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गृह मंत्रालय ने कहा- पंजाब की ड्रग संबंधी रिपोर्ट में किसानों पर नहीं लगाए गए आरोप

कृषि कानून के खिलाफ देशभर में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं.

कृषि कानून के खिलाफ देशभर में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं.

केंद्र सरकार (Central Government) ने इस संबंध में पंजाब सरकार (Government of Punjab) को पत्र लिखकर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का कहा है. हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि केंद सरकार उनके आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रही है.

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नई दिल्ली. पंजाब के खेतों में काम करने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों (Migrant Workers) को बंधुआ मजदूरों की तरह रखा जाता है और उनसे ज्यादा देर तक मजदूरी कराने के लिए उन्हें ड्रग्स (Farm Labourers Drug Abuse) दिया जा रहा है. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की एक जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है, जिसके बाद केंद्र ने राज्य सरकार से इस पर कदम उठाने के लिए कहा है.  वहीं पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर इस चिट्ठी की बात तो कबूली लेकिन बीएसएफ की जांच रिपोर्ट को लेकर कहा कि इस 'बढ़ा-चढ़ाकर' पेश किया गया है.

गृह मंत्रालय ने इस खबर के संबंध में एक बयान जारी कर कहा है कि "मीडिया के एक वर्ग में गलत तरीके से बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को कथित रूप से राज्य के किसानों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पत्र लिखा है. ये समाचार रिपोर्ट भ्रामक हैं." मंत्रालय ने कहा कि "ये समाचार रिपोर्ट 2 वर्षों की अवधि में पंजाब के 4 संवेदनशील सीमावर्ती जिलों से आने वाली सामाजिक आर्थिक समस्या के बारे में सरल अवलोकन की विकृत और अत्यधिक संपादकीय राय प्रस्तुत करती हैं, जिसे संबंधित सीएपीएफ द्वारा इस मंत्रालय के ध्यान में लाया गया है."





गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि "इस मंत्रालय द्वारा किसी विशेष राज्य या राज्यों को जारी किए गए पत्र को कोई मकसद नहीं माना जा सकता है क्योंकि यह कानून और व्यवस्था के मुद्दों पर नियमित संचार का हिस्सा है." मंत्रालय ने कहा कि "पत्र में स्पष्ट रूप से केवल यही कहा गया है कि "मानव तस्करी सिंडिकेट्स" ऐसे मजदूरों को किराए पर लेते हैं और उनका "अधिक श्रम के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले दवाओं के लालच के अलावा" उनका शोषण किया जाता है, उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है."
गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि मंत्रालय ने केवल राज्य सरकार से "इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए उपयुक्त उपाय करने" का अनुरोध किया है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसान नेताओं ने इसे किसानों के खिलाफ की सरकार की साजिश करार दिया था.

इंडियन एक्‍सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने एक खत लिखकर पंजाब सरकार से उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा जो नशा देकर प्रवासी मजदूरों से लंबे समय तक काम कराते हैं. बता दें कि हाल ही में बीएसएफ ने इस संबंध में केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2019-20 के दैरान पंजाब के सीमावर्ती जिलों में ऐसे करीब 58 बंधुआ मजदूर पाए गए थे जो मानसिक तौर पर रोगी नजर आ रहे थे. उन लोगों से जब सवाल किए गए तो ये लोग ठीक तरीके से जवाब तक नहीं दे पा रहे थे .

बता दें कि गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में 17 मार्च को पंजाब के चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को खत भेजा गया था. इस तरह का मामला सामने आने के बाद बीकेयू डाकुंडा के महासचिव महासचिव और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) के सदस्य जगमोहन सिंह ने केंद्र पर किसानों की छवि खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही एनडीए के पूर्व सहयोगी, शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने कहा कि यह पत्र राज्य के किसानों को बदनाम करने के उद्देश्य से हास्यास्पद धारणा पर आधारित था.

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बीएसएफ द्वारा गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर के सीमावर्ती क्षेत्रों से 58 लोगों को पकड़ने का जिक्र करते हुए केंद्र की ओर से पत्र में बताया गया है कि ये सभी पंजाब के सीमावर्ती गांव में बंधुआ मजूदर के रूप में काम करते हैं. ये सभी गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं और बिहार और उत्तर प्रदेश के दूरदराज के इलाकों से आते हैं.

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पत्र में मानव तस्‍करी का मुद्दा भी उठाया गया है. मानव तस्करी से जुड़े लोग ऐसे मजदूरों को उनके मूल स्थान से पंजाब में अच्‍छे वेतन का वादा करके काम पर लगाते हैं, लेकिन पंजाब पहुंचने के बाद उनका शोषण किया जाता है. उन्‍हें खराब भुगतान किया जाता है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है. खेतों में उन्हें लंबे समय तक काम करने के लिए दवाएं दी जाती हैं, जो उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर गलत प्रभाव डालती हैं. बीएसएफ आगे की कार्रवाई के लिए बचाए गए लोगों को राज्य पुलिस को सौंप दिया है.
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