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2-DG: दवा की तकनीक देने के लिए DRDO ने आमंत्रित किए आवेदन, जानें आखिरी तारीख

2 DG दवा की पहली खेप 17 मई को जारी की गई थी (सांकेतिक तस्वीर)

DRDO 2DG Medicine: 2-डीजी को डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला इन्स्टिट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड सांइस ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी के साथ मिलकर विकसित किया है.

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    नई दिल्ली. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने कोविड-19 के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल में होने वाली दवा 2-डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज़ दवा (2 Deoxy D Glucose) जिसे संस्था ने कुछ दिनों पहले ही विकसित किया है. उसकी तकनीक को बड़ी मात्रा में उत्पादन के लिए भारतीय दवा निर्माता कंपनियों के साथ साझा करने में रुचि दिखाई है. 2-डीजी को डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला इन्स्टिट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड सांइस ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी के साथ मिलकर विकसित किया है.

    2-डीजी के तीसरे फेज़ का ट्रायल जनवरी में शुरू हुआ था, वहीं दूसरे चरण का ट्रायल पिछले साल जून से सितंबर के बीच तीन महीनों के अंदर किया गया था, इसके लिए 110 मरीजों को शामिल किया गया था.
    डीजीसीआई ने पिछले साल मई में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी को हल्के से गंभीर लक्षणों वाले कोविड-19 मरीजों पर 2डीजी के क्लिनिकिल ट्रायल की अनुमति दी थी.

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    हाल ही में सरकार ने दी है हरी झंडी
    सरकार ने हाल ही में 2-डीजी को एंटी कोविड-19 थेरेपेटिक एप्लीकेशन के तौर पर हरी झंडी दी है. 2-डीजी से इलाज करने वाले मरीजों में कोविड-19 को लेकर नेगेटिव आरटी–पीसीआर रिपोर्ट देखने को मिली थी. अब इस तकनीक को कुछ शर्तों के साथ भारतीय दवा निर्माता कंपनी को सौंपने का फैसला लिया गया है. इन नियमों में ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी द्वारा एक्टिव फार्मास्यूटिकल इन्ग्रेडियेंट (एपीआई) को लाइसेंस दिया जाए. इसके लिए 17 जून तक का ही वक्त दिया गया है, और टेक्निकल असेसमेंट टीम, कंपनी की काबिलियत, तकनीकी क्षमता के आधार पर तमाम कंपनियों में से 15 कपंनियों का चुनाव करेंगी. ये सब कुछ पहले आएं.. पहले पाएं के आधार पर होगा.

    बोली लगाने वाली कंपनियों के पास ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटीज से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट (एपीआई) से दवा बनाने का लाइसेंस होना चाहिए.

    गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने आठ मई को कहा था कि क्लीनिकल परीक्षण में पता चला है कि ‘2-डीजी’ अस्पताल में भर्ती मरीजों को तेजी से ठीक करने और ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करने में मदद करती है. डीआरडीओ द्वारा विकसित इस दवाई की पहली खेप 17 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने जारी की थी.