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आंध्र प्रदेश में विलुप्ति की कगार पर गधे, यौन शक्ति बढ़ाने के लिए मांस खा रहे लोग

गधे का मांस 600 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है.(सांकेतिक तस्वीर)

गधे का मांस 600 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है.(सांकेतिक तस्वीर)

Illegal Donkey Trade: आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में हाल के दिनों में यह मिथक जोर पकड़ रहा है कि गधे के मांस से कमरदर्द और अस्थमा में आराम मिलने के साथ ही यौन शक्ति भी बढ़ती है. हालांकि FSSAI के अनुसार, गधों को खाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और उन्हें मारना गैरकानूनी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 12:00 PM IST
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नई दिल्ली. रास्तों पर आसानी से नजर आने वाला गधा (Donkey) अब विलुप्त होने की कगार पर है. उसे देश में विलुप्त हो रहे जानवरों की सूची में शामिल किया गया है. दरअसल, इस शांत और मासूम जानवर की कम हो रही संख्या के पीछे कारण इन्हें मारना बताया जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि लोग मानते हैं कि गधे का मांस खाने से उन्हें स्वास्थ्य में लाभ होगा, जबकि फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के अनुसार, गधों को खाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. साथ ही इन्हें मारना अवैध है. आंध्र प्रदेश में इस मामले को लेकर जांच जारी है.

आंध्र प्रदेश में गधे के मांस (Donkey Meat) के इस्तेमाल को लेकर जांच की जा रही है. कुछ लोग इस मिथक को मान रहे हैं कि गधे के मांस से कमरदर्द और अस्थमा में आराम मिलने के साथ ही यौन शक्ति भी बढ़ती है. पशुओं के लिए काम करने वाले गोपाल आर सुरबथुला ने बताया 'गधे का मांस सबसे ज्यादा प्रकासम, कृष्णा, पश्चिमी गोदावरी और गुंटूर जिले में किया जा रहा है.' उन्होंने बताया कि हर गुरुवार और रविवार को मांस की सेल होती है, जहां शिक्षित भी इन्हें खरीदते देखे जा सकते हैं. माना जा रहा है कि ऐसे मौकों पर कम से कम 100 गधों को मार दिया जाता है.

उन्होंने यह जानकारी दी है कि इस कारोबार में शामिल लोग गधों को कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से मंगा रहे हैं. वहीं, इस अवैध कारोबार को लेकर कई पशु प्रेमियों ने मामला दर्ज करा दिया है. साथ ही गधों को लेकर दूसरे राज्यों से हो रहे ट्रांसपोर्टेशन पर भी जांच गहन हो गई है. सुरबथुला ने जानकारी दी है कि गधे का मांस 600 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है.



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इसके पीछे यह हो सकती है कहानी
पशु अधिकार कार्यकर्ता के अनुसार, माना जाता है कि गधे का मांस खाने की आदत प्रकासम जिले के स्टुअर्टपुरम से शुरू हुई है. यह इलाका कभी खतरनाक चोरों का गढ़ माना जाता था. यहां एक मिथक प्रचलित था कि गधे का खून पीने और लंबे समय तक भागने से दौड़ने की क्षमता बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि माना जाता है कि कुछ मछुआरे भी बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने जाने से पहले गधे का खून पीते हैं.

फिल्मी सितारे भी कर रहे प्रचार
हाल ही में रिलीज हुई हिट फिल्म क्रैक में भी इससे जुड़ा एक सीन दिखाया गया था. जिसमें स्टार रवि तेजा और श्रुति हासन को गधे का खून पीकर दौड़ते हुए दिखाया गया. आंध्र प्रदेश पशुपालन विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर धनलक्ष्मी ने कहा है कि गधों को मारना अवैध है. उन्होंने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें इस कारोबार से जुड़ी शिकायतें मिली हैं.
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