या बनता जा रहा है. लेकिन, हाल के दिनों में इस आदत ने कई बच्चों को अस्पताल पहुंचा दिया है. डॉक्टरों का कहना है, 'गर्मी के दिनों में बच्चे ही नहीं बड़े भी चाउमीन और मोमोज खाने से परहेज करें. अगर खाएं भी तो कम केमिकल्स के साथ खाएं. जो बच्चा चाउमीन, मोमोज या नूडल्स खाता है वह नहीं खाने वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा बीमार पड़ता है.'

बता दें कि हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो चाउमीन खाने वालों के लिए बुरा है. हरियाणा के यमुना नगर में एक बच्चे को चाउमीन खाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. डॉक्‍टरों ने उस बच्चे की जान बड़ी मुश्किल से बचाई. बच्चे ने चाउमीन में सॉस अधिक डाल लिया. चाउमिन और सॉस खाने से उसके फेफड़े फट गए. परिजन बच्चे को लेकर अस्पतालों की ठोकरें खाते रहे, लेकिन सब ने जवाब दे दिया. अंत में उसे एक प्राइवेट अस्पताल लेकर जाना पड़ा, जहां काफी मशक्‍कत के बाद डॉक्‍टरों ने उसकी जान बचाई. उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. वह 23 दिनों से अस्‍पताल में भर्ती था और अब डॉक्टरों ने उसे छुट्टी दी है.

दिल्ली का एलएनजेपी अस्पताल जहां पर गर्मियों के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है.


दिल्ली के लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) के प्रोफेसर डॉ नरेश कुमार न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'देखिए चाउमीन में तरह-तरह के केमिकल्स मिलाने का प्रचलन शुरू हो गया है. चाउमीन बनाने में सेनिटेशन का विशेष ध्यान रखना चाहिए. अगर ठीक से साफ सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया तो न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस नाम की बीमारी हो सकती है. इससे सर दर्द, बेहोशी के साथ दौरे भी पड़ सकते हैं. रिफाइन भी ठीक इस्तेमाल होना चाहिए. अगर रिफाइन बढ़िया इस्तेमाल नहीं होता है तो पाचन में दिक्कत होगी. चाउमीन में मैदा ज्यादा होने के कारण कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो जाती है. क्योंकि इसमें सब्जियों का भी प्रयोग होता है इसलिए सब्जी की मात्रा डालने में भी सावधानी बरतनी पड़ती है. अगर सब्जी की मात्रा ठीक से नहीं डाली जाए तो इससे भी लोग बीमार पड़ सकते हैं. सब्जियों में सॉस का प्रयोग एक मानक मात्रा में नहीं होने से आंत संबंधी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.'

डॉ नरेश आगे कहते हैं, 'चाउमीन में एजीनोमोटो का प्रयोग एक सीमित मात्रा में होना चाहिए. नूडल्स में भी खतरनाक केमिकल्स मोनोसोडियम ग्लूटामेट मिलाया जाता है, जो सेहत के लिए काफी नुकसानदेह होता है. बहुत सारे लोगों को पता नहीं है कि इसके क्या-क्या साइड इफेक्ट्स होते हैं. यह व्यस्क, बच्चे और गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदायक है. वैसे भी ज्यादा मात्रा में जंक फूड खाने से जोड़ों, किडनी, लीवर, भूख नहीं लगना और मोटापा जैसी समस्याओं से हर रोज दो चार होना पड़ रहा है. जंक फूड में एमएसजी की मात्रा ज्यादा होती है जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. इस मौसम में जो लोग चाउमीन खाते भी हैं तो वह ज्यादा चटनी खाने से परहेज करें, क्योंकि चटनी ज्यादा देर का हो जाने के बाद उसमें एसिटिक ऐसिड हो जाता है.'

पिछले 10-15 सालों में चाइनीज फूड ने देश में अपनी एक अलग मार्केट बना ली है. देश के बड़े शहरों को तो छोड़ दीजिए गांव और कस्बों में भी अब यह एक बड़ा कारोबार बनता जा रहा है. लेकिन, स्वाद के लिए अब जंक फूड में केमिकल्स ज्यादा मिलाने की भी खबर ने खाने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि चाउमीन, नूडल्स और मोमोज खाएं या न खाएं?

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First published: June 24, 2019, 7:47 PM IST
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