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लोकसभा स्पीकर की TMC-BJP सांसदों को फटकार, कहा- इसे बंगाल विधानसभा मत बनाइए

भाषा
Updated: November 18, 2019, 9:51 PM IST
लोकसभा स्पीकर की TMC-BJP सांसदों को फटकार, कहा- इसे बंगाल विधानसभा मत बनाइए
लोकसभा स्पीकल ओम बिरला ने सोमवार को टीएमसी और बीजेपी सांसदों को कड़ी फटकार लगाई.

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Thakur) ने सोमवार को लोकसभा (Loksabha) में चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 (Chit Fund (Amendment) Bill, 2019) पेश किया जिसे लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) के भाजपा (BJP) एवं तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) के सदस्यों के बीच तीखी बहस हो गई.

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नई दिल्ली. लोकसभा (Loksabha) में चिट फंड घोटाले (Chit Fund Scam) को लेकर सोमवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के भाजपा (BJP) एवं तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) के सदस्यों के बीच तीखी बहस को शांत कराने के लिए स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) को हस्तक्षेप करते हुए यह कहना पड़ गया, ‘लोकसभा को (पश्चिम) बंगाल विधानसभा नहीं बनाइए.’

दोनों दलों के सदस्यों के बीच यह बहस सदन में ‘चिट फंड संशोधन विधेयक, 2019’ पर चर्चा के दौरान हुई. चर्चा के दौरान भाजपा की लॉकेट चटर्जी ने बंगाल में कथित चिटफंड घोटाले को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा, जिस पर तृणमूल सदस्यों से उनकी नोकझोंक हुई. कल्याण बनर्जी सहित तृणमूल के कई सदस्यों ने चटर्जी की बात का लगातार विरोध किया और इस मुद्दे पर टीका-टिप्पणी जारी रखी.

स्पीकर ने लगाई फटकार
इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, ‘‘लोकसभा को बंगाल विधानसभा नहीं बनाइए. जो विधेयक (सदन में) है, उस पर चर्चा करें. विधेयक से बाहर चर्चा नहीं करें.’’ चर्चा के दौरान चटर्जी ने कहा कि बंगाल में जिन चिटफंड कंपनियों ने लोगों से धोखाधड़ी की है उसके मालिकों की संपत्ति जब्त की जानी चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में चिटफंड एक परिवार की कंपनी है. उन्होंने दावा किया, ‘‘पूरी तृणमूल कांग्रेस इसमें (चिटफंड घोटाले में) शामिल है. प्रधानमंत्री को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए.’

लोकसभा में पेश हुआ चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में चिट फंड संशोधन विधेयक 2019 पेश किया जिसका उद्देश्य चिट फंड क्षेत्र का सुव्यवस्थित विकास करने के लिए इस उद्योग के समक्ष आ रही अड़चनों को दूर करना है.
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सदन में विधेयक पेश करते हुए ठाकुर ने कहा कि चिट फंड सालों से छोटे कारोबारों और गरीब वर्ग के लोगों के लिए निवेश का स्रोत रहा है लेकिन कुछ पक्षकारों ने इसमें अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी जिसके बाद सरकार ने एक परामर्श समूह बनाया. उन्होंने कहा कि 1982 के मूल कानून को चिट फंड के विनियमन का उपबंध करने के लिए लाया गया था. संसदीय समिति की सिफारिश पर इसमें अब संशोधन के लिए विधेयक लाया गया है.

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First published: November 18, 2019, 9:06 PM IST
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