OPINION: मोदी की रूस यात्रा से चीन का दबदबा होगा कम

Anil Rai | News18Hindi
Updated: September 6, 2019, 1:21 PM IST
OPINION: मोदी की रूस यात्रा से चीन का दबदबा होगा कम
रूस यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने 2001 की मॉस्‍को यात्रा के फोटोज सोशल मीडिया पर साझा किए थे.

रूस अब भारत से व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है. ब्लादिवस्तोक और चेन्नई के बीच नया समुद्री रास्ता खुलने से व्यापार बढ़ेगा. साथ ही रूस भारत के साथ तकनीकी साझेदारी को भी तैयार है.

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  • Last Updated: September 6, 2019, 1:21 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारत और रूस के संबंध बहुत पुराने हैं. एक समय तक सोवियत संघ भारत का सबसे महत्वूर्ण सहयोगी देश था. सोवियत संघ के टूटने के बाद भारत और रूस के रिश्ते पहले जैसे नहीं रह पाए. दोनों देशों के बीच रिश्ते तो रहे, लेकिन रक्षा क्षेत्र से आगे नहीं बढ़ पाए. रूस अब भारत से व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है. ब्लादिवस्तोक और चेन्नई के बीच नया समुद्री रास्ता खुलने से भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़ेगा. भारतीय उद्योगपतियों के साथ-साथ कोल इंडिया, सेल, ओएनजीसी जैसी कंपनियां भी निवेश कर सकती हैं. दरअसल लगातार रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत होते चीन को भारत और रूस के मिले बिना चुनौती नहीं दी जा सकती. इस बात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन अच्छी तरह समझते हैं.

तेल और ऊर्जा क्षेत्र में भारत को मिलेगा फायदा
भारत को अभी अपनी ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच तल्ख रिश्तों के कारण आने वाले समय में पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर असर पड़ना तय है. ऐसे में भारत को नया विकल्प मिलने के बाद अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होगी. साथ ही कोयला, नेचुरल गैस, मिनरल्स के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के निवेश के बाद भारत को इन सामानों की आपूर्ति सस्‍ती दरों पर हो पाएगी.

पीएम मोदी के मेक इन इंडिया को मिलेगा बल

रक्षा क्षेत्र में जिस तरह से भारत लगातार आगे बढ़ रहा है, रूस भी भारत के साथ तकनीकी साझेदारी को तैयार है. दरअसल कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण रूस रक्षा क्षेत्र में चीन का मुकाबला नहीं कर पा रहा है. ऐसे में भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में तकनीकी साझेदारी से जहां भारत रक्षा उत्पादन में सक्षम होगा, वहीं रूस भी नई तकनीक का विकास कर पाएगा. रूस ने पीएम मोदी की यात्रा के दौरान कहा है कि वह भारत में ही रायफल्‍स बनाएगा.

मोदी-पुतिन के आपसी संबंधों से मजबूत होगा रिश्ता
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के व्यक्तिगत रिश्ते काफी मजबूत हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2001 की रूस यात्रा का फोटो ट्वीट कर इन रिश्तों की मजबूती का संकेत दिया है. उन्‍होंने बताया कि वह पहली बार 2001 में ही पुतिन से मिले थे. इन दोनों के व्यक्तिगत रिश्तों का ही असर है कि भारत जहां रूस में निवेश करने के लिए तैयार हो गया, वहीं जम्‍मू-कश्मीर में अनुच्‍छेद-370 हटाने के मामले पर रूस ने भारत का खुलकर साथ दिया. रूस ने इसे भारत का आंतरिक मामला करार दिया.
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First published: September 6, 2019, 1:01 PM IST
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