झारखंड: कोरोना के खौफ से स्कूली बच्चे नहीं कर रहे भोजन, सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

बच्चों नहीं ले रहे मध्यान्ह भोजन, स्कूल ने देना शुरू किया कच्चा खाद्यान्न.

बच्चों नहीं ले रहे मध्यान्ह भोजन, स्कूल ने देना शुरू किया कच्चा खाद्यान्न.

कोरोना के भय से बच्चों ने स्कूल में मध्यान्न भोजन बंद कर दिया. इस पर अब शिक्षा विभाग को नया आदेश जारी करना पड़ा. विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि जो बच्चे स्कूल आने के बाद भी मध्यान्ह भोजन नहीं कर रहे हैं, उन्हें चावल और सूखा मिड डे मील का पैकेट तैयार कर दिया जाए.

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रांची. कोविड वैक्सीन आने के बाद सरकारी स्कूल (Government School) खुल गए हैं. स्कूलों में बच्चों का पहुंचना भी शुरू हो गया है, लेकिन अभिभावकों में डर का माहौल बना हुआ है. बच्चों के अभिभावक कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर स्कूलों में भोजन करने से अपने बच्चों को मना कर रहे हैं. वह साफ़ तौर से कह रहे हैं कि बच्चे या तो टिफिन लेकर स्कूल आएंगे या घर लौटकर खाना खाएंगे. इस पर अब शिक्षा विभाग (Education Department) को नया आदेश जारी करना पड़ा. विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया गया कि जो बच्चे स्कूल आने के बाद भी मध्यान्ह भोजन  नहीं कर रहे हैं, उन्हें चावल और सूखा मिड डे मील ( Mid-day meal ) का पैकेट तैयार कर दिया जाए. यानि अब स्कूल से कच्चा खद्यान्न बच्चों के घर पहुंचाया जाएगा और उसके परिजन उसे पकाकर बच्चेे के लिए तैयार करेंगे.

राज्य में 17 मार्च 2020 से ही प्रारंभिक स्कूल बंद थे. एक मार्च से आठवीं की कक्षाएं शुरू हुई हैं. जो बच्चे स्कूल आ रहे हैं उनके के लिए स्कूल में मिड डे मील भी तैयार किया जा रहा है. लेकिन जो बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं उनमें से अधिकांश स्कूल में तैयार भोजन को नहीं ले रहे हैं. बच्चों के अभिभावकों ने बच्चों को कोरोना संक्रमण से सतर्क रहने को लेकर स्कूल के मध्यान्ह भोजन नहीं लेने को लेकर ताकीद किया है.

अभिभावकों ने अध्यापकों से भी उनके बच्चों को मिड डे मील नहीं देने का अनुरोध किया. मिड डे मील नहीं देने के आग्रह के बाद विभाग बच्चों को अब मध्याह्न भोजन का पैकेट तैयार कर उपलब्ध कराया जा रहा है. जो  बच्चे स्कूल आकर मध्याह्न भोजन नहीं कर रहे हैं और जो स्कूल नहीं आ रहे हैं उन सभी बच्चों का चावल के साथ-साथ कुकिंग कॉस्ट की राशि से दाल, तेल, सोयाबीन, आलू समेत सब्जी का पैकेट बनाया जा रहा है. यह पैकेट तैयार कर स्कूल आने के पहले ही घर पर जा कर दिया जा रहा.

आठवीं तक के बच्चों को चावल दिये जाने हैं.17 मार्च 2020 से ही चावल और कुकिंग कॉस्ट की राशि दी गई. सितंबर से कुकिंग कॉस्ट की राशि की जगह  उस से सामान खरीद कर लिए जा रहे हैं. सभी जिलों से मार्च तक का आकलन कर मांगा गया था. इसके बाद मार्च तक की राशि और खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है.
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