चीन से लोहा ले रही सेना को सर्दियों में नहीं होगी सब्जियों की दिक्कत, DRDO ने की तैयारी

लद्दाख में सेना की मदद के लिए सामने आया डीआरडीओ
लद्दाख में सेना की मदद के लिए सामने आया डीआरडीओ

DRDO working on cultivating vegetables for Indian Army: डीआरडीओ का यह कदम इसलिए भी खास है क्‍योंकि जब लद्दाख (Ladakh) में तापमान माइनस 30 और 40 चला जाता है तब यहां सब्जियां उगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है. लद्दाख में भारी बर्फबारी के बाद अक्‍सर रास्‍ते बंद हो जाते हैं. तब फ्रेश सब्‍जी मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है.

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  • Last Updated: September 22, 2020, 9:10 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश के प्रतिष्ठित रक्षा शोध संस्थान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन/डीआरडीओ (DRDO) ने लेह और आस-पास के ठंडे क्षेत्रों में भारतीय सेना (Indian Army) के जवानों के लिए सब्‍जी उगाने का काम शुरू किया है. इसके लिए लेह (Leh) में डीआरडीओ के यूनिट डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूड रिसर्च वहां के किसानों और आर्मी यूनिट्स को ट्रेनिंग दे रहा है. डीआरडीओ का यह कदम इसलिए भी खास है क्‍योंकि जब लद्दाख (Ladakh) में तापमान माइनस 30 और 40 चला जाता है तब यहां सब्जियां उगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है. लद्दाख में भारी बर्फबारी के बाद अक्‍सर रास्‍ते बंद हो जाते हैं. तब फ्रेश सब्‍जी मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है.

पूर्वी लद्दाख में चीन का सामना करने में सेना की मदद करेंगे दो कूबड़ वाले ऊंट
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत का चीन के साथ गतिरोध जारी है. दोनों देशों के करीब एक लाख सैनिक सीमा पर तैनात हैं. इस बीच बदलते मौसम और आगे के कुछ महीनों में आने वाली कड़ाके की सर्दी के लिए भारतीय सेना की तैयारी जारी है. सर्द मौसम में सीमा पर लंबे समय तक के लिए टिके रहने के लिए वहां चिकित्सा, सैन्य और अन्य जरूरी सामान पहुंचाए जाने के लिए बर्फीले रास्तों को जारी रखने और पुलों को मजबूत किया जा रहा है.

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इसी कड़ी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास (DRDO) संगठन ने डबल हंप कैमेल यानी दो कूबड़ों वाले ऊंट पर अपना रिसर्च पूरा कर लिया है और आने वाले दिनों में सीमा की अग्रिम चौकियों पर सैनिकों को राशन और हथियार पहुंचाने में मदद करेगा. बीते साल वायुसेना में शामिल हुआ चीनूक एक ओर जहां टैंक ले जाएगा, वहीं ये ऊंट छोटे हथियार और रसद लेकर जाएंगे.

इन ऊंटों की आने वाले दिनों में बड़ी भूमिका हो सकती है. ये ऊंट 17 हजार फीट की ऊंचाई तक ये 170 किलो के राशन और हथियार ले जाने में सक्षम हैं. इसके साथ ही ऊंट पेट्रोलिंग में मदद करेंगे. कर्नल मनोज बत्रा ने News18 इंडिया के संवाददाता अरुण कुमार सिंह के सवालों का जवाब देते हुए जानकारी दी कि ये ऊंट इस परिवेश में ढला हुआ है ऐसे में सेना को इनसे काफी मदद मिलेगी.
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