कोरोना के सभी मरीजों को नहीं होती है रेमडिसिविर की जरूरत, समझें एक्सपर्ट्स से

गुरुतेग बहादुर अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पूर्व प्रोफेसर और एनआईआईआरएनसीडी जोधपुर के निदेशक डॉ. अरूण शर्मा ने न्यूज18 के सवालों का जवाब दिया.

गुरुतेग बहादुर अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पूर्व प्रोफेसर और एनआईआईआरएनसीडी जोधपुर के निदेशक डॉ. अरूण शर्मा ने न्यूज18 के सवालों का जवाब दिया.

Use of Remdesivir in Coronavirus Treatment: कोरोना के अति गंभीर मरीज जिन्हें आरटी-पीसीआर के अतिरिक्त सीटी चेस्ट में भी कोरोना पॉजिटिव देखा गया है, उनके लिए भी रेमडिसिविर का इस्तेमाल किया जाता है.

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  • Last Updated: April 20, 2021, 12:00 AM IST
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नई दिल्ली. भारत में कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) की दूसरी लहर चल रही है, जिसने पहली लहर का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है. पिछले 24 घंटे में देश में 2 लाख 73 हजार नए कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी है. कई प्रदेशों से ICU बेड, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी की खबरें सामने आ रही हैं. इसके साथ ही रेमडिसिविर की कमी और कालाबाजारी भी देखी जा रही है, लेकिन जानकारों का मानना है कि रेमडिसिविर कोई जीवनदायिनी दवा नहीं और ये जरूरी नहीं कि हर कोरोना मरीज को ये दवाई दी जाए. कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीजों के लिए प्रयोग की जाने वाली रेमडिसिविर की मांग बीते दिनों देश भर में बढ़ गई. अस्पतालों के सीमित प्रयोग की गाइडलाइन होने के बावजूद रेमडिसिविर (Remdesivir) की मांग केमिस्ट दुकानों से की जा रही है. सरकार ने हाल ही में रेमडिसिविर के शुल्क में भी कमी करने के साथ ही इसके निर्यात पर रोक लगा दी है. इसके तहत पहले इंजेक्शन की घरेलू मांग को पूरा किया जाएगा. बावजूद इसके यह जानना बेहद जरूरी है कि कब और किसको रेमडेसिवीर की जरूरत है और इसकी बिक्री संबंधी नियम क्या है?

इसी मामले पर रेमडेसिविर के प्रयोग और इससे संबंधित गाइडलाइन को लेकर गुरुतेग बहादुर अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पूर्व प्रोफेसर और एनआईआईआरएनसीडी जोधपुर के निदेशक डॉ. अरूण शर्मा ने न्यूज18 के सवालों का जवाब दिया.

न्यूज18 हिंदीः क्या सभी कोरोना संक्रमित मरीजों को रेमडिसिविर की जरूरत होती है?

डॉ. अरूण शर्माः नहीं, कोरोना से संक्रमित सभी मरीजों को एंटीवायरल रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत नहीं होती है, अधिकांश जगह देखा गया है कि मरीज कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट आते ही रेमडेसिविर और ऑक्सीजन ढूंढ़ने लगते हैं, जबकि ऐसा नहीं है, कोरोना के लक्षण आने के बाद भी यदि आपको अन्य किसी तरह की कोई गंभीर बीमारी नहीं है तो अस्पताल में भर्ती भी होने की जरूरत नहीं है. चिकित्सक की सलाह पर ही रेमडेसिविर इंजेक्शन का प्रयोग किया जाना चाहिए. इंजेक्शन को लेकर अभी तक किए गए क्लीनिकल ट्रायल में यह देखा गया कि इंजेक्शन संक्रमण को बढ़ने से रोकता है. इस पर अभी प्रयोगात्मक अध्ययन किए जा रहे हैं, और इंजेक्शन का प्रयोग केवल अस्पतालों में इमरजेंसी यूज ऑर्थराइजेशन के तहत ही किया जा सकता है.
न्यूज18 हिंदीः यदि नहीं, तो किस हालात में किन मरीजों को इसे दिया जाता है?

डॉ. अरूण शर्माः कोरोना के अति गंभीर मरीज जिन्हें आरटी-पीसीआर के अतिरिक्त सीटी चेस्ट में भी कोरोना पॉजिटिव देखा गया है या ऐसे मरीज जिनका सप्ताह भर से बुखार कम नहीं हो या फिर ऐसे मरीज जिन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत है, ऐसे मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन अस्पताल या इलाज करने वाले चिकित्सक द्वारा ही दिया जाता है.

न्यूज18 हिंदीः यदि कोई चिकित्सक मरीज से दवा बाहर से लाने के लिए कहता है तो क्या उसे इसका अधिकार है?



डॉ. अरूण शर्माः भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकाल के अनुसार रेमडेसिविर रिटेल शॉप पर नहीं बेचा जा सकता. सीमित इस्तेमाल के तहत अस्पतालों में ही इसके आपातकालीन प्रयोग की अनुमति दी जाती है, यदि कोई अस्पताल या चिकित्सक इसे मरीज से बाहर से खरीदने के लिए दबाव बनाता है तो इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन कहा जा जाएगा. रेमडेसिविर को मरीज बिना चिकित्सक की सलाह पर घर पर भी प्रयोग नहीं कर सकते और न ही इसे चिकित्सक मरीज को घर पर लेने का परामर्श दे सकते.

कोविड प्रबंधन के सभी उपायों में रेमडेसिविर की बहुत कम भूमिका है. बावजूद इसके गंभीर मरीजों के लिए इसकी मांग बढ़ी है, जिसको देखते हुए सरकार ने रेमडेसिविर का मूल्य आधा करने के साथ ही एनपीपीए (नेशनल फॉर्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी) से इसके बेवजह प्रयोग को नियंत्रित करने की भी बात कही है.

न्यूज18 हिंदीः दवा यदि अस्पताल में ही उपलब्ध कराने का प्रावधान है, तो ओपन बिक्री क्यों हो रही है?

डॉ. अरूण शर्माः खुदरा या रिटेल शॉप पर इस इंजेक्शन की बिक्री नहीं हो सकती, सीमित प्रयोग उत्पाद श्रेणी के तहत इसे केवल अस्पतालों में आपूर्ति किया जाता है. यदि खुदरा दवा कारोबारी इसे खुले बाजार में बेच रहे तो यह गलत है.

न्यूज18 हिंदीः पहले रेमडेसिवीर देश भर में केवल सात उत्पादन केन्द्रों पर बनाई जाती थी, बढ़ती मांग को देखते हुए अब क्या व्यवस्था है?

डॉ. अरूण शर्माः रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के साथ हाल में हुई बैठक में रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगा दी गई है. पहले इंजेक्शन का उत्पादन सात प्रमुख फॉर्मास्युटिकल्स कंपनियों की साइट पर किया जाता था, जिससे रेमडेसिविर की प्रतिमाह 38 लाख शीशियों का उत्पादन होता था. छह अतिरिक्त साइट्स पर इंजेक्शन का उत्पादन होने के बाद अब भारत में हर महीने 78 लाख शीशियां तैयार किए जा सकेंगे. घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इंजेक्शन के निर्यात को रोकने का भी अहम फैसला लिया गया है. रेमडेसिवीर का मूल्य अब अधिकतम पांच हजार और न्यूनतम 899 रुपए कर दिया गया है.



न्यूज18 हिंदीः देश में कई जगहों पर रेमडेसिविर ब्लैक में और चार गुना अधिक कीमत पर बेची जा रही है, ऐसा करने पर क्या किसी सजा या कार्रवाई का भी प्रावधान है?

डॉ. अरूण शर्माः जरूरी दवाओं के स्टॉक को इकट्टा करना या निर्धारित दाम से अधिक बेचना, या दवा होने पर भी नहीं देना, बेवजह मरीजों से दवा रिटेल से लाने पर जोर देना आदि महामारी एक्ट में दंडनीय है. ऐसा करने पर दवा विक्रेता का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है. लेकिन ऐसे अधिकांश मामलों में मरीज खुद शिकायत नहीं करते या फिर जो शिकायतें आती हैं, उनमें पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल पाते, जिससे आसानी से रिटेल या खुदरा दवा विक्रेता बच निकलते हैं.
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