Assembly Banner 2021

डीआरडीओ के 'सिंधु नेत्र' सर्विलांस सैटेलाइट की अंतरिक्ष में तैनाती, हिंद महासागर क्षेत्र पर रहेगी निगाह

सिंधु नेत्र को डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. ANI

सिंधु नेत्र को डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. ANI

Sindhu Netra surveillance satellite: सिंधु नेत्र' से देश की सर्विलांस क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा और हिंद महासागर में सैन्य और व्यापारिक गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 9:17 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर भारत अब और नजदीकी निगाह रख सकेगा. दरअसल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार को हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य और मर्चेंट नेवी के जहाजों की गतिविधियों की निगरानी के वास्ते डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित एक उपग्रह ‘सिंधू नेत्र’ प्रक्षेपित किया. इसरो के प्रमुख के सिवन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उपग्रह को पीएसएलवी-सी51 के जरिये रविवार को प्रक्षेपित किया गया. इसरो ने अपनी वाणिज्यिक इकाई ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनसिल) के प्रथम समर्पित मिशन के तहत रविवार को ब्राजील के अमेजोनिया-1 और 18 अन्य उपग्रहों का पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) सी-51 के जरिए यहां श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया. इन 18 उपग्रहों में से पांच उपग्रह छात्रों द्वारा निर्मित हैं.

सिवन ने कहा कि ‘सिंधू नेत्र’ प्रक्षेपित किये गये उपग्रहों का हिस्सा था. सूत्रों ने बताया कि रक्षा अनुसंधान विकास संगठन द्वारा विकसित उपग्रह भारत के सामरिक और वाणिज्यिक हित के लिए महत्वपूर्ण, हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य और मर्चेंट नेवी के जहाजों की निगरानी भी कर सकता है. 'सिंधु नेत्र' से देश की सर्विलांस क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा और हिंद महासागर में सैन्य और व्यापारिक गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी. सिंधु नेत्र को डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों ने तैयार किया है.

NSIL का टोटल व्यावसायिक प्रक्षेपण
न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का ये पहला पूरी तरह से व्यावसायिक प्रक्षेपण था. इसरो के व्यावसायिक प्रक्षेपण के काम को देखने के लिए 2019 में विज्ञान विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के तौर पर एनएसआईएल का गठन किया गया. सूत्रों के मुताबिक सिंधु नेत्र से अपने क्षेत्र में निगरानी की भारत की क्षमता बहुत बढ़ गई है. चीन से लगने लाने सीमाई इलाकों मसलन लद्दाख से लेकर पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों पर अब नजदीकी नजर रखी जा सकेगी. इसके अलावा दक्षिण चीन सागर, अदन की खाड़ी और अफ्रीकी तटों पर भी इससे नजर रखी जा सकेगी.
अमेजोनिया-1 का प्रक्षेपण


बता दें कि सिंधु नेत्र के साथ भारत ने पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) सी-51 के जरिए ब्राजील के अमेजोनिया-1 (Amazonia-1) और 18 अन्य उपग्रहों का भी सफल प्रक्षेपण किया. यह इसरो का इस साल का पहला मिशन है. पीएसएलवी-सी51 ने उड़ान भरने के बाद सबसे पहले प्राथमिक पेलोड अमेजोनिया-1 को कक्षा में स्थापित किया. करीब डेढ़ घंटे के अंतराल के बादअन्य उपग्रहों को 10 मिनट में एक के बाद एक करके प्रक्षेपित किया गया.

ब्राजील का पहला उपग्रह 
37 किलोग्राम वजनी अमेजोनिया-1 ब्राजील का पहला उपग्रह है जिसे भारत से प्रक्षेपित किया गया. यह राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (आईएनपीई) का ऑप्टिकल पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिन अन्य 18 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया गया है, उनमें से चार उपग्रह इसरो के भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र और 14 उपग्रह एनएसआईएल के हैं.

उपग्रह पर उकेरी PM मोदी की तस्वीर
इन उपग्रहों में चेन्नई की स्पेस किड्ज़ इंडिया (एसकेआई) का उपग्रह भी शामिल है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर उकेरी गई है. एसकेआई का सतीश धवन उपग्रह (एसडी-सैट) सुरक्षित डिजिटल कार्ड प्रारूप में भगवद्गीता को भी अपने साथ लेकर गया है.

एसकेआई ने कहा कि प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर पहल और अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण के लिए एकजुटता और आभार व्यक्त करने के लिए अंतरिक्ष यान के शीर्ष पैनल पर मोदी की तस्वीर उकेरी गई है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज