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ओडिशा तट से MRSA मिसाइल का सफल परीक्षण, जमीन से हवा में 100 किमी तक करेगी हमला

मिसाइल की मारक क्षमता की बात करें तो 100 किलोमीटर के दायरे में टारगेट को भेदने की शक्ति इसके पास है.
मिसाइल की मारक क्षमता की बात करें तो 100 किलोमीटर के दायरे में टारगेट को भेदने की शक्ति इसके पास है.

100 किलोमीटर लंबी मारक क्षमता वाली इस मिसाइल को डीआरडीओ ने इजरायल के साथ मिलकर विकसित किया है. ट्रायल में मिसाइल ने टारगेट पर अचूक निशाना साधा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2020, 6:54 AM IST
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बालासोर. भारत ने जमीन से हवा में मार करने में सक्षम मध्यम रेंज की मिसाइल (MRSAM) का बुधवार को ओडिशा तट से सफल परीक्षण किया. रक्षा सूत्रों ने इस बारे में बताया. उन्होंने बताया कि एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) के परीक्षण स्थल-एक में ‘ग्राउंड मोबाइल लांचर’ से तीन बजकर 55 मिनट पर यह मिसाइल दागी गयी और इसने पूरी सटीकता से लक्ष्य को भेद दिया.

इससे पहले एक मानव रहित यान (यूएवी) ‘बंशी’ को हवा में उड़ान के लिए भेजा गया और एमआरएसएएम ने इसे सटीकता से निशाना बनाया. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना में इसको शामिल करने से रक्षा बलों की लड़ाकू क्षमता में और बढ़ोतरी होगी. सूत्रों ने बताया कि परीक्षण के लिए मिसाइल दागे जाने के बाद से समुद्र में इसके गिरने तक विभिन्न रडार और अन्य उपकरणों के जरिए इसकी निगरानी की गयी.

राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मिसाइल छोड़े जाने के पहले बालासोर जिला प्रशासन ने परीक्षण स्थल के ढाई किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 8100 से ज्यादा लोगों को बुधवार सुबह पास के आश्रय केंद्र में पहुंचा दिया था. इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने साझे तौर पर विकसित किया है. मिसाइल का परीक्षण सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया.



मिसाइल की मारक क्षमता की बात करें तो 100 किलोमीटर के दायरे में टारगेट को भेदने की शक्ति इसके पास है. साथ ही 4.5 मीटर लंबी और परमाणु क्षमता से लैस 2.7 टन वजनी मिसाइल 60 किलोग्राम के पेलोड को भी अपने साथ ढो सकती है. मिसाइल के अलावा इसका लॉन्चिंग सिस्टम मल्टी-फंक्शनल सर्विलांस और खतरे का अलर्ट देने वाले रडार से लैस है, ताकि मिसाइल को ट्रैकिंग और गाइडेंस मिल सके.
नई पीढ़ी की मध्यम रेंज की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (MRSAM) का विकास जेट्स, मिसाइल और रॉकेट्स का हवा में खत्म कर देने के लिए किया जा रहा है.

2016 में इसी परीक्षण स्थल से मिसाइल के नौसैनिक वर्जन का ट्रायल हुआ था, इसके बाद आईएनएस कोच्चि से 2017 में इसका यूजर ट्रायल हुआ.
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