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    चार महीने से बगैर सैलरी काम कर रहे डॉक्टर्स का दर्द, कहा-मेरे बच्चे कहते हैं वे कभी डॉक्टर नहीं बनेंगे

    डॉक्टर का कहना है कि वे एजुकेशन लोन तक नहीं चुका पा रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर/रायटर्स)
    डॉक्टर का कहना है कि वे एजुकेशन लोन तक नहीं चुका पा रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर/रायटर्स)

    दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल में डॉक्टर्स 20 दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. यहां डॉक्टर्स को बीते 4 महीनों से सैलरी नहीं मिली है. इस मामले में फिलहाल केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार एक-दूसरे पर आरोप लगा रही है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 25, 2020, 11:39 PM IST
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    नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली स्थित हिंदु राव हॉस्पिटल (Hindu Rao hospital) में सैलरी न मिलने से परेशान डॉक्टर और दूसरे हेल्थ केयर वर्कर्स बीते करीब 20 दिनों से लगातार विरोध कर रहे हैं. हालांकि, इस दौरान मरीजों के इलाज को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर्स कुछ समय में मरीजों का इलाज करते रहते हैं. इन्हीं में से पांच डॉक्टर ऐसे हैं, जो बीते पांच दिनों से भूख हड़ताल (Hunger Strike) पर हैं.

    यह अस्पताल नॉर्थ एमसीडी यानि म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन दिल्ली (Municipal Corporation Delhi) से संचालित होता है. फिलहाल मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. मरीजों के इलाज का ध्यान रख रहे डॉक्टर्स में से एक का कहना है 'हम किसी को भी दर्द में नहीं देख सकते. एक डॉक्टर होने के नाते हम मरीज से मुंह नहीं मोड़ सकते.'

    दूसरे को दर्द को दूर करने वाले डॉक्टर्स का दर्द उन्हीं से जानिए



    बच्चे कहते हैं कि वे कभी डॉक्टर नहीं बनेंगे
    साल के इस वक्त में मेरी बीवी और बच्चे त्यौहार की तैयारियां शुरू कर देते थे. इस बार कोई लाइट नहीं हैं, कोई मिठाई नहीं, कोई नए कपड़े नहीं हैं. मेरा परिवार भी मुझसे इन चीजों को लाने के लिए नहीं कह रहा. अपने परिवार को छोटी-छोटी खुशियां नहीं दे पाना बेहद दुखद है. इसमें सबसे बुरा है, मेरे बच्चे मुझे देखते हैं और कहते हैं कि वे कभी डॉक्टर नहीं बनेंगे.
    डॉक्टर एस, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट

    जिनकी मदद करनी चाहिए उनसे पैसे उधार ले रहा हूं
    'मैं 31 साल का हूं. मुझे अपनी बीमार मां और रिटायर्ड पिता का ख्याल रखना चाहिए. इसके बजाए मैं उन्हीं से पैसे उधार ले रहा हूं. ताकि मैं दिल्ली में रह सकूं और मरीजों का इलाज करने के लिए अस्पताल पहुंच सकूं.'
    डॉक्टर एस, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर



    बच्चे को नहीं लग पा रहा टीका
    मैं और मेरी पत्नी दोनों हिंदू राव में काम करते हैं और हम में से किसी को भी सैलरी नहीं मिल रही है. इसका मतलब है कि बीते चार महीनों से घर की कमाई एकदम शून्य है. हम हमारे 2 साल के बेटे को मेनिंगोकोकल और न्युमोकोकल का इंजेक्शन लगवाने ले गए थे, जिसकी कीमत करीब 5 हजार रुपए थी. हम यह टीका नहीं खरीद सकते थे और हमें वापस लौटना पड़ा. हमारे लिए जीना मुश्किल हो रहा है.
    डॉक्टर ए, जनरल सर्जन

    मैं इस दिन के लिए डॉक्टर नहीं बना था
    मेरे माता-पिता की उम्र 60 साल से ज्यादा है और दोनों कोरोना वायरस पॉजिटिव हैं. दोनों अस्पताल में भर्ती हैं और एक डॉक्टर होने के बावजूद मुझे रिश्तेदारों से पैसे मांगने पड़े. इतनी मेहनत कर मैं इस दिन के लिए डॉक्टर नहीं बना था.
    डॉक्टर पी, ऑर्थोपेडिस्ट

    बैंक वालों से कह रहा हूं कि मैं असहाय हूं
    मैंने अपनी डिग्री के लिए लोन लिया था. आज मैं डॉक्टर तो बन गया, लेकिन एजुकेशन लोन नहीं चुका पा रहा हूं. मैं एक डिफॉल्टर हूं, जिसने 3 महीनों से अपना लोन नहीं दिया है. बैंक वाले मुझे रोज फोन करते हैं. मैं उनसे कहता हूं कि मैं असहाय हूं.
    डॉक्टर ए, गायनेकोलॉजिस्ट
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