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दिल्ली हिंसा : उपद्रवियों ने News18 की रिपोर्टर से कहा-फोटो मत खींचो, जो दिख रहा है उसका मज़ा लो

News18Hindi
Updated: February 27, 2020, 12:04 AM IST
दिल्ली हिंसा : उपद्रवियों ने News18 की रिपोर्टर से कहा-फोटो मत खींचो, जो दिख रहा है उसका मज़ा लो
भीड़ ने खुशी जाहिर की और घरों को जलने के लिए छोड़ दिया. गर्व के साथ भरी उस भीड़ ने हमें एक तस्वीर क्लिक करने की अनुमति दी.

वहां जो कुछ भी हो रहा था उसे शूट या रिकॉर्ड करने की हमें इजाज़त नहीं थी. भीड़ ने हमें धमकी देते हुए कहा कि अपने फोन जेब से बाहर मत निकालो और जो हो रहा है उसका मजा लो.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 12:04 AM IST
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(रुनझुन शर्मा)

नई दिल्ली. मुझे लगा मैं कोई फिल्म देख रही हूं. वहां का मंज़र भयावह और डरावना था. आदमी तलवार, लोहे की रॉड्स और हॉकी स्टिक्स चला रहे थे, उनमें से कई हेलमेट पहने हुए थे और वे सभी 'जय श्री राम' चिल्ला रहे थे. जैसे ही वे घरों में घुसते वहां से अजीब सी आवाज आती. कुछ मिनटों बाद मैंने उस घर की खिड़की से आग की लपटें उठती देखीं. मैं दो अन्य रिपोर्टर्स के साथ उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके में एक बड़े सीवर नाले के पार खड़ी थी.

वहां जो कुछ भी हो रहा था उसे शूट या रिकॉर्ड करने की हमें इजाज़त नहीं थी. भीड़ ने हमें धमकी देते हुए कहा कि अपने फोन जेब से बाहर मत निकालो और जो हो रहा है उसका मजा लो.

घरों को जलने के लिए छोड़ दिया गया



हमारे सामने और पीछे की गलियों में पत्थरबाजी हो रही थी और एसिड फेंका जा रहा था. वहीं एक धार्मिक स्थान का ढांचा भी जलाया जा रहा था. हमें उसके करीब जाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन काले धुएं का उठता गुबार दूर से भी देखा जा सकता था.

मैं वहां असहाय सी खड़ी घरों को नेस्तनाबूद होते हुए देख रही थी. मैं हैरान थी कि क्यों पुलिस घटनास्थल पर न होकर कई किलोमीटर दूर खड़ी है. अगर रिपोर्टर्स को जानकारी मिल सकती है तो पुलिस को भी मिल सकती है.

भीड़ ने खुशी जाहिर की और घरों को जलने के लिए छोड़ दिया. गर्व के साथ भरी उस भीड़ ने हमें एक तस्वीर क्लिक करने की अनुमति दी.

हम वहां से दूसरी लोकेशन पर पहुंचे जो कि पुराने मौजपुर से थोड़ी ही दूरी पर थी. हमने उस रास्ते में हथियारों से लैस भीड़ देखी. हालांकि पूरे इलाके में धारा 144 लगी हुई थी. पुराने मौजपुर के पास मीतनगर में एक अन्य धार्मिक ढांचा तोड़ा जा रहा था. 200-300 की संख्या में लोग एक पवित्र स्थल को तोड़ रहे थे. ढांचे के भीतर आग लगा दी गई थी जिसके धुएं का गुबार बाहर तक आ रहा था.

हथियार बंद लोगों को लिफ्ट दे रहे थे पुलिसकर्मी
मैं एनडीटीवी के दो रिपोर्टर्स सौरभ शुक्ला और अरविंद गुनासेकर के साथ रिपोर्टिंग कर रही थी. हमने अपनी गाड़ियां रोक दीं. यह मेन रोड नहीं थी, न ही फ्लाइओवर के पास वाली सड़क थी, न ही आस-पास गलियां थीं. मैंने देखा कि कुछ पुलिस वाले बाइक पर आ रहे हैं और हथियार पकड़े हुए लोगों को लिफ्ट दे रहे थे.

जैसा कोई भी रिपोर्टर करता अरविंद गुनासेकर ने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग करनी शुरू कर दी जो कि उन्होंने अपनी शर्ट की जेब में रखा हुआ था. कुछ ही मिनटों में करीब 50 लोग लोहे की रॉड और हॉकी स्टिक लिए हुए हमारी तरफ आने लगे. जब तक हम ये सब समझ पाते उन्होंने अरविंद पर हमला बोल दिया. कई लोग हमारी तरफ बढ़े. सौरभ शुक्ला और मैंने अपने हाथ जोड़ते हुए भीड़ से कहा कि वे हम तीनों को जाने दें. हम बार-बार कह रहे थे हमें माफ कर दीजिए, गलती हो गई, हम पत्रकार हैं. लेकिन उन पर किसी बात का असर नहीं हो रहा था.

फोन से डिलीट करवाई हर तस्वीर और वीडियो
कई मिनट तक अरविंद को लगातार पीटने के बाद, उन्होंने उसके फोन के हर वीडियो और फोटो को डिलीट करवा दिया. उसके बाद ही उन्होंने उसे जाने दिया. वह लंगड़ा रहा था और मुंह से खून बह रहा था. उसका एक दांत गायब था जबकि दो अन्य टूटे हुए थे.

जैसे ही मैं और अरविंद अपनी गाड़ियों के पास पहुंचे जो कि थोड़ी ही दूरी पर खड़ी हुई थीं, हमें डर के साथ एहसास हुआ कि भीड़ ने हमारे साथ मौजूद एक अन्य रिपोर्टर सौरभ शुक्ला को घेर रखा है. भीड़ ने उन्हें घेरकर कहा कि वह अपने फोन से सभी फोटो और वीडियो डिलीट करें वरना उनके फोन को आग लगा दी जाएगी.

पूछा गया हमारा धर्म
मैं वापस गई और फिर भीड़ से विनती की. मेरा फोन मेरी ट्रैक पैंट में रखा हुआ था लेकिन मैंने उनसे कहा कि वो कार में है. मैंने प्रार्थना की कि वे मेरे साथ ऐसा कुछ न करें और शुक्र है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया.

उन्होंने हमसे हमारा धर्म पूछा. मैंने उन्हें अपना प्रेस कार्ड दिखाया. मैंने उन्हें अपना सरनेम 'शर्मा' भी बताया. सौरभ शुक्ला ने अपनी रुद्राक्ष की माला उन्हें दिखाई. वे जानना चाहते थे कि क्या हम उनमें से एक हैं. कई मिनट भीख मांगने और विनती करने के बाद और सबसे जरूरी अपनी धार्मिक पहचान बताने के बाद उन्होंने हमें जाने दिया. हम अपने हाथ जोड़कर वहां से आ गए. वह अलविदा के तौर पर हमसे जयश्री राम बुलवाना चाहते थे.

(ये अर्टिकल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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First published: February 26, 2020, 6:40 PM IST
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