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चीन को भारत की तीसरी सबसे बड़ी मात, ऐप्स, प्रोडक्ट्स के बाद इस चीज के आयात पर लगेगा बैन!

चीन को भारत की तीसरी सबसे बड़ी मात, ऐप्स, प्रोडक्ट्स के बाद इस चीज के आयात पर लगेगा बैन!

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक ये लोग आतंकियों से संवेदनशील सूचनाएं भी साझा करते थे. (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक ये लोग आतंकियों से संवेदनशील सूचनाएं भी साझा करते थे. (फाइल फोटो)

DRDO भारतीय कपड़ा उद्योगों को यार्न का उत्पादन करने में मदद कर रहा है जो इस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को समाप्त करने में मदद करेगा.

    नई दिल्ली. कोरोना, लॉकडाउन के बाद भारत लगातार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है. आत्मनिर्भर भारत के बढ़ते कदम में अब भारतीय सेना की वर्दी (Military uniforms) में इस्तेमाल होने वाले चीनी और कोरियाई कपड़े (Chinese foreign clothing) की जगह अब स्वदेशी कपड़े लेंगे. देश में सैन्य वर्दी बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले चीनी और अन्य विदेशी कपड़ों की जगह लेने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) भारतीय कपड़ा उद्योगों को यार्न का उत्पादन करने में मदद कर रहा है जो इस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को समाप्त करने में मदद करेगा.

    DRDO में उद्योग इंटरफ़ेस और प्रौद्योगिकी प्रबंधन निदेशालय (DIITM) के निदेशक डॉ. मयंक द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना की ग्रीष्मकालीन वर्दी के लिए, कपड़े की अनुमानित आवश्यकता 55 लाख मीटर है और यदि नौसेना, वायु सेना और पैरा मिलिट्री की सभी आवश्यकताएं हैं बलों को जोड़ा जाता है तो आवश्यकता 1.5 करोड़ मीटर प्रति वर्ष से अधिक हो सकती है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर अभियान के आह्वान से प्रेरित होकर डीआरडीओ ने सभी उत्पादों और विशेष रूप से रक्षा उत्पादों में आत्मनिर्भरता के लिए यह कदम उठाया है.

    पैराशूट और बुलेटप्रूफ जैकेट का भी हो सकता है निर्माण
    द्विवेदी ने कहा, अगर ये खास धागे और कपड़े सशस्त्र बलों के वर्दी बनाने के उद्देश्य से भारत में निर्मित किए जाते हैं, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि इससे आत्मानिर्भर भारत की ओर एक और कदम आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. उन्होंने आगे कहा कि उन्नत कपड़े का उपयोग पैराशूट और बुलेटप्रूफ जैकेट की भविष्य की जरूरत के लिए भी किया जा सकता है.

    सेना के 50 लाख से अधिक जवानों के लिए हर साल 5 करोड़ मीटर से ज्यादा की फैब्रिक्स की आवश्यकता होती है. गुजरात में सितंबर में वर्चुअल बैठक में सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री से अनुरोध किया गया था कि वह देश की तीनों सेनाओं सहित विभिन्न सैन्य दलों की आवश्यकता के लिहाज से कपड़ा तैयार करे.

    Tags: India china border dispute, Indian army

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