असम में CISF जवान को D-वोटर नोटिस, कहा- नहीं जानता कैसे सिद्ध करूं नागरिकता

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में 25 साल से नौकरी कर रहे एक जवान को विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा संदिग्ध मतदाता नोटिस जारी किया गया है.

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Updated: July 8, 2019, 11:51 AM IST
असम में CISF जवान को D-वोटर नोटिस, कहा- नहीं जानता कैसे सिद्ध करूं नागरिकता
असम में सीआईएसफ नागरिक को डी-वोटर नोटिस मिला है. (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: July 8, 2019, 11:51 AM IST
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान ने रविवार को दावा किया कि उसे कामरूप जिले में स्थित एक विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा संदिग्ध मतदाता नोटिस जारी किया गया है. महमूद अली ने पत्रकारों को बताया कि नोटिस की वजह से उन्हें मजबूरन बांकुरा से घर वापस आना पड़ा.

दालगांव में नागारबेरा के निवासी अली ने कहा, '25 साल तक CISF जवान के रूप में देश की सेवा करने के बाद मुझे नहीं पता कि मुझे अपनी भारतीय नागरिकता कैसे साबित करनी चाहिए. क्या सरकार ने मुझे यही इनाम दिया है.' उन्होंने कहा, 'मेरे पास 1947 से सभी आवश्यक दस्तावेज हैं, उस साल मेरे पिता के स्कूल प्रमाण से शुरू होते हैं. सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी. मुझे इंसाफ चाहिए.'

कामरूप के डिप्टी कमिश्नर कमल कुमार बैश्य ने रविवार रात को बताया कि उन्हें नोटिस के बारे में जानकारी मिल चुकी है और इस मामले को देखेंगे.

स्थानीय लोगों ने किया प्रदर्शन

स्थानीय लोगों ने अली को मिले नोटिस को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार से लोगों को परेशान न करने की मांग की. एक प्रदर्शनकर्ता ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार द्वारा बार-बार सीआईएसएफ और सेना के जवानों को विदेशी घोषित किया जा रहा है. हमें न्याय चाहिए और ये जवाब भी कि वास्तव में वह क्या कर रही है.'

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असम में लगभग 100 विदेशी ट्रिब्यूनल हैं जो नागरिकता निर्धारित करने के लिए अर्ध-न्यायिक निकाय हैं.
असम में लगभग 100 विदेशी ट्रिब्यूनल हैं जो नागरिकता निर्धारित करने के लिए अर्ध-न्यायिक निकाय हैं.

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हो चुकी हैं कई गलतियां
मई में असम बॉर्डर पुलिस के सब-इंस्पेक्टर एमडी सनाउल्लाह को विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित कर दिया गया और गोलपारा जिले के हिरासत केंद्र में भेज दिया था. जून में गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद उन्हें रिहा किया गया.

तीन साल हिरासत में रहीं मधुबाला मंडल
गलत पहचान के एक अन्य मामले में 59 साल की मधुबाला मंडल को तीन साल पहले गिरफ्तार किया गया था. बाद में असम पुलिस ने विदेशीय ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया कि यह गलत पहचान का मामला था.

बता दें कि असम में लगभग 100 विदेशी ट्रिब्यूनल हैं जो नागरिकता निर्धारित करने के लिए अर्ध-न्यायिक निकाय हैं. वे जिन लोगों को विदेशी घोषित करते हैं उन्हें हिरासत केंद्रों में भेजा जाता है.

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First published: July 8, 2019, 10:05 AM IST
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