DRDO के देसी ड्रोन रुस्तम-2 का चित्रदुर्ग में हुआ सफल टेस्ट, जानें क्या है खास

रुस्तम 2 का शनिवार को सफल ट्रायल किया गया.
रुस्तम 2 का शनिवार को सफल ट्रायल किया गया.

DRRO के अनमैन्ड व्हीकल रुस्तम 2 (Rustom 2) का शनिवार को ट्रायल किया गया. कर्नाटक के चित्रदुर्ग में यह ट्रायल सफल रहा. जानें इस स्वदेशी ड्रोन की खास बात क्या है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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  • Last Updated: October 10, 2020, 10:56 AM IST
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चित्रदुर्ग. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार को स्वदेशी प्रोटोटाइप ड्रोन रूस्तम -2 (Rustom 2) की फ्लाइट टेस्टिंग की. कर्नाटक के चित्रदुर्ग में Rustom 2 ने 16,000 फीट की ऊंचाई पर आठ घंटे की उड़ान भरी. इस प्रोटोटाइप के साल 2020 तक अंत तक 26000 फीट और 18 घंटे की स्थिरता हासिल करने की उम्मीद है. डीआरडीओ ने इस तरह का ड्रोन सेना की मदद करने के लिए बनाया है. इसका इस्तेमाल दुश्मन की तलाश करने, निगरानी रखने, टारगेट पर सटीक निशाना लगाने और सिग्नल इंटेलिजेंस में होता है. बता दें कि अमेरिका आतंकियों पर हमला करने के लिए ऐसे ड्रोन का अक्सर इस्तेमाल करता रहता है. इससे पहले साल 2019 के सितंबर में इसका ट्रायल फेल हो गया था. चित्रदुर्ग में ही एक टेस्टिंग के दौरान यह क्रैश हो गया था.

डीआरडीओ ने उम्मीद जाहिर की है कि रुस्तम 2 भारतीय वायु सेना और नौसेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इजरायली हेरॉन अनमैन्ड एरियल व्हीकल वाहन का मुकाबला करेगा. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 1959 के कार्टोग्राफिक दावे के आधार पर लद्दाख में भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की कोशिश के बाद रुस्तम -2 प्रोग्राम को शुरू किया गया. PLA के पास विंग लूंग-II आर्म्ड ड्रोन हैं. चीन ने उनमें से चार को CPEC गलियारे और ग्वादर बंदरगाह की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान को दे दिया है.

हालांकि रुस्तम -2 को भारतीय सेना में शामिल होने से पहले ट्रायस और टेस्टिंग से गुजरना होगा. रक्षा मंत्रालय वर्तमान में इजरायल एयरोस्पेस उद्योग (IAI) के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि न केवल हेरोन ड्रोन के मौजूदा बेड़े को अपग्रेड किया जा सके, बल्कि मिसाइल और लेजर गाइडेड बमों के साथ हवा से सतह पर मार करने के काबिल बनाया जा सके.



rustom 2 drdo drone
हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक के अधिकारियों के अनुसार, रक्षा अधिग्रहण समिति (डीएसी) द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद हेरोन ड्रोन का तकनीकी अपग्रेडेशन और आर्मिंग कॉन्ट्रैक्टिंग नेगोशिएटिंग कमिटी लेवल के पास है. परियोजना को सुरक्षा समिति (CCS) की कैबिनेट समिति के स्तर पर मंजूरी दी जाएगी.

रुस्तम का दूसरा नाम है - तापस
इस विमान को तापस बीएच-201 भी कहते हैं. रुस्तम 2 को डीआरडीओ ने पूरी तरह स्वदेशी तौर पर विकसित किया है. ये ऐसा ड्रोन है, जो दुश्मन की निगरानी करने, जासूसी करने, दुश्मन ठिकानों की फोटो खींचने के साथ दुश्मन पर हमला करने में भी सक्षम है. अमेरिका आतंकियों पर हमले के लिए ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल करता रहा है. उसी तर्ज पर डीआरडीओ ने सेना में शामिल करने के लिए ऐसे ड्रोन बनाए हैं.

रुस्तम 2 ने फरवरी 2018, उसके बाद जुलाई में सफल परीक्षण उड़ान भरी थी. डीआरडीओ ने कहा था कि 2020 तक ये ड्रोन सेना में शामिल होने के लिए तैयार होंगे. रुस्तम- 2 अमेरिकी ड्रोन प्रिडेटर जैसा है. प्रिडेटर ड्रोन दुश्मन की निगरानी से लेकर हमला करने में सक्षम है.

उड़ान के दौरान ज्यादा शोर नहीं करता रुस्तम-2 यूएवी 
रुस्तम-2 को डीआरडीओ के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इसटैब्लिसमेंट (ADE) ने HAL के साथ पार्टनरशिप करके बनाया है. इसका वजन करीब 2 टन का है. विमान की लंबाई 9.5 मीटर की है. रुस्तम-2 के पंखे करीब 21 मीटर लंबे हैं. ये 224 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ान भर सकता है.

रुस्तम-2 कई तरह के पेलोड्स ले जाने में सक्षम है. इसमें सिंथेटिक अपर्चर राडार, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम और सिचुएशनल अवेयरनेस पेलोड्स शामिल हैं. रुस्तम-2 मे लगे कैमरे 250 किलोमीटर तक की रेंज में तस्वीरें ले सकते हैं. रुस्तम-2 यूएवी उड़ान के दौरान ज्यादा शोर नहीं करता है.



डीआरडीओ ने रुस्तम-2 को यूएवी के 1500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से बनाया है. इसे वायुसेना और थलसेना के साथ नौसेना की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया है. ये पनडुब्बी से उड़ान भरने में भी सक्षम है. इसके जरिए सेना दुश्मनों की निगरानी कर सकती है. दुश्मन ठिकानों की जासूसी की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर इसके जरिए हमला भी किया जा सकता है.
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