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गार्लिक ब्रेड में कितना लहसुन है? जल्द लगेगा पता, FSSAI ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव

गार्लिक ब्रेड में कितना लहसुन है? जल्द लगेगा पता, FSSAI ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव

मंत्रालय से एक बार अनुमति मिल जाने के बाद ड्राफ्ट को पब्लिक के कमेंट के लिए रखा जाएगा. इसके बाद नोटिफिकेशन जारी होगा.  फाइल फोटो

मंत्रालय से एक बार अनुमति मिल जाने के बाद ड्राफ्ट को पब्लिक के कमेंट के लिए रखा जाएगा. इसके बाद नोटिफिकेशन जारी होगा. फाइल फोटो

Ministry of Health and Family Welfare: अगर प्रस्ताव को केंद्र सरकार की ओर से ब्रेड के रेगुलेशन की अनुमति मिल जाती है, तो ब्रेड निर्माता कंपनियों को अब गार्लिक ब्रेड में गार्लिक शामिल करना होगा. कम से कम कुल आटे की मात्रा का एक निश्चित हिस्सा.

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  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. गार्लिक ब्रेड में कितना गार्लिक (लहसुन) है, ये जल्द ही पता चल जाएगा, क्योंकि बाजार में बिकने वाले विशेष प्रकार के ब्रेड्स (Breads) नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi) की जांच के घेरे में हैं. चाहे वह गार्लिक ब्रेड (Garlic Bread) हो या मल्टी ग्रेन या फिर पूरी तरह गेहूं से बना ब्रेड… केंद्र सरकार की योजना ब्रेड निर्माता की इंडस्ट्री को रेगुलेट करने की है. न्यूज18 को मिली जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में ब्रेड के तौर पर विशेष प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों के लिए कोई मानक तय नहीं हैं. FSSAI की ओर से स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए रेगुलेशन ड्राफ्ट के मुताबिक पांच प्रकार के ब्रेड रेगुलेट किए जाएंगे.

    न्यूज18 को मिले ड्राफ्ट रेगुलेशन के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय से पांच प्रकार के ब्रेड्स को रेगुलेट करने के लिए मंजूरी प्रदान करने की मांग की गई है. इनमें पूर्ण तौर पर गेहूं से बना ब्रेड (whole wheat bread), ब्राउन ब्रेड, व्हाइट ब्रेड, मल्टीग्रेन ब्रेड और अन्य 14 प्रकार के विशेष ब्रेड को रेगुलेट करने के लिए मंजूरी मांगी गई है. इन ब्रेड्स में गार्लिक ब्रेड, एग ब्रेड, ओटमिल ब्रेड, मिल्क ब्रेड और चीज ब्रेड भी शामिल हैं.

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर न्यूज18 को बताया, ‘हमने ये कदम उपभोक्ताओं द्वारा स्पेशल ब्रेड्स खरीदने पर बहुत ज्यादा रकम खर्च करने की सूचनाओं के आधार पर उठाया है. ग्राहकों को ये पता ही नहीं होता है कि जो स्पेशल ब्रेड वो खरीद रहे हैं, उसमें कितना गार्लिक है? एक टुकड़ा भी या नहीं बिल्कुल नहीं है.’ उन्होंने कहा कि ऐसे ब्रेड की कीमत सामान्य ब्रेड के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है.

    अगर प्रस्ताव को केंद्र सरकार की ओर से ब्रेड के रेगुलेशन की अनुमति मिल जाती है, तो ब्रेड निर्माता कंपनियों को अब गार्लिक ब्रेड में गार्लिक शामिल करना होगा. कम से कम कुल आटे की मात्रा का एक निश्चित हिस्सा. उदाहरण के लिए ओटमिल ब्रेड में कम से कम 15 फीसदी ओटमिल होना चाहिए… वहीं गार्लिक ब्रेड में 2 फीसदी गार्लिक रखना अनिवार्य होगा या ब्राउन ब्रेड में संपूर्ण अनाज के आटे का हिस्सा 50 फीसदी होना चाहिए.

    ब्रेड की कैटेगिरी जांच के घेरे में
    प्रस्ताव में पूरे आटे के बने ब्रेड का पहली कैटेगिरी में जिक्र है, जिसके लिए आटे की मात्रा 75 फीसदी बताई गई है. वहीं मल्टीग्रेन में आटे के अलावा अन्य अनाज की मात्रा कम से कम 20 फीसदी होनी चाहिए. स्पेशलिटी ब्रेड के लिए ड्राफ्ट में प्रस्ताव दिया गया है कि स्पेशल इंग्रेडिएंट के केस में ब्रेड के नाम में प्रीफिक्स के तौर पर जोड़ा जाना चाहिए. और ये अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए.

    इस केस में मिल्क ब्रेड में कम से कम 6 फीसदी हिस्सा दूध से बने उत्पादों का होना चाहिए. वहीं हनी ब्रेड में हनी की मात्रा 5 फीसदी होनी चाहिए. इसी तरह चीज ब्रेड में 10 फीसदी चीज होना चाहिए. साथ ही ओरेगानो सरे बने ब्रेड में ओरेगानो की मात्रा 2 फीसदी होना चाहिए. अन्य ब्रेड में विशेष इंग्रेडिएंट की मात्रा कम से कम 20 फीसदी होनी चाहिए.

    अधिकारी ने कहा कि ज्यादा ब्रेड निर्माता एक ही मानक का पालन करते हैं, हालांकि स्थानीय तौर पर बनने वाले प्रोडक्ट में निर्माता इसका ध्यान नहीं रखते हैं. उन्होंने कहा कि रैंडम चेक और ऑडिट से रेगुलेशन नहीं हो पाएगा, जबकि पूरी इंडस्ट्री का रेगुलेशन नहीं होता है.

    उन्होंने बताया कि मंत्रालय से एक बार अनुमति मिल जाने के बाद ड्राफ्ट को पब्लिक के कमेंट के लिए रखा जाएगा. इसके बाद नोटिफिकेशन जारी होगा. नोटिफिकेशन के बाद इंडस्ट्री के रेगुलेशन का रास्ता साफ हो जाएगा, साथ ही रैंडम सैंपल चेकिंग भी की जा सकेगी.

    Tags: Bread, Brown bread, FSSAI, Ministry of Health and Family Welfare, Multigrain bread, White bread, Whole wheat bread, एफएसएसएआई, ब्रेड, स्वास्थ्य मंत्रालय

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