कोरोना वायरस की दूसरी लहर में डीआरडीओ ने यूं की देश की मदद

कोविड की 2-डीजी मेडिसिन पर रेड्डी ने कहा कि ये दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं का टारगेट करती है. फाइल फोटो

कोविड की 2-डीजी मेडिसिन पर रेड्डी ने कहा कि ये दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं का टारगेट करती है. फाइल फोटो

CNN News18 Exclusive: डॉक्टर जी. सतीश रेड्डी ने कहा कि कम समय में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन उत्पादन के लिए डीआरडीओ को पीएम नरेंद्र मोदी से लगातार सहयोग मिला.

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नई दिल्ली. कोरोना संकट के समय देश के जिन संगठनों ने संक्रमण को काबू करने और आम जनता की भलाई के लिए दिन रात एक कर दिया, उनमें रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) का नाम सबसे ऊपर है. डीआरडीओ चेयरपर्सन डॉक्टर जी. सतीश रेड्डी ने सीएनएन न्यूज18 के आनंद नरसिम्हन से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि संकट के समय कम समय में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन उत्पादन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगातार सहयोग मिला. ये वैज्ञानिकों का कर्तव्य है कि वे सशस्त्र बलों को उच्च गुणवत्ता के साजो सामान उपलब्ध कराएं.

डॉक्टर रेड्डी ने कहा कि डीआरडीओ के मेडिकल इंफ्रा को काफी बढ़ावा मिला है. संगठन ने कोरोना की एंटी बॉडी का पता लगाने वाली डिप्कोवैन किट बनाई और 2डीजी मेडिसिन को भी विकसित किया, जिसके जरिए कोरोना मरीजों का इलाज किया सकता है. उन्होंने बताया कि डीआरडीओ ने 5 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट विकसित किए हैं और आने वाले समय में 150 से 175 प्लांट और लगाए जाएंगे. मौजूदा वक्त में डीआरडीओ बहुत सारे अस्पतालों को ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध करा रहा है और कई राज्यों में कोविड अस्पताल का निर्माण कर रहा है.

कोविड की 2-डीजी मेडिसिन पर रेड्डी ने कहा कि ये दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं को टारगेट करती है. वायरस के विकास को रोकती है और वायरल सिंथेसिस को रोकने का काम करती है. उन्होंने कहा कि दवा के इस्तेमाल से अस्पताल में भर्ती मरीजों को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है और सप्लीमेंटल ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता भी कम होती है.

कोरोना संक्रमण को काबू करने के लिए आर्मी के प्रयासों पर डीआरडीओ चेयरपर्सन ने कहा कि मानव संसाधन की कमी को रोकने के लिए 800 डॉक्टर तैनात किए गए थे. 110 मेडिकल कैडेट्स को मेडिकल ऑफिसर के रूप में रिमोट इलाकों में तैनात किया गया था. साथ ही बेस अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाया गया और इलाज के लिए ऑक्सीजन लॉजिस्टिक्स को भी विस्तार दिया गया. साथ ही सेना के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने शोध और विकास में खुद को झोंक दिया.
डीआरडीओ चेयरपर्सन ने कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई को गति देने के लिए नौसेना ने ऑपरेशन समुद्र सेतु 2 शुरू किया. मरीजों के इलाज के लिए स्पेशल हेल्थ सेंटर बनाए गए और 200 बैटलफील्ड नर्सिंग असिस्टेंट को तैनात किया गया. इसके साथ ही भारतीय वायुसेना ने ऑक्सीजन को ट्रांसपोर्ट करने के लिए 990 उड़ानें भरीं और विदेशों से आई राहत साम्रगी को देश के विभिन्न हिस्सों में वितरित करने में अग्रणी भूमिका निभाई.

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