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आने वाले दिनों में भी देश में कम नहीं होगी महंगाई, एक्सपर्ट्स ने बताई ये बड़ी वजह

आने वाले दिनों में भी देश में कम नहीं होगी महंगाई, एक्सपर्ट्स ने बताई ये बड़ी वजह

अभी महंगाई बनी रहेगी.

अभी महंगाई बनी रहेगी.

Post Diwali Inflation: एक्सपर्ट अशोक अग्रवाल के मुताबिक महंगाई के पीछे वास्तविक कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में पहुंची बाधा है. महामारी के दौरान जब वैक्सीनेशन बढ़ा तो देशों ने अपनी इकोनॉमी भी खोली लेकिन सप्लाई उस हिसाब से नहीं बढ़ पाई. फसल खराब होने के कारण देश में प्याज और टमाटर का उत्पादन भी कम हुआ है. हालांकि केंद्र सरकार ने प्याज की कीमतों में दखल देकर ग्राहकों के लिए थोड़ी राहत वाली स्थिति पैदा की है. हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई बारिश के कारण पूरे देश में करीब 15 फीसदी प्याज की फसल बर्बाद हो गई है.

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    नई दिल्ली. दीवाली (Diwali 2021) पर जबरदस्त खरीदारी के दौरान लोगों ने सामान्य चीजों की शॉर्टेज (Shortage) के कारण अधिक दाम चुकाए हैं. अब एक्सपर्ट्स (Experts) का कहना है कि ग्लोबल इकोनॉमी में सप्लाई शॉर्टेज का असर अभी देशी बाजार पर पड़ता रहेगा. एक्सपर्ट्स के मुताबिक महंगाई बने रहने के आसार अभी मजबूत रूप से बने हुए हैं.

    हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दीवाली पर देश के लोगों ने कंज्यूमर गुड्स पर करीब 1.25 लाख करोड़ खर्च किए हैं. इसकी जानकारी कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने दी है. लेकिन होम अप्लाएंसेस और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी वस्तुओं के दाम बीते साल की तुलना में करीब 12 फीसदी महंगे रहे. यानी सप्लाई शॉर्टेज के कारण ये महंगाई बनी रही. लोगों को इसमें अधिक कीमत चुकानी पड़ी.

    हर तरफ पड़ा है सप्लाई शॉर्टेज का असर
    सेमी कंडक्टर्स या यूबीक्विटर्स चिप की कमी के कारण कार, मोबाइल फोन और टीवी जैसे प्रोडक्ट्स के उत्पादन पर असर पड़ा. विजय सेल्स से जुड़े नीलेश गुप्ता का कहना है-दीवाली के बाद अब भी स्टॉक की कमी है, दीवाली के वक्त भी स्टॉक पर्याप्त नहीं था. उनका कहना है कि आई फोन जैसे महंगे मोबाइल फोन की सप्लाई कम थी.

    फसल हुई खराब
    फसल खराब होने के कारण देश में प्याज और टमाटर का उत्पादन भी कम हुआ है. हालांकि केंद्र सरकार ने प्याज की कीमतों में दखल देकर ग्राहकों के लिए थोड़ी राहत वाली स्थिति पैदा की है. हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई बारिश के कारण पूरे देश में करीब 15 फीसदी प्याज की फसल बर्बाद हो गई है. इसके बाद केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने राज्यों के स्टॉक से प्याज निकालने को कहा. अक्टूबर महीने की शुरुआत में जब दाम बढ़ने लगे थे तब केंद्र के इस कदम से लोगों को राहत मिली.

    खाद्य तेलों से जुड़ी मुश्किल
    वहीं खाद्य तेलों की कीमत अब भी ऊंची बनी हुई है जबकि सरकार ने इंपोर्ट टैरिफ में कटौती की है. देश में खाद्य तेलों की कुल मांग का दो तिहाई हिस्सा आयात किया जाता है. सरसों के तेल की कीमत बीते साल की तुलना में इस वक्त करीब 42 प्रतिशत ज्यादा है.

    एक्सपर्ट अशोक अग्रवाल के मुताबिक महंगाई के पीछे वास्तविक कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में पहुंची बाधा है. महामारी के दौरान जब वैक्सीनेशन बढ़ा तो देशों ने अपनी इकोनॉमी भी खोली लेकिन सप्लाई उस हिसाब से नहीं बढ़ पाई.

    Tags: Edible oil price, Inflation, Onion Price

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